92748: हम रमज़ान के महीने के आगमन के लिए तैयारी कैसे करेंॽ


हम रमज़ान के लिए तैयारी कैसे करेंॽ इस पवित्र महीने के लिए सबसे अच्छा कार्य क्या हैॽ

Published Date: 2017-05-23

हर प्रकार की प्रशंसा औऱ गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम :

मेरे प्रतिष्ठित भाई आप ने यह सवाल पूछकर अच्छा किया है, क्योंकि आप ने रमज़ान के महीने के लिए तैयारी करने के तरीक़े के बारे में पूछा है। जबकि बहुत से लोग रोज़े की वास्तविकता को समझने में भटक गए हैं। चुनाँचे वे इसे खाने और पीने, विशेष मिठाइयां बनाने, देर रात तक जागते रहने और उपग्रह टीवी पर शो देखने का अवसर बना लेते हैं, और इस के लिए वे रमज़ान के एक लंबे समय पहले ही से तैयारी करने लगते हैं; इस डर से कि कहीं कुछ खाद्य पदार्थ छूट न जाएं ; या उसका भाव बढ़ न जाए। अतः ये लोग खाद्य पदार्थों के खरीदने, पेय तैयार करने और उपग्रह चैनलों की गाइड में खोज करने में लग जाते हैं यह पता लगाने के लिए कि वे कौन से शो देखें और कौन से छोड़ें। वे लोग – वास्तव में - रमज़ान के महीने में रोज़े की वास्तविकता से अनभिज्ञ हैं, उन्हों ने उपासना और तक़्वा को उससे निकाल दिया है, और उसे केवल अपने पेट और अपनी आँखों के लिए बना लिया है।

दूसरा :

तथा कुछ दूसरे लोग रमजान के महीने के रोज़े की वास्तविकता से सचेत हैं। अतः वे शाबान के महीने ही से उसके लिए तैयारी करने लगते हैं, बल्कि कुछ लोग इससे पहले ही तैयारी शुरू कर देते हैं। रमज़ान के महीने के लिए अच्छी तैयारी के पहलुओं में से कुछ यह हैं :

1. सच्ची तौबा (पश्चाताप)

यह हर समय अनिवार्य है, लेकिन चूंकि वह एक महान और मुबारक (धन्य) महीने का अभिवादन करनेवाला है तो उसके लिए अधिक योग्य यह है कि उसके और उसके पालनहार के बीच जो पाप हैं उनसे तौबा करने में तथा उसके और लोगों के बीच जो अधिकार हैं उनको चुकाने में जल्दी करे। ताकि जब यह पवित्र महीनी उस पर प्रवेश करे तो वह शुद्ध हृदय और मन की शांति के साथ आज्ञाकारिता और पूजा के कार्यों में व्यस्त हो।

अल्लाह सर्वशक्तिमान ने फरमाया :

( وَتُوبُوا إِلَى اللَّهِ جَمِيعاً أَيُّهَا الْمُؤْمِنُونَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ) [النور:  31] .

''और हे विश्वासियो, तुम सब के सब अल्लाह की ओर तौबा (पश्चाताप) करो, ताकि तुम समृद्ध हो सको।'' (सूरतुन-नूरः 31)

तथा अल-अग़र्र बिन यसार रज़ियल्लाहु अन्हु पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप ने फरमाया : ऐ लोगो, अल्लाह के समक्ष तौबा (पश्चाताप) करो, क्योंकि मैं दिन में एक सौ बार उसके समक्ष तौबा (पश्चाताप) करता हूँ।'' इसे मुस्लिम

(हदीस संख्याः 2702) ने रिवायत किया है।

2. दुआ करनाः

कुछ पूर्वजों से वर्णित है कि वे छह महीने तक अल्लाह से यह दुआ करते थे कि उन्हें रमजान का महीना पहुँचा दे, फिर उसके बाद पांच महीने उससे और दुआ करते थे ताकि उनसे स्वीकार करले।

अतः मुसलमान अपने सर्वशक्तिमान पालनहार से दुआ करेगा कि उसे रमज़ान का महीना इस हाल में पहुँचाए की वह अपने धर्म में अच्छा और शारीरिक तौर पर स्वस्थ हो। औऱ यह दुआ करे कि वह उसकी उसमें अपनी आज्ञाकारिता पर मदद करे, और यह दुआ करे कि उससे उसके अमल को स्वीकार कर ले।

3. इस महान महीने के आगमन के निकट होने पर आनन्दित होना।

क्योंकि रमज़ान के महीने का पहुँचना मुस्लिम बंदे पर अल्लाह तआला के महान अनुग्रहों में से है। इसिलए कि रमज़ान भलाई के मौसमों में से है, जिसमें स्वर्ग के द्वार खोल दिए जाते हैं और नरक के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। तथा वह हमारे धर्म के इतिहास में क़ुरआन और निर्णायक युद्धों का महीना है। 

अल्लाह सर्वशक्तिमान ने फरमाया :

( قُلْ بِفَضْلِ اللَّهِ وَبِرَحْمَتِهِ فَبِذَلِكَ فَلْيَفْرَحُوا هُوَ خَيْرٌ مِمَّا يَجْمَعُونَ ) يونس/58 .

''कह दीजिए, "यह अल्लाह के अनुग्रह और उसकी दया से है, अतः इस पर प्रसन्न होना चाहिए। यह उन सब चीज़ों से उत्तम है, जिनको वे इकट्ठा करने में लगे हुए है।" (सुरत यूनुसः 58).

