Sun 20 Jm2 1435 - 20 April 2014
4015

शव्वाल के छ: रोज़ों और अय्यामे बीज़ के रोज़ों को एक ही नीयत में एकत्रित करना

क्या उस व्यक्ति को फज़ीलत प्राप्त होगी जिसने शव्वाल के छ: रोज़ों में से तीन रोज़े, अय्यामे बीज़ (अर्थात् चाँद की तेरहवीं, चौदहवीं और पंद्रहवीं तारीख़ को अय्यामें बीज़ कहा जाता है) के रोज़े के साथ एक ही नीयत से रखे ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

मैं ने अपने अध्यापक शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़ -रहिमहुल्लाह- से इस मुद्दे के बारे में प्रश्न किया तो उन्हों ने उत्तर दिया कि उसके लिए इस की आशा की जा सकती है क्योंकि उस पर यह बात सच उतरती है कि उसने शव्वाल के छ: रोज़े रखे, इसी तरह उस पर यह बात भी सच उतरती है कि उसने अय्यामे बीज़ के रोज़े रखे, और अल्लाह तआला की अनुकंपा और कृपा बहुत विस्तृत है।

और इसी मस्अले के बारे में फज़ीलतुश्शैख मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन ने मुझे निम्नलिखित उत्तर दिया :

जी हाँ, यदि उसने शव्वाल के छ: रोज़े रख लिए तो अय्यामे बीज़ के रोज़े उस से समाप्त हो गये, चाहे उसने वे रोज़े बीज़ के दिनों में रखे हों, या उस से पहले या उसके बाद ; क्योंकि उस पर यह बात सच उतरती है कि उसने महीने के तीन दिनों के रोज़े रखे, और आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का फरमान है कि "नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम प्रत्येक महीने के तीन दिनों का रोज़ा रखते थे और आप इस बात की परवाह नहीं करते थे कि आप ने महीने के शुरू के, या उसके मध्य के या उसके अंत के रोज़े रखे हैं।"

और यह ऐसे ही है जैसे कि सुन्नते मुअक्कदा के द्वारा तहिय्यतुल मस्जिद समाप्त हो जाती है, चुनाँचि यदि कोई व्यक्ति मस्जिद में दाखिल हो और सुन्नते मुअक्कदा पढ़ ले तो उस से तहिय्यतुल मिस्जद समाप्त हो जायेगी . . . और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।

शैख मुहम्मद सालेह अल मुनज्जिद
Create Comments