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नमाज़ के लिए निषिद्ध वक़्तों में तहिययतुल मस्जिद की नमाज़ पढ़ने का हुक्म

अगर आदमी नमाज़ पढ़ने की मनाही के वक़्त में मस्जिद में प्रवेश करे तो क्या वह तहिय्यतुल मस्जिद की दो रकअतें पढ़ेगा ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

इस मुद्दे पर विद्वानों के बीच मतभेद है, और सही बात यह है कि तहिययतुल मस्जिद सभी वक़्तों में धर्मसंगत है यहाँ तक कि फज्र और अस्र के बाद भी पढ़ी जा सकती है, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कथन सामान्य है : “जब तुम में से कोई व्यक्ति मस्जिद में प्रवेश करे तो न बैठे यहाँ तक कि दो रकअत नमाज़ पढ़ ले।” इस हदीस की प्रामाणिकता पर बुखारी और मुस्लिम की सर्वसहमति है।

और इसलिए भी कि यह तवाफ़ की नमाज़ और ग्रहण की नमाज की तरह कारणों वाली नमाज़ों में से है़, और इन सब में ठीक बात यह है कि इन्हें छूटी हुई फर्ज़ नमाज़ों की क़ज़ा के समान निषिद्ध वक़्तों में भी पढ़ा जायेगा।

क्योंकि तवाफ़ की नमाज़ के बारे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है : ‘‘ऐ अब्दे मनाफ़ के बेटो ! तुम रात या दिन की किसी भी घड़ी में इस घर (काबा) का तवाफ करने वाले और नमाज़ पढ़ने वाले को न रोको।” इसे इमाम अहमद और असहाबुस्सुनन ने सहीह इसनाद के साथ रिवायत किया है। तथा इसलिए कि ग्रहण की नमाज़ के बारे में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है: ‘‘ सूर्य और चंद्रमा अल्लाह की निशानियों में से दो निशानियाँ हैं, किसी की मृत्यु और जीवन के कारण उनमें ग्रहण नहीं लगता है।” 1/332

शैख मुहम्मद बिन सालेह मुनज्जिद
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