4. अनिवार्य रोज़ों से अपने ज़िम्मे को मुक्त करना

अबु सलमा से वर्णित है कि उन्हों ने कहा : मैंने आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को कहते हुए सुनाः मेरे ऊपर रमज़ान का रोज़ा होता था, जिसे मैं केवल शाबान ही में क़ज़ा पर पाती थी।

इसे बुखारी (हदीस संख्याः 1849) और मुस्लिम (हदीस संख्याः 1146) ने रिवायत किया है।

हाफिज़ इब्ने हजर – रहिमहुल्लाह – फरमाते हैं :

उनके शाबान के महीने में रोज़े की क़ज़ा करने की उत्सुकता से यह पता चलता है कि क़ज़ा को दूसरा रमज़ान प्रवेश करने तक विलंब करना जायज़ नहीं है।

"फत्हुल बारी" (4/191)।

5. ज्ञान प्राप्त करना ताकि रोज़े के प्रावधानों और रमज़ान की विशेषता (गुणों) की जानकारी हो सके।

6. उन कार्यों को पूरा करने में जल्दी करना जो मुसलमान को रमज़ान में पूजा के कृत्यों से विचलित कर सकते हैं।

7. अपने परिवार के सदस्यों - पत्नी और बच्चों - के साथ बैठकर उन्हें रोज़े के प्रावधानों के बारे में बताए और छोटे बच्चों को रोज़ा रखने के लिए प्रोत्साहित करे।

8. कुछ किताबें तैयार करना जो घर पर पढ़ी जा सकती हों, या मस्जिद के इमाम को दी जा सकती हों ताकि वह रमज़ान के दौरान लोगों को पढ़कर सुनाए।

9. रमज़ान के महीने के रोज़ों की तैयारी के लिए शाबान के महीने के कुछ रोज़े रखना।

आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा कहती हैं : ‘‘पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रोज़ा रखते थे यहाँ तक कि हम कहते कि आप रोज़ा नहीं तोड़ें गे। और आप रोज़ा तोड़ देते थे यहाँ तक कि हम कहते कि आप रोज़ा नहीं रखें गे। मैं ने अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को रमज़ान को छोड़कर किसी महीने का पूरा रोज़ा रखते नहीं देखा। तथा मैं ने आप को किसी महीने में शाबान के महीने से अधिक रोज़ा रखते हुए नहीं देखा।’’

इसे बुख़ारी (हदीस संख्या : 1868) और मुस्लिम (हदीस संख्या : 1156) ने रिवायत किया है। 

तथा उसामा बिन ज़ैद से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैं आपको किसी महीने में इतना रोज़ा रखते हुए नहीं देखता जितना आप शाबान के महीने में रोज़ा रखते हैंॽ तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया : "रजब और रमज़ान के बीच यह ऐसा महीना है जिस से लोग गाफिल (निश्चेत व असावधान) रहते हैं, यह ऐसा महीना है जिस में आमाल अल्लाह रब्बुल आलमीन की तरफ पेश किये जाते हैं। अत: मैं पसन्द करता हूँ कि मेरा अमल इस हाल में पेश किया जाये कि मैं रोज़े से रहूँ।"

इस हदीस को नसाई (हदीस संख्याः 2357) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने ‘सहीह नसाई’ में हसन क़रार दिया है।

इस हदीस में शाबान के महीने के रोज़े की हिकमत (तत्वदर्शिता) का वर्णन है और वह यह कि : वह ऐसा महीना है जिस में कर्मों को (अल्लाह के पास) पेश किया जाता है। कुछ विद्वानों ने एक अन्य हिकमत का उल्लेख किया है, जो यह है कि वह रोज़ा फ़र्ज़ नमाज़ में (फर्ज़ से) पूर्व सुन्नत के समान है। क्योंकि वे आत्मा को अनिवार्य प्रार्थना करने के लिए तैयार करते और उसे प्रोत्साहित करते हैं। यही बात रमज़ान से पहले शाबान के रोज़े के बारे में भी कही जाएगी।

10- क़ुरआन का पाठ करना

सलमह बिन कुहैल कहते हैं : यह कहा जाता था कि शाबान का महीना क़ुऱआन के पाठकों का महीना है।

तथा जब शाबान का महीना शुरू होता तो अम्र बिन क़ैस अपनी दुकान बंद कर देते और अपने समय को क़ुरआन पढ़ने के लिए विशिष्ट कर देते थे।

इसी तरह अबू बक्र अल-बल्खी का कहना है : रजब का महीना रोपण (खेती) का महीना है, शाबान का महीना खेती (फसलों) की सिंचाई का महीना है, और रमज़ान का महीना खेती (फसलों) की कटाई का महीना है।

उन्होंने यह भी कहा : रजब के महीने का उदाहरण हवा की तरह है, शाबान के महीने की मिसाल बादलों की तरह है और रमज़ान की मिसाल बारिश की तरह है। जिसने रजब के महीने में रोपण और खेती नहीं की और शाबान के महीने में सिंचाई नहीं की, तो वह रमज़ान में कैसे कटाई करना चाहता हैॽ अब रजब तो बीत चुका है, यदि आप रमज़ान चाहते हैं तो आप शाबान में क्या करेंगेॽ इस मुबारक (धन्य) महीने में आपके पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और उम्मत के पूर्वजों का यह हाल था, तो इन कार्यों और पदों के प्रति आपका स्थान क्या हैॽ

तीसरा :

मुसलमान को रमज़ान के महीने में जो कुछ करना चाहिए, उसकी जानकारी के लिए, प्रश्न संख्याः (26869) और (12468) का उत्तर देखें।

और अल्लाह ही तौफ़ीक़ प्रदान करनेवाला है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर
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