Fri 18 Jm2 1435 - 18 April 2014
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अल्लाह के अस्तित्व के प्रमाण और बन्दों को पैदा करने की हिक्मत (तत्वदर्शिता)

मुझ से मेरे एक गैर-मुस्लिम दोस्त ने पूछा कि मैं उस के लिए अल्लाह के अस्तित्व को साबित करूँ, और उस ने हमें यह जीवन क्यों प्रदान किया है, और इसके पीछे क्या उद्देश्य है? किन्तु मेरा उत्तर उसे सन्तुष्ट नहीं कर सका, इसलिए आप से अनुरोध है कि मुझे उन बातों से सूचित करें जो बातें मेरे लिए उस व्यक्ति को बताना अनिवार्य है।

हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए योग्य है।

ऐ मुस्लिम भाई ! आप ने अल्लाह की ओर आमन्त्रण और अल्लाह सुब्हानहु व तआला के अस्तित्व की वास्तविकता को स्पष्ट करने का जो काम किया है, वह वास्तव में एक सुखद काम है। अल्लाह तआला की जानकारी शुद्ध प्रकृति और शुद्ध बुद्धि से मेल खाती है, और कितने ऐसे लोग हैं कि जब उनके सामने हक़ीकत (सत्यता) स्पष्ट होगई, तो शीघ्र ही उस ने इस्लाम स्वीकार कर लिया। अगर हम में से प्रत्येक व्यक्ति अपने दीन के प्रति अपने दायित्व को पूरा करे तो अधिक भलाई हासिल हो, अत: ऐ मुस्लिम भाई आप को बधाई हो कि आप ईश्दूतों और पैग़ंबरों का कार्य कर रहे हैं, तथा आप के लिए बहुत बड़े अज्र व सवाब की शुभसूचना है जिस का आप से आप के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़ुबानी वादा किया गया है, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है :"अल्लाह तुम्हारे कारण एक आदमी को भी मार्गदर्शन प्रदान कर दे, यह तुम्हारे लिए लाल ऊँटों से भी कहीं अधिक बेहतर है।" (बुखारी 3/134, मुस्लिम 4/1872) लाल ऊँट सबसे अच्छे ऊँट समझे जाते हैं ।

दूसरा :

जहाँ तक अल्लाह तआला के अस्तित्व के प्रमाणों का प्रश्न है तो ये सोच विचार करने वाले के लिए स्पष्ट हैं, बहुत अधिक खोज और लंबे सोच विचार की आवश्यकता नहीं है, विचार करने से पता चलता है कि वे तीन प्रकार के हैं : प्राकृतिक प्रमाण, हिस्सी (इन्द्रिय-ज्ञान और चेतना संबंधी) प्रमाण और शरई प्रमाण।

प्राकृतिक प्रमाण :

शैख उसैमीन रहिमहुल्लाह फरमाते हैं :

अल्लाह के अस्तित्व पर प्रकृति (फित्रत) का तर्क उस आदमी के लिए सब से मज़ूबत प्रमाण है, इसी लिए अल्लाह तआला ने अपने कथन : ((आप एकांत हो कर अपना मुँह दीन की ओर कर लें।)) के बाद फरमाया है : "अल्लाह तआला की वह फित्रत (प्रकृति) जिस पर उस ने लोगों को पैदा किया है।" (सूरतुर्रूम : 30)

अत: फित्रते सलीमा (शुद्ध प्रकृति) अल्लाह के वजूद की गवाही देती (साक्षी) है, और इस प्रकृति से वही आदमी मुँह मोड़ सकता है जिसे शैतानों ने भटका दिया हो, और जिसे शैतानों ने भटका दिया है वह इस प्रमाण और तर्क को नकार सकता है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ)

क्योंकि इंसान अपने दिल में इस बात का अनुभव करता है कि उसका एक पालनहार और सृष्टा है और वह उसकी आवश्यकता का एहसास करता है, और जब किसी बड़े भंवर में फंसता है, तो उसके दोनों हाथ, दोनों आँखें और उसका दिल आसमान की ओर आकर्षित हो जाता है, वह अपने पालनहार से सहायता और मदद मांगता है।

