Wed 16 Jm2 1435 - 16 April 2014
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ईद या इस्तिस्क़ा की नमाज़ में इमाम के साथ तशह्हुद पाने वाले आदमी का हुक्म

जो व्यक्ति ईदैन (ईदलु फित्र और ईदुल अज्ह़ा) की नमाज़, और इस्तिस्क़ा (अर्थात् अल्लाह तआला से वर्षा मांगने) की नमाज़ में अन्य नमाज़ियों के साथ केवल तशह्हुद को पाता है उस का क्या हुक्म है ? क्या वह दो रक्अत नमाज़ पढ़ेगा और उसी तरह करेगा जिस तरह इमाम ने किया है, अथवा वह क्या करेगा ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

"जिस ने ईदैन (ईदलु फित्र और ईदुल अज्ह़ा) की नमाज़, या इस्तिस्क़ा (अर्थात् अल्लाह तआला से वर्षा मांगने) की नमाज़ में इमाम के साथ केवल तशह्हुद को पाया, तो वह इमाम के सलाम फेरने के बाद दो रक्अत नमाज़ पढ़ेगा जिन में वह उसी तरह तकबीर, क़िराअत, रूकूअ़ और सज्दे करेगा जिस तरह कि इमाम ने किया था।

और अल्लाह तआल ही तौफीक़ देने वाला (शक्ति का स्रोत) है, तथा अल्लाह तआला हमारे ईश्दूत मुहम्मद, आप की संतान और साथियों पर अपनी दया और शांति अवतरित करे।" (समाप्त हुआ)

शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़, शैख अब्दुर्रज़्ज़ाक़ अफीफी, शैख अब्दुल्लाह बिन ग़ुदैयान।

"फतावा अल्लज्ना अद्दाईमा" (स्थायी समिति के फत्वे) (8/307)
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