Wed 23 Jm2 1435 - 23 April 2014
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मासिक धर्म से पहले, उसके दौरान और उसके बाद पीले और मटियाले निर्वहन का हुक्म

आम तौर से मुझे मासिक धर्म चक्र पीले भूरे रंग से शुरू होता है, और मेरे साथ दो दिन से तीन दिन तक जारी रहता है, उसके बाद खून आता है, तो क्या ये दिन जिनमें वह भूरे रंग में आता है मासिक धर्म में से समझा जायेगा, या वह मासिक धर्म में से नहीं है ॽ और उसके अंत में खून के बाद भूरा या काला रंग आता है, तो क्या वह भी मासिक धर्म से है, या वह मासिक धर्म नहीं है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम :

मासिक धर्म से पहले पीले या मटियाले रंग का निर्वहन : यदि माहवारी के समय में या उस से थोड़ा पहले है, और मासिक धर्म के दर्द और पेट दर्द के साथ आया है और मासिक धर्म के खून से मिला है अर्थात् : उसके बाद ही माहवारी का खून आया है, तो यह उसकी आदत और माहवारी का एक हिस्सा है, उसके होते हुए वह नमाज़ और रोज़े से उपेक्षा करेगी, यह इस प्रकार कि मटियाला रंग मासिक धर्म के दर्द के साथ एक या दो दिन आये फिर तीसरे दिन खून आये, तो यह सब मासिक धर्म है, और यह इस मुद्दे में सबसे स्पष्ट कथन है, और यही कथन शैख इब्ने बाज़ रहिमहुल्लाह का भी है, किंतु उन्हों ने (मासिक धर्म से) मिले होने की शर्त लगाई है और माहवारी के दर्द की शर्त नहीं लगाई है, और यही शैख इब्ने उसैमीन रहिमहुल्लाह का पुराना कथन है। जहाँ तक उनके अंतिम कथन का संबंध है तो वह पीले और मटियाले रंग को सिरे से मासिक धर्म न समझने का है।

तथा आप निम्नलिखित प्रश्नों को देखें क्योंकि उनमें शैखैन (शैख इब्ने उसैमीन और शैख इब्ने बाज़) रहिमहुमुल्लाह के कुछ उद्धरण हैं : प्रश्न संख्या (131869), प्रश्न संख्या (50430), प्रश्न संख्या (37840) और प्रश्न संख्या (171945), तथा “समरातुत तद्वीन अन् इब्ने उसैमीन” (पृष्ठ 24) देखें, उसमें शैख रहिमहुल्लाह का यह कथन है: “अंत में मेरे लिए जो बात स्पष्ट हुई और जिस पर मेरा मन संतुष्ट है वह यह है कि हैज़ (मासिक धर्म) केवल खून का निकलना है, रही बात पीले और मटियाले निर्वहन की तो वे दोनों मासिक धर्म नहीं हैं यहाँ तक कि वे सफेद निर्वहन से पहले ही क्यों न हों, और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।”

तथा उसमें यह भी है कि : “एक महिला को सात दिन की अवधि के लिए मटियाला या भूरा निर्वहन होता है, फिर उसके बाद स्पष्ट खून आता है जो महीने की अवशेख अवधि तक जारी रहता है फिर वह एक अवधि के लिए पवित्र हो जाती है जो तीन महीने तक रहती है, तो इसके खून और मटियाले या भूरे रंग के निर्वहन का क्या हुक्म है ॽ

तो उन्हों ने उत्तर दिया : खून पूरा का पूरा मासिक धर्म है, और मटियाला निर्वहन सिरे से कुछ भी नहीं है।” “समरातुत् तद्वीन अन् इब्ने उसैमीन” (पृष्ठ 24, 25) से समाप्त हुआ।

