149111: ऐसे धन से हज्ज करना जो मूल रूप से व्याज पर आधारित ऋण है


एक अवधि पहले मैंने एक कार खरीदने के मक़सद से रिबा – सूद - पर आधारित बैंक से एक क़र्ज़ लिया था। लेकिन अब मैं इस व्याज पर आधारित काम पर लज्जित हूँ, और मैंने तौबा कर लिया है। अल्लाह सर्वशक्तिमान से प्रार्थना करता हूँ कि वह मेरी तौबा क़बूल फरमाए। अब मैंने उस कार को बेच दिया है। और इस साल हज्ज करने के लिए जाने का इरादा किया है और मेरे पास पैसे नहीं हैं, क्या मेरे लिए उसकी क़ीमत से हज्ज करना जायज़ है? जबकि ज्ञात रहे कि मैं अभी भी अपने मासिक वेतन से बैंक के व्याज़ पर आधारित क़र्ज़ की क़िस्तों का भुगतान कर रहा हूँ - इस तरह कि क़र्ज़ की क़िस्तों को मासिक वेतन से मेरे पास पहुँचने से कई दिनों पहले काट लिया जाता है - और मेरे पास उसके अलावा और कुछ नहीं है। मेरा मार्गदर्शन करें, अल्लाह आपको अच्छा बदला दे।

Published Date: 2014-09-08

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

रिबा – सूद - का कारोबार करना जायज़ नहीं है, चाहे वह क़र्ज़ लेना हो या क़र्ज़ देना। और जो व्यक्ति इसमें फँसा हुआ है उसे चाहिए कि गुनाहों से उपेक्षा करते हुए, उस पर पश्चाताप करते हुए, और पुनः उसकी ओर न लौटने का संकल्प करते हुए, अल्लाह के समक्ष तौबा करे।

सूद पर आधारित क़र्ज़ - अपनी निषिद्धता और कुरूपता के बावजूद - सही कथन के अनुसार स्वामित्व का लाभ देता है। इस तरह क़र्ज़ लिया हुआ धन आपकी मिल्कियत है, उससे आप जिस अनुमेय चीज़ में लाभ उठाना चाहें लाभ उठा सकते हैं जैसे कि गाड़ी वगैरह खरीदना।

तथा देखें : किताब ''अल-मनफअतो फिल-क़र्ज़'' लि-अब्दिल्लाह बिन मुहम्मद अल-इमरानी, पृष्ठ 245-254.

इस आधार पर, आपके पास जो पैसा है उससे आपके लिए हज्ज करना जायज़ है, सूद से तौबा करने के साथ जैसाकि आपने उल्लेख किया है, और क़िस्तों का मौजूद होना और आपका उसका निरंतर भुगतान करना आपको नुक़सान नहीं पहुंचायेगा।

तथा क़र्ज़ के होते हुए हज्ज करने में कोई आपत्ति की बात नहीं है, अगर क़र्ज़ एक विलंबित समय के लिए, या क़िस्तों पर है, और आप उसके समय पर उसे चुकाने पर सक्षम हैं, तथा प्रश्न संख्या (3974) और (4241) देखें।

हम अल्लाह तआला से अपने और आपके लिए तौफीक़ और शुद्धता का प्रश्न करते हैं।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर
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