Sun 20 Jm2 1435 - 20 April 2014
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क्या मह्दी की कोई वास्तविकता है या नहीं?

क्या मह्दी के आगमन की सूचना देने वाली हदीस सहीह है या नहीं? क्योंकि मेरे एक मित्र ने मुझे बताया है कि वह हदीस सहीह नहीं है, बल्कि ज़ईफ (कमज़ोर और अमान्य) है।

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

मह्दी अलैहिस्सलाम के प्रकट होने पर दलालत करने वाली सहीह हदीसें आई हैं, और यह कि वह अंतिम युग में प्रकट होंगे और यह कि वह क़ियामत की निशानियों में से एक निशानी हैं, उन्हीं हदीसों में से कुछ निम्नलिखित हैं :

1- अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "मेरी उम्मत के अंत में महदी निकलें गे, जिन्हें अल्लाह तआला वर्षा से सेराब करेगा, और धरती अपनी उपज को निकाले गी... मवेशियों की बहुतायत हो जायेगी और उम्मत बढ़ जायेगी, वह सात या आठ साल जीवित रहेंगे।" मुस्तदरक हाकिम 4/557-558, और इमाम हाकिम ने कहा है कि: "इस हदीस की इसनाद सहीह है और बुखारी और मुस्लिम ने इसे नहीं रिवायत किया है।" और इमाम ज़हबी ने इसकी पुष्टि की है। और अल्बानी ने कहा है : "यह सनद सहीह है और इसके रिवायत करने वाले सिक़ा (विश्वस्नीय और भरोसेमंद) हैं।" सिलसिलतुल अहादीस अस्सहीहा 2/336 हदीस संख्या : 771.

2- अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्हों ने कहा कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "महदी हम अह्ले-बैत में से हैं, अल्लाह तआला उन्हें एक रात में सुधार देगा।" (मुस्नद अहमद 2/58 हदीस संख्या :645, तहक़ीक़ अहमद शाकिर, और उन्हों ने कहा है कि, "इसकी सनद सहीह है।" सुनन इब्ने माजा 2/1367, तथा इस हदीस को अल्बानी ने भी सहीहुल जामिअ़ अस्सग़ीर (6735) में सहीह कहा है)

इब्ने कसीर रहिमहुल्लाह फरमाते हैं : "अर्थात् अल्लाह तआला उनकी तौबा को क़बूल करेगा, उनको तौफीक़ देगा, उनको इल्हाम करेगा और उनका मार्गदर्शन करेगा जबकि पहले वह ऐसा नहीं थे।" (अन्निहाया फिल फितन् वल-मलाहिम 1/29 तहक़ीक़ : ताहा ज़ैनी।)

3- अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्हों ने कहा कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "महदी मुझ से हैं, उनका माथा चौड़ा होगा (माथा के शुरू भाग में बाल नहीं होगा) और उनकी नाक लम्बी और पतली होगी जिस के बीच में उभार होगी, वह धरती को न्याय और इंसाफ से भर देंगे जिस प्रकार कि वह अन्याय और उत्पीड़न से भरी होगी, वह सात साल शासन करेंगे।" (सुनन अबू दाऊद, किताबुल मह्दी 11/375 हदीस संख्या : 4526, मुस्तदरक हाकिम 4/557, हाकिम ने कहा है कि : यह हदीस मुस्लिम की शर्त पर सहीह है और बुखारी व मुस्लिम ने इसको नहीं रिवायत किया है और यह हदीस सहीहुल जामिअ़ (6736) में है।

4- उम्मे स-लमा रज़ियल्लाहु अन्हा से वर्णित है वह कहती हैं कि : मैं ने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फरमाते हुये सुना: "मह्दी मेरे परिवार और वंश से फातिमा की संतान से होंगे।" सुनन अबू दाऊद 11/373, सुनन इब्ने माजा 2/1368, अल्बानी ने सहीहुल जामिअ़ (हदीस संख्या :6734) में इसे सहीह कहा है।

5- जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्हों ने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "ईसा बिन मरियम उतरेंगे तो उनके अमीर मह्दी कहेंगे कि आईये और हमें नमाज़ पढ़ाईये। तो वह उत्तर देंगे : नहीं, इनके कुछ लोग दूसरों पर अमीर हैं जो कि अल्लाह की तरफ से इस उम्मत का सम्मान है।" यह हदीस सहीह मुस्लिम में इन शब्दों के साथ है : "फिर ईसा बिन मरियम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उतरेंगे तो उनके अमीर (मुसलमानों का नेता) कहेंगे कि आयें और हमें नमाज़ पढ़ायें, तो वह कहेंगे कि तुम में से कुछ, कुछ दूसरों पर अमीर हैं, यह इस उम्मत का अल्लाह की तरफ से सम्मान है।" (मुस्लिम :225)

6- अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि उन्हों ने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "ईसा बिन मरियम जिसके पीछे नमाज़ पढ़ेंगे वह हम में से होगा।" इस हदीस को अबू नुऐम ने मह्दी के अख्बार में रिवायत किया है और अल्बानी ने इसे सहीह कहा है। देखिये : अल-जामिउस्सग़ीर 5/219 हदीस संख्या : 5796.

7- अब्दुल्लाह बिन मसऊद रजि़यल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप ने फरमाया : दुनिया समाप्त नहीं होगी यहाँ तक कि मेरे अह्ले बैत में से एक आदमी अरब पर शासन करेगा, जिसका नाम मेरे नाम पर होगा।" (मुस्नद अहमद 5/199 हदीस संख्या :3573) और एक रिवायत के शब्द यह हैं कि : "उसका नाम मेरे नाम पर और उसके बाप का नाम मेरे बाप के नाम पर होगा।" (सुनन अबू दाऊद 11/370)

मह्दी के प्रकट होने के बारे में हदीसें अर्थ की दृष्टि से "तवातुर" के स्तर तक पहुँचती हैं (हदीस के विज्ञान के अनुसार "तवातुर" उस हदीस को कहतें हैं जिसे इतने लोगों ने रिवायत किया हो जिनका झूठ पर एकजुट हो जाना असम्भव हो।) जैसाकि कुछ इमामों और विद्वानों ने इस का स्पष्टीकरण किया है, नीचे उनके कुछ कथनों का उल्लेख किया जा रहा है :

1- हाफिज़ अबुल हसन अल-आबिरी कहते हैं : "मह्दी के वर्णन से संबंधित रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से हदीसें और सूचनायें फैली हुई और तवातुर के स्तर तक पहुँची हुई हैं, और यह कि वह अह्ले-बैत से होंगे और सात साल शासन करेंगे, और धरती को न्याय ये भर देंगे, और यह कि ईसा अलैहिस्सलाम निकलेंगे और दज्जाल को क़त्ल करने पर उनकी सहायता करेंगे, और यह कि वह इस उम्मत की इमामत करायेंगे और ईसा अलैहिस्सलाम उनके पीछे नमाज़ पढ़ेंगे।

2- मुहम्मद अल-बर्ज़ंजी अपनी किताब "अल-इशाअतो लि-अश्रातिस्साअह" में कहते हैं: "तीसरा अध्याय उन बड़ी निशानियों और निकट्तम लक्षणों के बारे में जिन के बाद ही क़ियामत आयेगी, और वे बहुत अधिक हैं, उन्हीं में से मह्दी का आना भी है और यह पहली निशानी है। और यह बात जान लो कि उनके प्रकट होने के बारे में वर्णित हदीसें उनकी विभिन्न रिवायतों के साथ असीमित हैं।"

तथा उनका यह भी कहना है कि : "यह बात ज्ञात हो चुकी है कि मह्दी के अस्तित्व और अंतिम काल में उनके निकलने, और उनके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म के वंश से फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की संतान से होने के बारे में हदीसें अपने अर्थ के एतिबार से तवातुर के स्तर तह पहुँची हुई हैं, इसलिए उन्हें नकारने का कोई मतलब नहीं है।"

