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एक मासिक धर्म वाली महिला ने उम्रा का एहराम बाँधा और सई की फिर शुद्ध होने के बाद तवाफ किया

10-07-2019

प्रश्न 176413

जब मैं उम्रा करने के लिए आई तो मैं मासिक धर्म की अवस्था  में थी। इसलिए मैंने सई की और अपने बाल काट लिए, और मैं एहराम से बाहर निकल गई और मैंने नक़ाब पहन लिया। फिर मैंने इंतजार किया यहाँ तक कि मैं शुद्ध (पाक) हो गई। फिर मैंने काबा का तवाफ़ किया। मैंने यह हज्ज को आधार बनाकर किया था, जिसमें मासिक धर्म वाली महिला तवाफ के अलावा सब कुछ करती है। यह ज्ञात रहे कि मैं विवाहिता नहीं हूँ। इस बारे में आपकी क्या राय हैॽ अल्लाह आपको आशीर्वाद दे।

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

आप ने मासिक धर्म की स्थिति में मीक़ात से एहराम बाँधकर सही काम किया है। मासिक धर्म और निफास (प्रसवोत्तर रक्तस्राव) के होते हुए एहराम में प्रवेश करने के सही होने का प्रमाणः यह है कि अस्मा बिंत उमैस रज़ियल्लाहु अन्हा ने उस समय बच्चा जन्म दिया जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम (मदीना वालों की मीक़ात) ज़ुल-हुलैफा में हज्ज करने के इरादे से ठहरे हुए थे। तो उन्हों ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास संदेश भेजवाया कि मैं क्या करूंॽ आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "तुम स्नान कर लो और एक कपड़े का लंगोट बाँध लो और एहराम बाँधो (एहराम में प्रवेश करने की नीयत करो)।" इसे मुस्लिम (हदीस संख्या : 1218) ने रिवायत किया है।

इसी तरह आपने मासिक धर्म की स्थिति में तवाफ़ न करके भी सही किया है। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से, जब वह अपने हज्ज के उम्रा में मासिक धर्म से हो गईं थीं – और वह तमत्तुअ हज्ज कर रही थीं - फरमायाः “तुम उसी तरह करो जिस तरह कि हज्ज करने वाला करता है, सिवाय इसके कि तुम बैतुल्लाह का तवाफ न करो यहाँ तक कि तुम पवित्र हो जाओ।” इसे बुखारी (हदीस संख्या : 1650) और मुस्लिम (हदीस संख्या : 1211) ने रिवायत किया है।

लेकिन आपने तवाफ़ करने से पहले सई करके और अपने बालों को काटकर गलती की है। क्योंकि तवाफ़ से पहले सई करने की अनुमति, अधिक सही राय के अनुसार, केवल हज्ज के साथ विशिष्ट है, वह उम्रा पर लागू नहीं होता है। इसीलिए आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने मासिक धर्म की अवस्था में होने पर अपने उम्रा के लिए सई नहीं की। तथा एहराम से बाहर निकलना (एहराम खोलना) और बाल काटना तवाफ़ और सई दोनों करने के बाद ही होता है; इससे पहले उसकी अनुमति नहीं है, और ऐसा करने पर फिद्या (एक प्रतिपूरक बलिदान) देना पड़ता है।

शैख़ मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह ने कहा :

“लेखक रहिमहुल्लाह ने सई को तवाफ़ के बाद उल्लेख किया है, तो क्या उससे पहले तवाफ़ का होना शर्त हैॽ

उत्तर : हाँ, यह शर्त है। चुनाँचे यदि कोई व्यक्ति तवाफ से पहले सई करना शुरू करदेः तो उसके लिए तवाफ के बाद सई को दोहराना अनिवार्य है; क्योंकि वह अपने निर्धारित स्थान में संपन्न नहीं हुई है।

अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि : आप नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रमाणित उस हदीस के बारे में क्या कहेंगे जिसमें आप से प्रश्न किया गया, चुनाँचे एक आदमी ने आपसे कहाः मैंने तवाफ़ करने से पहले सई की है। आपने कहा : "तुम करो, इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है।”ॽ

