Wed 23 Jm2 1435 - 23 April 2014
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जिस आदमी ने भूलकर या अज्ञानता में एहराम की हालत में निषिद्ध चीज़ों में से कोई निषिद्ध चीज़ कर लिया

यदि मोहरिम भूलकर एहराम की हालत में निषिद्ध चीज़ों में से कोई निषिद्ध चीज़ भूलकर या इस बात को न जानते हुए कि यह हराम है कोई निषिद्ध काम कर ले तो उसका क्या हुक्म है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

शैख इब्ने उसैमीन रहिमहुल्लाह ने फरमाया :

यदि उसने भूलकर या अज्ञानता में एहराम की हालत में निषिद्ध चीज़ों में से कोई काम कर लिया तो उसके ऊपर कोई चीज़ नहीं है, किंतु उसके ऊपर अनिवार्य यह है कि वह मात्र उज़्र (कारण) के समाप्त होते ही उस निषिद्ध चीज़ को छोड़ दे, और अनिवार्य यह है कि भुलक्कड़ को याद दिलाया जाए और अनजाने को शिक्षित किया जाय।

इसका उदाहरण यह है कि : यदि कोई आदमी भूल जाए और एहराम की हालत में कपड़ा पहन ले तो उसके ऊपर कोई चीज़ नहीं है, किंतु उसके याद आते ही उसके ऊपर अनिवार्य है कि वह इस कपड़े को उतार दे, इसी तरह यदि वह भूल जाए और अपना पायजामा न उतारे, फिर नीयत करने और तल्बियह कहने के बाद उसे याद आए, तो उसके ऊपर अनिवार्य यह है कि वह अपने पायजामे को तुरंत उतार दे और उसके ऊपर कोई चीज़ अनिवार्य नहीं है। इसी तरह यदि वह अनजाना है तो उसके ऊपर कोई चीज़ अनिवार्य नहीं है, उदाहरण के तौर पर यदि वह ऐसा शर्ट पहन ले जिसमें सिलाई नहीं है, यह समझते हुए कि हराम (निषिद्ध) केवल वह है जिसमें सिलाई हो तो उसके ऊपर कोई चीज़ अनिवार्य नहीं है, किंतु यदि उसे पता चल जाए की शर्ट यद्यपि उसमें सिलाई नहीं है फिर भी वह निषिद्ध कपड़ों में से है तो उसके ऊपर उसे निकालना अनिवार्य है।

इस बारे में सामान्य नियम यह है कि एहराम की हालत में निषिद्ध सभी चीज़ें यदि मनुष्य इन्हें भूलकर, या अज्ञानता में या जबरन कर लेता है तो उसके ऊपर कोई चीज़ अनिवार्य नहीं है, क्योंकि अल्लाह तआला का फरमान है :

] رَبَّنَا لا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا[  (البقرة:286)

“ऐ हमारे पालनहार, यदि हम भूल गए हों या हमसे गलती हो गई हो तो हमारी पकड़ न करना।” (सूरतुल बक़रा : 286) तो अल्लाह तआला ने फरमाया : मैं ने स्वाकार कर लिया।

तथा अल्लाह तआला का फरमान है :

 ﴿ وليس عليكم جناح فيما أخطأتم به ولكن ما تعمّدت قلوبكم وَكَانَ اللَّهُ غَفُوراً رَحِيماً ﴾ [ الأحزاب : 5 ]

“तुम से भूल चूक से जो कुछ हो जाये उसमें तुम पर कोई पाप नहीं, परन्तु पाप वह है जिसका तुम दिल से निश्चय करो, और अल्लाह तआला क्षमा करने वाला बड़ा दयालू है।” (सूरतुल अहज़ाब : 5)

तथा इसलिए कि अल्लाह तआला ने शिकार के बारे में फरमाया, और वह एहराम की हालत में निषिद्ध चीज़ों में से है :

 ﴿   ومن قتله منكم متعمداً ﴾ [ المائدة : 95 ]

“और तुम में से जो भी जान बूझ-कर उसे मारे तो उसे फिद्या देना है उसी के समान पालतू जानवर से जो उसने मारा है।” (सूरतुल माइदा : 95)

तथा इस बात के बीच कोई अंतर नहीं है कि एहराम की हालत में निषिद्ध चीज़ कपड़े, खुश्बू इत्यादि में से है, या शिकार करने, सिर का बाल मुँडाने इत्यादि में से है, यद्यपि कुछ विद्वानों ने इसके और उसके बीच अंतर किया है, किंतु सही बात अंतर न करना है, क्योंकि यह उस निषिद्ध काम में से है जिसके बारे में मनुष्य अज्ञानता, भूलचूक और बाध्य किए जाने के कारण क्षम्य समझा जाता है।

 

फतावा अरकानुल इस्लाम (पृ. 536 - 537).
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