हिस्सी (इन्द्रिय संबंधी) प्रमाण :

सार्वलौकिक घटनाओं का अस्तित्व में आना, वह इस प्रकार कि हमारे आस पास के लोक और संसार में आनिवार्य रूप से विभिन्न प्रकार की घटनायें अस्तित्व में आती हैं, उन घटनाओं में सर्वप्रथम सृष्टि (उत्पत्ति) की घटना है, अर्थात् चीज़ों की पैदाइश की घटना है, सारी चाज़ें; पेड़, पत्थर, मनुष्य, धरती, आकाश, समुद्र, सागर....

यदि कहा जाये कि इन घटनाओं और इन के अलावा अन्य ढेर सारी घटनाओं को किसने अस्तित्व में लाया है और उन पर नियंत्रण करता है?

तो उसका उत्तर या तो यह होगा कि ये बिना किसी कारण के सहसा अस्तिव में आ गयो हैं, तो ऐसी अवस्था में कोई भी नहीं जानता कि इन चीज़ों का अस्तित्व कैसे हुआ है, यह एक संभावना है। एक दूसरी संभावना यह है कि इन चीज़ों ने स्वयं ही अपने आप को पैदा कर लिया है और उन पर नियंत्रण रखती हैं। तथा एक तीसरी संभावना भी है और वह यह है कि इन चीज़ों का एक अविष्कारक है जिस ने इनका अविष्कार किया है और उनका एक सृष्टिकर्त्ता है जिस ने इन की रचना कप है, इन तीनों संभावनाओं में सोच विचार करने के बाद हम पाते हैं कि पहली और दूसरी संभावनायें नामुमकिन और असम्भव हैं, और जब पहली और दूसरी संभावनायें नामुमकिन हो गयीं, तो अनिवार्य रूप से यह सिद्ध हो गया कि तीसरी संभावना ही ठीक और स्पष्ट है कि इन चीज़ों का एक सृष्टिकर्त्ता है जिसने इन को पैदा किया है और वह अल्लाह तआला है, और इसी चीज़ का क़ुर्आन में उल्लेख हुआ है, अल्लाह तआला ने फरमाया : "क्या ये लोग बिना किसी पैदा करने वाले के ही पैदा हो गये हैं या ये स्वयं उत्पत्तिकर्ता (पैदा करने वाले) हैं? क्या इन्हों ने आकाशों और धरती को पैदा किया है? बल्कि यह विश्वास न करने वाले लोग हैं।" (सूरतुत्तूर: 35-36)

फिर ये सभी सृष्ट वस्तुयें किस समय से मौजूद हैं? इन पूरे वर्षों के दौरान उनके लिए इस दुनिया में बाक़ी रहना किसने सुनिश्चित किया है और उनके बाकी रहने के कारणों का किसने प्रबंध किया है?

इसका उत्तर है अल्लाह ने, उसी ने हर चीज़ को उसका सुधार करने और उसके बरक़रार रहने को सुनिश्चित करने वाली चीज़ें प्रदान की हैं, क्या आप उस सुंदर हरे पौधे को नहीं देखते कि जब अल्लाह उसके पानी को रोक ले तो क्या उसके लिये जीना संभव होता है? कदापि नहीं, बल्कि वह सूख जायेगा, इसी तरह हर चीज़ के अन्दर जब आप सोच विचार करेंगे तो उसे अल्लाह तआला से संबंधित पायें गे, सो अगर अल्लाह न होता तो चीज़ें बाक़ी न रहतीं।

फिर देखिये कि अल्लाह ने इन चीज़ों को किस प्रकार से सुधारा और संवारा है, हर चीज़ का सुधार उसके अनुकूल और मुनासिब है, उदाहरण के तौर पर ऊँट सवारी के लिए है, अल्लाह तआला फरमाता है : "क्या वे नहीं देखते कि हम ने अपने हाथों बनायी हुई चीज़ों में से उन के लिए चौपाये (पशु भी) पैदा कर दिये, जिन के ये मालिक हो गये हैं। और उन जानवरों को हम ने उन के वश में कर दिया है जिन में से कुछ तो उनकी सवारियाँ हैं और कुछ (का मांस) खाते हैं।" (सूरत यासीन :71-72)

