172162: मासिक धर्म की अवस्था में उसे तीन तलाक़ दे दिया।


मेरा अपने पति के साथा विवाद हो गया और मैं ने उससे मांग की कि वह मुझे तलाक़ दे दे, तो उसने दो गवाहों को हाज़िर किया और उनके सामने मुझे तलाक़ दे दिया और कहा: (तलाक़, तलाक़, तलाक़) इस नीयत के साथ कि वह मुझे तीन तलाक़ दे रहा है और मैं उस दिन माहवारी की हालत में थी, और मैं ने अपने माता पिता से सलाह लिया जो हंबली मत का अनुसरण करते हैं जिनके यहाँ इद्दत की अवधि अनिवार्य है और इस तरह उसे एक तलाक़ समझा जायेगा, और दूसरी ओर मेरे पति का परिवार हनफी मत का अनुसरण करता है जो इस तलाक़ को तीन तलाक़ समझता है, अब हम बड़ी दुविधा और असमंजस में पड़े हैं। मैं ने अल्लाह से प्रार्थना किया है कि वह मुझे सही बात की प्रेरणा दे, किंतु मैं हमेशा सपने में देखती हूँ कि मैं किसी अन्य से शादी करने पर सक्षम नहीं हूँगी, इस सपने की व्याख्या क्या है ? क्या यह उचित है कि मैं इस तलाक़ को स्वीकार कर लूँ और अपने रास्ते पर चलती रहूँ ? और उस सपने के बारे में क्या करूँ जो मुझ बार बार आता रहते है ?

Published Date: 2011-11-26

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए है।

यदि आपका पति अदालत में गया है, या किसी विश्वसनीय विद्वान से फत्वा पूछा है और उसने तीन तलाक़ पड़ने का फत्वा दिया है, तो मामला उसके फत्वा के अनुसार होगा और आप उसके लिए हलाल नहीं हैं।

और यदि उसने किसी से फत्वा नहीं पूछा है या अदालत के पास नहीं गया है, तो हमारे निकट विश्वसनीय और क़ाबिले एतिमाद फत्वा यह है कि मासिक धर्म की हालत में तलाक़ नहीं पड़ती है, न तो एक तलाक़ और न ही उससे अधिक तलाक़, और यह कि तीन तलाक़ यदि वह पाकी की हालत में होती है तो एक ही तलाक़ समझी जायेगी। अगर आपका पति इस फत्वा को लेता है या उसने स्वयं ऐसे आदमी से फत्वा पूछा है जो तलाक़ न पड़ने की बात कहता है तो आप दोनों अपनी निकाह पर बाक़ी रहेंगे, और आप दोनों पर कोई तलाक़ नहीं होगी।

और यदि उसने किसी ऐसे विद्वान से फत्वा पूछा है जो मासिक धर्म में तलाक़ पड़ने के मत को मानने वाला है लेकिन वह तीन को एक तलाक़ क़रार देता है, तो आपके ऊपर एक तलाक़ पड़ी है और जब तक आप इद्दत के दौरान हैं उसे आप को लौटाने का अधिकार है।

तथा प्रश्न संख्या : (72417), (36580), (147987) और (96194) का उत्तर देखें, उनमें हम ने जो कुछ उल्लेख किया है उसके बारे में विद्वानों के फत्वे मौजूद हैं।

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।
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