Thu 17 Jm2 1435 - 17 April 2014
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क्या यह बात संभव है कि आदमी अपनी ओर से जमरात को कंकरी मारने के लिए किसी को प्रतिनिधि बना दे फिर अपने देश को यात्रा कर जाए ॽ

क्या हज्ज करने वाले के लिए जायज़ है कि वह ईद के दिन या दूसरे दिन अपनी तरफ़ से जमरात को कंकरी मारने के लिए किसी को वकील बना दे, फिर अपने देश को यात्रा कर जाए ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

“अल्लाह सर्वशक्तिमान ने अपनी किताब में हज्ज और उम्रा को पूरा करने का आदेश दिया है, अल्लाह का फरमान है : “अल्लाह के लिए हज्ज और उम्रा को पूरा करो।” और उन दोनों की पूर्ति उन्हें अल्लाह के लिए खालिस करने, और उन में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण करने के द्वारा ही संभव है, अतः हज्ज या उम्रा का एहराम बाँधने वाले किसी मुसलमान के लिए जायज़ नहीं है कि वह उन दोनों के कार्यों में से किसी चीज़ के अंदर गड़बड़ी करे, या निषिद्ध चीज़ों में से किसी ऐसी चीज़ को करे जिसे से उन दोनों के अंदर कमी पैदा हो, और जिस व्यक्ति ने तश्रीक़ के दिनों (11, 12 और 13 ज़ुलहिज्जा) में या तश्रीक़ के किसी एक दिन में जमरात को कंकरी मारने के लिए किसी को वकील बना दिया और यौमुन्नहर (क़ुर्बानी का दिन यानी 10 ज़ुलहिज्जा) को प्रस्थान कर गया तो वह ग़लती करने वाला और अल्लाह के शआइर (प्रतीकों) को हीन समझनेवाला समझा जायेगा, और जो व्यक्ति ग्यारह या बारह ज़ुलहिज्जा को जमरात को कंकरी मारने के लिए किसी को वकील बना दे और बिदाई तवाफ करे ताकि वह जल्दी से सफर कर सके तो उसने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीक़े का, और आप ने हज्ज के कार्यों को जिस अनुक्रम (तरतीब) में अदायगी का हुक्म दिया है उसका विरोध किया, उसके ऊपर अनिवार्य है कि वह इस से तौबा व इस्तिगफार करे, तथा ऐसा करनेवाले पर मिना में रात बिताने को त्याग कर देने का एक दम, तथा जमरात को कंकरी न मारने बल्कि किसी दूसरे को वकील बनाकर प्रस्थान कर जाने का एक दम, तथा एक तीसरा दम विदाई तवाफ़ का अनिवार्य है, यद्यपि उसने प्रस्थान के समय काबा का तवाफ किया है, इसलिए कि उसका तवाफ उसके समय पर नहीं हुआ है ; क्योंकि विदाई तवाफ़ जमरात को कंकरी मारने से फारिग होने के बाद होता है।

और अल्लाह तआला ही तौफीक़ प्रदान करने वाला (शक्ति का स्रोत) है, तथा अल्लाह तआला हमारे ईश्दूत मुहम्मद, उनकी संतान और उनके साथियों पर दया और शांति अवतरित करे।

इफ्ता और वैज्ञानिक अनुसंधान की स्थायी समिति

अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़, अब्दुल्लाह बिन गुदैयान, अब्दुल्लाह बिन क़ऊद   

“फतावा स्थयी समिति” (11/288-289)
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