Thu 17 Jm2 1435 - 17 April 2014
10922

धूम्रपान के निषेध का कारण

धूम्रपान के निषेध होने का कारण क्या है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

शायद आपको पता होगा कि अब धरती के सभी समुदाय व राष्ट्र - मुसलमान व नास्तिक - धूम्रपान के खिलाफ लड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें उसके व्यापक हानि का ज्ञान है, और इस्लाम हर उस चीज़ को निषेध ठहराता है जो हानिकारक है, जैसाकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : “न हानि जाइज़ है और न एक दूसरे को हानि पहुँचाना जाइज़ है।”

इसमें कोई संदेह नहीं कि खाद्य और पेय पदार्थों में से कुछ उपयेगी व पवित्र हैं, और कुछ हानिकारक व गंदी हैं, और अल्लाह तआला ने हमारे संदेष्टा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की विशेषता का वर्णन अपने इस कथन के द्वारा किया है :

﴿وَيُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَائِثَ﴾ [الأعراف : 157]

“वह उनके लिए पवित्र चीज़ों को हलाल बताते हैं और उनके ऊपर गंदी – अपवित्र - चीज़ों को निषेध ठहराते हैं।”

तो धूम्रपान क्या पवित्र चीज़ों में से है या अपवित्र गंदी चीज़ों में से है ॽ

दूसरा :

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वर्णित है कि आप ने फरमाया : “अल्लाह तआला तुम्हें क़ील क़ाल, अधिक प्रश्न करने और धन को नष्ट करने सें रोकता है।”

तथा अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने फूजूलखर्ची से मन किया है, चुनांचे फरमायो:

﴿ وكلوا واشربوا ولا تسرفوا إنه لا يحب المسرفين ﴾ [الأعراف : 31]

“खाओ और पियो, पर फुज़ूलखर्ची न करो, अल्लाह तआला फुज़ूलखर्ची -अपव्यय- करने वालों को पसंद नहीं करता है।” (सूरतुल आराफः 31).

तथा रहमान के बंदों की विशेषता अपने इस फरमान के द्वारा वर्णन किया है कि :

﴿ والذين إذا أنفقوا لم يسرفوا ولم يقتروا وكان بين ذلك قواما ﴾ [الفرقان : 67].

“और जो खर्च करते वक़्त भी न तो अपव्यय करते हैं, न कंजूसी, बल्कि इन दोनों के बीच का दरमियानी रास्ता होता है।” (सूरतुल फुरक़ानः 67).

अब पूरी दुनिया जानती है कि धूम्रपान में खर्च किया जाने वाला धन एक बर्बाद धन है जिससे कोई लाभ नहीं उठाया जाता है, बल्कि ऐसी चीज़ में खर्च किया जाता है जो हानिकारक है। यदि धूम्रपान में खर्च किए जाने वाले पूरी दुनिया के धन को एकत्र कर लिया जाए तो वे अकाल से जूझ रहे लोगों को बचा सकते हैं, क्या कोई उस आदमी से अधिक मूर्ख हो सकता है जो अपने हाथ में एक डॉलर लेकर उसमें आग लगा दे ॽ ऐसे व्यक्ति और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के बीच क्या अंतर है ॽ बल्कि धूम्रपान करने वाला उस से बढ़कर मूर्ख है, क्योंकि जो आदमी डॉलर को जला देता है उसकी मूर्खता इसी हद तक समाप्त हो जाती है, परंतु धूम्रपान करने वाला धन को जलाता है और अपने शरीर को हानि भी पहुँचाता है।

तीसरा : कितनी ऐसी आपदाएं हैं जिनका कारण धुम्रपान है, सिगरेट के बचे हुए टुकड़ों के कारण जिन्हें फेंका दिया जाता है और वे आग लगने का कारण बनते हैं, तथा सिगरेट के बचे हुए टुकड़े के अलावा भी, घर वाले के धूम्रपान के कारण पूरा एक घर उसके वासियों समेत जल गया, और यह उस समय हुआ जब वे अपनी सिगरेट सुलगा रहा था और गैस लीक हो रहा था।

चौथा : कितने ऐसे लोग हैं जो धूम्रपान करने वालों के दुर्गंध से पीड़ित होते हैं और विशेषकर यदि आपका उससे उस समय पाला पड़ जाए जबकि वह मस्जिद में आपके बगल में हो, और शायद घृणित दुर्गंधों पर धैर्य करना नींद से उठने के बाद धूम्रपान करने वाले के मुंह की दुर्गंध पर धैर्य करने से अधिक आसान है। आश्चर्य होता है महिलाओं पर कि अपने पतियों के मुँह से निकलने वाले दुर्गंध पर कैसे सब्र करती हैं ॽ तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लहसुन या प्याज़ खाने वाले को मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोका है ताकि वह नमाज़ियों को अपनी दुर्गंध से तकलीफ न पहुँचाए, जबकि प्याज़ और लहसुन की गंध धूम्रपान करने वाले की दुर्गंध और उसके मुंह से कमतर होती है।

ये कुछ कारण हैं जिनकी वजह से धूम्रपान को निषेध किया गया है।

शैख सअद अल-हुमैयिद
Create Comments