तथा हम ने जो इस बात का उल्लेखर किया है कि पीले और मटियाले रंग को मासिक धर्म से पहले यदि वे दोनों मासिक धर्म की आदत के समय में हैं, और दोनों माहवारी के खून के साथ हैं और उनके साथ माहवारी का दर्द भी है तो उन्हें मासिक धर्म समझा जायेगा, उसे यह बात राजेह और उचित ठहराती (पुष्टी करती) है कि पीलापन और मटियालापन बहुत से फुक़हा के निकट खून के रंगों में से हैं, और हैज़ (माहवारी), गर्भाशय की दीवार का उसमें पाये जाने वाले खून और ग्रंथियों समेत पतन है, चुनाँचे खून विभिन्न और अलग अलग रंगों में आता है, उसकी शुरूआत मज़बूत काले या गहरे रंग से होती है, फिर वह हल्का हो जाता है यहाँ तक कि पीला या भूरा (मटियाला) हो जाता है, और कभी इसके विपरीत होता है, चुनाँचे उसकी शुरूआत पीलेपन और मटियाले रंग से होती है, फिर वह खून हो जाता है, तथा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की हदीस में यह बात आयेगी जिस से यह पता चलता है कि पाक होने से पहले पीले और मटियाले रंग का निर्वहन : मासिक धर्म है, और वास्तव में उन दोनों के पाक होने से पहले आने, या उन दोनों के माहवारी की आदत की अवधि में खून के आने से पहले, माहवारी के लक्षण दर्द के साथ आने में कोई अंतर नहीं है।

और यदि कहा जाए कि : (मासिक धर्म से) मिले होने के अलावा कोई अन्य शर्त नहीं है तो यह एक मज़बूत कथन होगा, जैसाकि शैख इब्ने बाज़ रहिमहुल्लाह का कथन है, इस शर्त के साथ कि वह माहवारी के समय में हो।

तथा फुक़हा - जैसे कि हनफिया और हनाबिला - का कथन कि : आदत के समय में पीला और मटियाला रंग माहवारी समझा जायेगा, उल्लिखित स्थिति को भी सम्मिलित है और वह माहवारी की शुरूआत में पीले और मटियाले रंग का निर्वहन है। - और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक जानता है -।

तथा उनके अलावा - जैसे मालिकीया और शाफइया - का कथन कि : पीला और मटियाला रंग सामान्यता या संभावाना के समय में माहवारी समझ जायेगा, उनके माहवारी से पहले आने को भी सम्मिलित है, जैसाकि यह बात रहस्य नहीं है।

तथा लाभ के लिए : शैख अबू उमर अल-दीबान हफिज़हुल्लाह की किताब “मौसूअह अहकामित्तहारह” (6/281 - 299), “अल-मौसूअतुल फिक़्हिय्यह” (18/296), “अल-मुग़नी” (1/202), “अल-मजमूअ” (2/422) देखें।

दूसरा : 

खून के बाद और पाक होने से पहले पीला और मटियाला निर्वहन : मासिक धर्म है ; क्योंकि इमाम मालिक ने मुवत्ता (130) में उम्मे अलक़मह से रिवायत किया है कि उन्हों ने कहा : “औरतें उम्मुल मोमिनीन आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा के पास कटोरी भेजती थीं जिसमें रूई होती थी जिसमें माहवारी के खून से पीला निर्वहन होता था, वे आप से नमाज़ के बारे में पूछती थीं, तो आप उनसे कहती थीं कि जल्दी न करो यहाँ तक कि श्वेत निर्वहन देख लो, उनका मतलब माहवारी से पाकी का होता था।” इसे अल्बानी ने “इरवाउल गलील” में (हदीस संख्या : 198 के अंतर्गत) सही कहा है।

इसे बुखारी ने “किताबुल हैज़, बाब इक़बालिल हैज़ व इदबारिही” में मुअल्लक़न रिवायत किया है।

अद्दुर्जा : एक छोटा बरतन (कटोरी) जिसमें औरत अपनी खुश्बू और सामान रखती है। देखिए : “अन्निहायह फी गरीबिल हदीस वल असर” इब्ने असीर (2/246).

अल-कुरसुफ :  रूई

तीसरा :

पवित्र होने के बाद पीला या भूरे रंग का निर्वहन कुछ भी नहीं है।

क्योंकि अतीयह रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि : हम पवित्र होने के बाद पीले और भूरे रंग के निर्वहन को कुछ भी नहीं समझते थे। इसे बुखारी (हदीस संख्या : 320), नसाई (हदीस संख्या : 368), इब्ने माजा (हदीस संख्या : 647) ने रिवायत किया है और उक्त हदीस के शब्द अबू दाऊद के हैं।

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।
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