3- तथा अल्लामा मुहम्मद अस्सफारीनी कहते हैं : "मह्दी के निकलने से संबंधित हदीसें बाहुल्य हैं, यहाँ तक कि अर्थ के एतिबार से तवातुर तह पहुँची हुई हैं, और यह बात सुन्नत के विद्वानों के बीच फैली हुई और सामान्य है, यहाँ तक कि इसकी गणना उनके अक़ीदा (आस्था) की बातों में होती है।" फिर उन्हों ने मह्दी के निकलने के बारे में हदीसों और आसार का एक समूह और कुछ सहाबा के नामों का उल्लेख किया है जिन्हों ने इन्हें रिवायत किया है। इसके बाद फरमाते हैं : "उन सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम से, जिन का उल्लेख किया गया है और उनके अलावा जिनका उल्लेख नहीं किया गया, विभिन्न रिवायतें वर्णित हैं, इसी तरह इनके बाद ताबेईन से भी जिन का समूह क़तई (निश्चित) ज्ञान का पता देता है। अत: महदी के निकलने पर विश्वास रखना अनिवार्य है जैसाकि अह्ले इल्म (विद्वानों) के निकट यह बात निर्णित है और अह्ले सुन्नत व जमाअत के अक़ीदों में उल्लिखित है।"

4- मुजतहिद अल्लामा शौकानी कहते हैं : "प्रतीक्षित मह्दी के बारे में आने वाली हदीसों में से जिनकी जानकारी सम्भव हो सकी है, उनकी संख्या पचास है जिनमें से कुछ सहीह, कुछ हसन और कुछ ऐसी ज़ईफ हदीसें हैं जिनकी छतिपूर्ति संभव है, और यह नि:सन्देह मुतवातिर हैं, बल्कि हदीस के सिद्धांतों में उल्लिखित सभी मानकों के हिसाब से इन से कमतर स्तर की हदीसों पर भी तवातुर का वस्फ (विशेषण) लागू होता है। जहाँ तक मह्दी के वर्णन से संबंधित सहाबा के आसार का संबंध है तो वे भी अधिक हैं और उनका हुक्म मरफूअ़ हदीस का है ; क्योंकि इस तरह की चीज़ों में इज्तिहाद (व्यक्तिगत राय) की कोई जगह नहीं है।"

5- तथा अल्लामा शैख सिद्दीक़ हसन खान कहते हैं : "मह्दी के बारे में वर्णित हदीसें अपनी विभिन्न रिवायतों के साथ बहुत अधिक हैं, जो अर्थ के हिसाब से तवातुर तक पहुँचती हैं, और यह हदीसें सुनन की किताबों और इनके अलावा इस्लाम के अन्य ग्रंथों; मआजिम और मसानीद की किताबों में हैं।"

7- तथा शैख मुहम्मद बिन जा’फर अल-कत्तानी कहते हैं : "सारांश यह कि प्रतीक्षित मह्दी के बारे में वर्णित हदीसें मुतवातिर हैं, इसी प्रकार दज्जाल और सैयिदना ईसा बिन मरियम अलैहिमस्सलाम के बारे में वर्णित हदीसें भी हैं।" (देखिये : किताब अश्रातुस्साअह /लेखक : यूसुफ बिन अब्दुल्लाह अल-वाबिल, पृ0 195-203)

इस बात से अवगत होना उचित है कि कुछ झूठे लोगों ने मह्दी अलैहिस्सलाम के बारे में, या कुछ झूठे लोगों को मह्दी निर्धारित करने के बारे में या इस बारे में कि वह अह्ले सुन्नत व जमाअत के अलावा मिल्लत पर होंगे, कई हदीसें गढी़ हैं। इसी तरह कुछ दज्जालों ने अल्लाह के बन्दों को धोखा देन और कुछ सांसारिक लाभ उठाने और इस्लाम की छवि (इमेज) को विकृत करने के लिए मह्दी होने का दावा किया है, तथा कुछ लोगों ने आंदोलन और क्रान्तियाँ शुरू कर दीं और गाफिल लोगों को या लाभ उठाने के लिए अपने साथ चलने वालों को एकत्र कर लिया। फिर वे लोग नष्ट हो गये, उनका झूठ स्पष्ट हो गया और उनकी जालसाज़ी और पाखंड जग जाहिर हो गया। किन्तु इन सारी चीज़ों से मह्दी अलैहिस्सलाम के बारे में अह्ले सुन्नत व जमाअत के आस्था को कोई नुक़सान नहीं पहुँचता है, और यह कि वह अवश्य निकलें गें ताकि धरती पर इस्लाम के शास्त्रानुसार शासन करें। और अल्लाह ही सर्वश्रेष्ठ जानता है।

शैख मुहम्मद सालेह अल-मुनज्जिद
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