Mon 21 Jm2 1435 - 21 April 2014
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क्या महिला को रमज़ान की क़ज़ा से शुरूआत करनी चाहिए या शव्वाल के छ: रोज़े से ?

ईद के दिन के बाद शव्वाल के महीने के छ: दिन के रोज़े के विषय में यह प्रश्न है कि क्या महिला के लिए यह उचित है कि वह उन दिनों के रोज़े से शुरूआत करे जो मासिक धर्म के कारण उस से छूट गये है फिर उनके बाद छ: दिनों के रोज़े रखे या क्या करे ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

यदि वह महिला नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हदीस : "जिस व्यक्ति ने रमज़ान का रोज़ा रखा, फिर उसके पश्चात ही शव्वाल के महीने के छ: रोज़े रखे तो वह ज़माने भर रोज़ा रखने के समान है।" (सहीह मुस्लिम हदीस संख्या : 1984) में वर्णित अज्र व सवाब (पुण्य) को प्राप्त करना चाहती है, तो उसे चाहिए कि सबसे पहले रमज़ान के रोज़े पूरे करे, फिर उसके पश्चात ही शव्वाल के छ: रोज़े रखे ताकि हदीस उस पर लागू हो सके और वह उसमें वर्णित अज्र व सवाब को प्राप्त कर सके।

जहाँ तक जाइज़ होने का संबंध है तो उसके लिए रमज़ान की क़ज़ा को इतना विलंब करना जाइज़ है कि वह अगले रमज़ान के आने से पहले उसकी क़जा कर सके।

शैख मुहम्मद सालेह अल मुनज्जिद
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