Thu 24 Jm2 1435 - 24 April 2014
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घर में तरावीह की नमाज़ पढ़ना और रोज़े के दौरान शरीर पर क्रीम लगाना

क्या मुसलमान के लिए घर में तरावीह की नमाज़ पढ़ना जाइज़ है ॽ और यदि जाइज़ है तो रक्अतों की संख्या क्या है ॽ और क्या कुछ विशिष्ट दुआयें हैं ॽ

क्या रोज़े की हालत में चेहरे पर या शेष शरीर में क्रीम लगाना जाइज़ है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

तरावीह की नमाज़ रमज़ान की रातों में मर्दों के लिए जमाअत के साथ मस्जिद में पढ़ना धर्म संगत है, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : “ जो व्यक्ति इमाम के साथ क़ियामुल्लैल करे (तरावीह की नमाज़ पढ़े) यहाँ तक कि वह (नमाज़ से) फारिग हो जाये तो उसके लिए रात भर का क़ियाम लिखा जाता है।” इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 800) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीह तिर्मिज़ी में इसे सहीह कहा है।

इसके बावजूद यदि आदमी अपने घर में नमाज़ पढ़े तो उसके ऊपर कोई पाप नहीं है और उसकी नमाज़ सहीह है। जहाँ तक रमज़ान के अलावा दिनों का संबंध है तो धर्मसंगत यह है कि आदमी अपने घर में क़ियामुल्लैल करे। जहाँ तक महिला का प्रश्न है तो उसके हक़ में सर्वश्रेष्ठ यह है कि वह अपने घर में नमाज़ पढ़े और यदि वह मस्जिद में नमाज़ पढ़ना चाहे तो उसे रोका नहीं जायेगा, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : “ तुम अपनी औरतों को मस्जिदों से न रोको और उनका घर उनके लिए बेहतर है।” इसे अबू दाऊद (हदीस संख्या : 567) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने इसे सहीह कहा है।

तथा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : “ अल्लाह की बंदियों को अल्लाह की मस्जिदों से न रोको।” बुखारी (हदीस संख्या : 900) मुस्लिम (हदीस संख्या : 442).

जहाँ तक चेहरे और शरीर पर क्रीम लगाने का प्रश्न है तो इसमें कोई हरज की बात नहीं है। प्रश्न संख्या (2299) देखिए। और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।

 

शैख मुहम्मद बिन सालेह अल मुनज्जिद
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