Wed 23 Jm2 1435 - 23 April 2014
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ऐसी वेबसाइट डिज़ाइन करने का हुक्म जिसमें सूद पर क़र्ज़ लेने की सुविधा है।

मैं एक वेब डिज़ाइनर के रूप में काम करता हूँ, अर्थात मैं ग्राहकों के लिए साइट डिज़ाइन करता हूँ, हाल ही में मेरे चचेरे भाई ने मुझसे एक कंपनी के लिए एक साइट डिज़ाइन करने के लिए कहा, यह कंपनी अपने ग्राहकों को अनेक प्रकार की बहुत सारी सेवायें प्रस्तुत करती है, समस्या यह है कि उसकी सेवाओं में से एक सूद पर क़र्ज़ लेने में मदद करना है, किंतु वे ग्राहक को क़र्ज़ पहुंचाते नहीं हैं बल्कि उसका पता लगाने में उनकी सहयाता करते है। तो क्या हलाल है कि मैं उनके लिए यह साइट डिज़ाइन करूँ ? मेरा चचेरा भाई गैर मुस्लिम है और वह जानता है कि मैं मुसलमान हूँ, मैं नहीं चाहता हूँ कि मुसलमानों के बारे में खराब छवि पेश करूँ कि उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दूँ। क्या आप मेरी मदद कर सकते है ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम :

मुसलमान के लिए मूलतः वैध वेबसाइट की डिज़ाइन के क्षेत्र में काम करने में कोई गुनाह की बात नहीं है, और उसके ऊपर अनिवार्य है कि उन वेबसाइट्स की डिज़ाइन करने से बचे जो हराम काम पर आधारित हैं, जैसे- बैंकों, शराब, फिल्मों और दो लिंगों के बीच बातचीत (चैट) और इनके समान चीज़ों की वेबसाइट्स।

तथा हराम चीज़ के निषेद्ध के बारे में असल (बुनियादी प्रमाण) अल्लाह तआला का यह फरमान है :

﴿ وَلَا تَعَاوَنُوا عَلَى الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَاتَّقُوا اللَّهَ إِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ ﴾ [المائدة :2]

“तथा गुनाह और अत्याचार पर एक दूसरे का सहयोग न करो, और अल्लाह से डरते रहो, निःसंदेह अल्लाह कठोर सज़ा देने वाला है।” (सूरतुल माइदा : 2).

यदि साइट हराम काम के लिए विशिष्ट नहीं है बल्कि वह असलन एक अवर्जित और जाइज़ काम की साइट है, यद्यपि वह कुछ निषेद्ध चीज़ों पर आधारित है जैसे कि वह कंपनी जिसके बारे में आप ने प्रश्न किया है, तो आपके लिए उसकी साइट को दो शर्तों के साथ डिज़ाइन करना जाइज़ है:

पहली शर्त : इस कंपनी का अधिकतर काम जाइज़ हो, उसका अधिकांश काम या उसकी गतिविधियां हराम चीज़ में न हों।

दूसरी शर्त : आप इस हराम चीज़ से संबंधित कोई काम न करें।

जहाँ तक उस कंपनी का संबंध है जिसके बारे में आप ने प्रश्न किया है : तो आपके लिए उसकी साइट को डिज़ाइन करना जाइज़ है इस शर्त के साथ कि उपर्युक्त सूदी कारोबार उसकी कंपनी की अधिकतर गतिविधि न हो और यह कि आप अपनी डिज़ाइन में उस हराम गतिविधि से संबद्ध कोई खिड़की डिज़ाइन ने करें या किसी भी प्रकार से उसका मार्गदर्शन न करें।

तथा प्रश्न संख्या : (105325), (22756), (121259) और (109062) के उत्तर देखें।

दूसरा :

जहाँ तक आपके चचेरे भाई का संबंध है तो आपके उसे जिस चीज़ को आप छोड़ रहे हैं उसके बारे में शरीअत का हुक्म बताने में उसे इस्लाम की ओर आमंत्रण देना पाया जाता है, और आपके हराम चीज़ की सेवा को डिज़ान करने में इस्लाम का अपमान करना पाया जाता है, क्योंकि किसी काफिर को खुश करने के लिए किसी मुसलमान को हराम काम करने के जाइज़ होने की कोई गुजाइश नहीं है, बल्कि स्वयं काफिर आपको अंतर्विरोध करने वाला समझेगा यदि उसे पता चलेगा कि आप का धर्म सूद को हराम ठहराता है और आप उसके प्राप्त करने की सेवा को वेबसाइट पर डिज़ाइन करते हैं!

मुसलमान को चाहिए कि अल्लाह तआला को नाराज़ करके लोगों की प्रसन्नता तलाश करने से उपेक्षा करे, क्योंकि उसके परिणाम उसके ऊपर नुकसान और बुराई के रूप में निष्कर्षित होते हैं, तिर्मिज़ी (हदीस संख्या: 2414) ने रिवायत किया है - और अल्बानी ने ‘‘सहीह तिर्मिज़ी” में सहीह कहा है - कि आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फरमाया : मैं ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फरमाते हुए सुना: ‘‘जिसने लोगों को नाराज़ करके अल्लाह तआला की प्रसन्नता को तलाश किया तो अल्लाह उसके लिए लोगों की ओर से काफी होगा, और जिसने अल्ला को नाराज़ करके लोगों की प्रसन्नता को तलाश किया, तो अल्लाह तआला उसे लोगों के हवाले कर देगा।” तथा इब्ने हिब्बान ने अपनी सहीह (1/501) में इन शब्दों के साथ रिवायत किया हैः ‘‘जिस व्यक्ति ने लोगों को क्रोधित करके अल्लाह की खुशी को तलाश किया तो अल्लाह तआला उस से खुश होगा और लोगों को भी उससे खुश कर देगा, तथा जिस व्यक्ति ने अल्लाह को क्रोधित करके लोगों की प्रसन्नता तलाश की तो अल्लाह उस से नाराज़ हो जायेगा और लोगों को भी उस से नाराज़ कर देगा।’’

तथा आप इस बात को अच्छी तरह जान लें कि वास्तविक दावत (धर्मोपदेश) और वास्तव में लोगों को दीन की अभिरूचि दिलाना यह है कि: आप उसके ऊपर सुदृढ़ता के साथ क़ायम हों, रही बात यह कि आप लोगों को बतायें कि इस्लाम -उदाहरण के तौर पर- सूद को हराम और निषिद्ध ठहराता है फिर आप उसका लेनदेन करते है, या उस पर सहयोग करते हैं: तो यह एक प्रकार से अल्लाह के रास्ते से रोकना है और लोगों को उसके दीन से घृणित करना है, क्योंकि वे लोग कहेंगे: यदि यह बात सत्य होती जिसकी यह हमें निमंत्रण और सूचना दे रहा है तो: तो वह स्वयं उसका पालन क्यों नहीं कर रहा है ?!

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।
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