Fri 18 Jm2 1435 - 18 April 2014
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तथाकथित खातमुश्शिफा (रोग निवारण खत्म) का हुक्म

मेरे भाई का शल्य ऑपरेशन हुआ है और उसकी हालत बहुत गंभीर है, इसलिए मेरी माँ ने तथाकथित “रोग निवारण ख़त्म” आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमें 12,500 बार ‘‘या सलाम’’ का वाक्यांश दोहराया जात है, और कुछ दुआयें पढ़ी जाती हैं, चालीस बार सूरत यासीन और सूरतुर् रहमान की तिलावत की जाती है, गरीबों को खाना खिलाया जाता है और भेड़ें वितरित की जाती हैं।
तो क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस तरह का कोई काम किया है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

“खातमुश्शिफा” (रोग निवारण या स्वास्थ्य का खत्म) के नाम से कथित काम गढ़ी हुई बिद्अतों में से है, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : “सबसे बुरी चीज़ नवाचार (नयी गढ़ ली गई चीज़ें) हैं, और हर नवाचार बिद्अत है, और हर बिद्अत पथभ्रष्टता है, और हर पथभ्रष्टता नरक में है।” इस हदीस को नसाई (हदीस संख्या: 1578) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने ‘‘सहीहुल जामे” (हदीस संख्या: 1353) में सही कहा है।

प्रश्न में वर्णित इन दुआओं और सूरतों को विशिष्ट करने पर कोई प्रमाण नहीं है। और इन चीज़ों को करना जिन पर हमारे पालनहार की किताब और हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत दलालत नहीं करती है, जायज़ नहीं है।

हमारे धर्म में जो चीज़ वर्णित है वह यह है कि बीमार व्यक्ति के लिए दुआ (प्रार्थना) की जाए, हम अल्लाह तआला से दुआ करें कि उसे स्वास्थ्य और पवित्रता प्रदान करे। और इस (प्रार्थना) का बीमारी के जाने और तीव्र स्वस्थ्य होने में बहुत बड़ा प्रभाव होता है, चुनांचे इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप ने फरमाया : “जो व्यक्ति किसी ऐसे बीमार की ज़ियारत करे जिसकी मृत्यु की घड़ी नहीं आई है और उसके पास सात बार यह दुआ पढ़े :

أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ

उच्चारणः अस्-अलुल्लाहल अज़ीम रब्बल अरशिल अज़ीम अन् यश्फियक

“मैं महा अर्श (सिंहासन) के परमेश्वर महान अल्लाह से प्रश्न करता हूँ कि वह आपको निरोग्य (स्वस्थ्य) कर दे”, तेा अल्लाह तआला उसे उस बीमारी से चंगा कर देता है।” इसे अहमद (हदीस संख्या : 2137), अबू दाऊद (हदीस संख्या : 3106) और तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 2083) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सही कहा है।

अतः आप को चाहिए कि इस हदीस और इसके अलावा अन्य सहीह हदीसों में वर्णित दुआयें करें।

इसी तरह सदक़ा (दान करना) भी है। और इसमें कोई संदेह नहीं कि अल्लाह के रास्ते में खर्च करना भलाई लाने वाली चीज़ों में से है, चुनांचे अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : “जिस दिन भी बंदे सुब्ह करते हैं उसमें दो फरिश्ते उतरते हैं तो उन दोनों में से एक कहता है : ऐ अल्लाह ! खर्च करनेवाले को उत्तराधिकारी प्रदान कर दे, और दूसरा कहता है : रोकनेवाले का धन नष्ट कर दे।” इसे बुखारी (हदीस संख्या: 1442) और मुस्लिम (हदीस संख्या: 1010) ने रिवायत किया है।

अतः अल्लाह के मार्ग में खर्च करो, दान करो, और अल्लाह सर्वशक्तिमान की ओर से उत्तराधिकार की शुभसूचना प्राप्त करों।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।
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