118018: सैन्य जूते पर मसह करने और उसके साथ नमाज़ पढ़ने का हुक्म


हम सैनिक लोग सुबह के सत्र में पवित्रता की हालत में खेल के जूते पहनते हैं। फिर सत्र समाप्त होने के बाद उसे उतार देते हैं और उसी पूर्व पवित्रता पर सैन्य बूट (जूते) पहन लेते हैं। ज़ुहर की नमाज़ के समय इसी जूते पर मसह करते हैं। तो इसका क्या हुक्म है? क्या इससे वुज़ू टूट जाता है? और क्या इस अवस्था में नमाज़ सही है?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम :

सैन्य जूते पर मसह करना जायज़ है क्योंकि वह मोज़ा के हुक्म में है।

शैख फौज़ान हफिज़हुल्लाह से प्रश्न किया गया : क्या सैन्य बूट में नमाज़ जायज़ है? और उसमें वुज़ू करने का क्या तरीक़ा है? और क्या उसकी कोई निर्धारित अवधि है?

तो उन्हों ने उत्तर दिया : ''सैन्य – जूते - में नमाज़ जायज़ है यदि वह पवित्र है और उसके ऊपर कोई गंदगी नहीं लगी है। तथा वुज़ू में उसके ऊपर मसह करना जायज़ है यदि वह पूरी तरह से पैर को ढाँके हुए है, इस प्रकार कि वह दोनों टखनों और उनके नीचे के हिस्से को ढांके हुए हो और पैर पर स्थिर (जमा हुआ) हो। तथा उसने इसे पाकी की हालत में पहना हो, इस तौर पर कि उसने उसे वुज़ू की हालत में पहना हो।

मसह करने का तरीक़ा यह है कि वह अपने दोनों हाथों की उंगलियों को पानी से गीली होने की हालत में अपने पैर की उंगलियों के किनारे रखे, फिर उन्हें गुज़ारते हुए अपनी दोनों पिंडलियों तक लाए।

मसह की अवधि निवासी व्यक्ति के लिए एक दिन और एक रात (चौबीस घन्टा) और मुसाफिर के लिए तीन दिन उसकी रातों समेत (यानी बहत्तर घण्टा) है। यह रूख्सत (छूट) नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से मुतवातिर हदीसों के द्वारा प्रमाणित है। इसका इन्कार केवल बिदअतियों ने किया है। और सहीह कथन के अनुसार मसह की अवधि की शुरूआत पहनने के बाद पहले मसह से शुरू होती है। और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।'' किताब ''अल-मुन्तक़ा'' (2/54) से समाप्त हुआ।

तथा प्रश्न संख्या (69793) का उत्तर देखें।

दूसरा :

मोज़ों या जो उनके हुक्म में हैं जैसे बूट (सैन्य जूते) पर मसह करने की शर्तों में से यह है कि उसने उन्हें संपूर्ण पवित्रता की हालत में पहना हो। इसका वर्णन प्रश्न संख्या (9640) के उत्तर में बीत चुका है।

यदि आप अपने पहले वुज़ू पर बाक़ी थे जिसमें आप ने अपने दोनों पैर धुले थे और स्पोर्ट बूट उतारने के बाद सैन्य जूते पहने थे, तो आपके लिए उस पर मसह करना जायज़ है; क्योंकि आप पर यह बात सच उतरती है कि आप ने उसे मुकम्मल पाकी की हालत में पहना है।

अतः आप जूते पर एक दिन व एक रात तक मसह करेंगे यदि आप निवासी हैं। और यदि आप यात्री हैं तो तीन दिन उसकी रातों सहित मसह करेंगे। मसह की अवधि का आरंभ वुज़ू टूटने के बाद पहली बार मसह करने के समय से होगा। यदि आपको जूते उतारने की ज़रूरत पड़ जाती है, तो आप मोज़ों पर मसह कर सकते हैं। और उस समय आपके सैन्य जूते या स्पोर्ट बूट उतारने से आपको कोई नुक़सान नहीं होगा ; क्योंकि वास्तव में हुक्म दोनों मोज़ों का है।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर

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