ऊँट को देखिये कि अल्लाह तआला ने उसे किस तरह ताक़तवर और उसकी पीठ को बराबर बनाया है ताकि सवारी के लिये और दुर्लभ कठिनाईयों को सहन करने के लिए योग्य हो जिन्हें उसके अलावा कोई दूसरा जानवर सहन नहीं कर सकता।

इसी तरह अन्य मख्लूक़ात के अंदर आप अपनी निगाह दौड़ायें गे तो उन्हें उस चीज़ के अनुकूल पायें गे जिस के लिए वो पैदा की गई हैं। अत: अल्लाह तआला बहुत पाक व पवित्र है।

हिस्सी प्रमाणों के उदाहरणों में से :

वो घटनायें भी हैं जो किसी कारणवश घटती हैं जो अल्लाह के मौजूद होने का पता देती हैं, उदाहरण के तौर पर अल्लाह तआला से दुआ करना, फिर अल्लाह तआला का दुआ को स्वीकार करना, अल्लाह के मौजूद होने पर तर्क और प्रमाण हैं। शैख उसैमीन रहिंहुल्लाह फरमाते हैं : जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों के लिए वर्षा की दुआ की तो आप ने कहा : ऐ अल्लाह ! हम पर वर्षा बरसा, ऐ अल्लाह हम पर वर्षा बरसा, फिर बादल छा गये और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर से उतरने से पहले ही वर्षा हो गई। यह रचयिता के मौजूद होने पर दलालत करता है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ )

शरई (धार्मिक ) प्रमाण :

सभी शरीअतें (धर्म शास्त्र) खालिक़ (सृष्टिकर्त्ता) के अस्तित्व, तथा उसके संपूर्ण ज्ञान, हिक्मत (तत्वदर्शिता) और दया व करूणा पर तर्क हैं, क्योंकि इन शरीअतों का कोई एक रचयिता (शास्त्रकार) होना आवश्यक है, और वह शास्त्रकार अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ल है। (शर्ह अस्सफ्फारीनिया से समाप्त हुआ)

आप का यह प्रश्न कि अल्लाह ने हमें क्यों पैदा किया है?

तो इस का उत्तर यह है कि उस ने हमें अपनी उपासना, शुक्र और ज़िक्र करने के लिए, तथा जिस चीज़ का अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने हमें आदेश दिया है उस को अंजाम देने के लिए पैदा किया है, और आप जानते हैं कि मनुष्यों मे मुस्लिम भी हैं और काफिर भी, और यह इसलिए है कि ताकि अल्लाह तआला बन्दों को जाँचे और उनकी परीक्षा करे कि क्या वे अल्लाह की उपासना करते हैं या उसके अलावा किसी दूसरे को पूजते हैं। और यह सब कुछ अल्लाह तआला ने रास्ते को स्पष्ट कर देने के बाद किया है, जैसाकि अल्लाह तआला का फरमान है :"जिस ने मृत्यु और जीवन को पैदा किया ताकि तुम्हें जाँचे कि तुम में से कौन सब से अच्छा अमल करने वाला है।" (सूरत तबारक :2) तथा अल्लाह ताअला ने एक दूसरे स्थान पर फरमाया :"मैं ने जिन्नात और मनुष्य को मात्र इसलिए पैदा किया है कि वो मेरी उपासना करें।" (सूरतुज्ज़ारियात :56)

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह हमें और आप को अपनी प्रिय व पसन्दीदा और प्रसन्नता की चीज़ों, तथा अधिक से अधिक दावत और धर्म के लिये कार्य करने की तौफीक़ दे, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अल्लाह की दया और कृपा अवतरित हो।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर
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