तो इसका उत्तर यह है किः यह हज्ज के बारे में है, तवाफ के बारे में नहीं है।

अगर कोई यह कहे कि : जो चीज़ हज्ज में लागू होती है वही उम्रा में भी लागू होती है सिवाय इसके कि कोई प्रमाण आ जाए। क्योंकि तवाफ और सई, हज्ज और उम्रा दोनों में रुक्न हैॽ

इसका उत्तर यह है किः कहा जाएगा कि यह क़यास मअल फ़ारिक़ है (अर्थात् जिसे क़यास किया जा रहा है और जिसपर क़यास किया गया है, दोनों के बीच पूर्ण समानता नहीं है) क्योंकि उम्रा में क्रम का पालन न करना (यानी क्रम में गड़बड़ी करना) उसे पूरी तरह से प्रभावित करता है; क्योंकि उम्रा में तवाफ़, सई और सिर के बालों को मुंडाने या काटने के अलावा कुछ भी नहीं है। लेकिन हज्ज में क्रम का पालन न करना उसे कुछ भी प्रभावित नहीं करता है, क्योंकि हज्ज में एक ही दिन में पाँच कार्य किए जाते हैं। इसलिए इस अध्याय में उम्रा को हज्ज पर क़यास करना सही नहीं है।

तथा मक्का के विद्वान अता बिन अबी रबाह रहिमहुल्लाह के बारे में उल्लेख किया जाता है कि उन्होंने उम्रा में तवाफ से पहले सई करने को जायज़ कहा है, और कुछ विद्वानों का भी यही कथन है।

तथा कुछ विद्वान इस बात की ओर गऐ हैं कि यदि कोई भूलकर या अनभिज्ञता के कारण ऐसा करता है तो यह अनुमेय है, लेकिन यदि कोई हुक्म को जानता और याद रखता है तो यह अनुमेय नहीं है।

“अश-शर्हुल-मुम्ते” (7/273) से उद्धरण समाप्त हुआ।

शैख इब्ने बाज़ रहिमहुल्लाह इस बात की ओर गए हैं कि हज्ज के समान उम्रा में भी तवाफ से पहले सई करना सही है।

आप रहिमहुल्लाह ने फरमाया : “पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित है कि हज्जतुल वदाअ के दौरान आप से क़ुर्बानी के दिन के कार्यों अर्थात् जमरात को कंकड़ी मारने, क़ुर्बानी करने, सिर मुंडाने या बाल काटने, तवाफ़ और सई करने, और उन्हें किसी से पहले और बाद में करने के बारे में पूछा गया, तो आप ने फरमायाः “कोई आपत्ति की बात नहीं है।”

इस सामान्य उत्तर में हज्ज और उम्रा दोनों में तवाफ से पहले सई करना शामिल है। यही विद्वानों के एक समूह का भी दृष्टिकोण है। इसका प्रमाण वह हदीस है जिसे अबू दाऊद ने उसामा बिन शरीक से सही इस्नाद के साथ रिवायत किया है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उस व्यक्ति के बारे में प्रश्न किया गया जिसने तवाफ से पहले सई कर ली, तो आप ने फरमाया : "कोई बात नहीं।” यह उत्तर हज्ज और उम्रा दोनों की सई को शामिल है, तथा सही स्पष्ट प्रमाणों में कुछ भी नहीं है जो इसके विरुद्ध हो। . . . लेकिन उसके लिए धर्मसंगत है कि सावधानी के तौर पर, विद्वानों के मतभेद से निकलते हुए, तथा उस चीज़ पर अमल करते हुए जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने हज्ज और उम्रा में किया था, वह तवाफ के बाद उसे दोहरा ले।

तथा शैख तक़ीयुद्दीन रहिमहुल्लाह ने जो यह उल्लेख किया है कि सई के तवाफ के बाद होने पर सर्वसम्मति है, तो उसे इस अर्थ में लिया जाएगा कि ऐसा करना सर्वश्रेष्ठ है। जहाँ तक जायज़ होने की बात है तो इस संबंध में मतभेद है जिसकी ओर हम संकेत कर चुके हैं। जिन लोगों ने स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया है उनमें अल-मुग़्नी (3/390) के लेखक हैं, जिन्होंने अता रहिमहुल्लाह से उल्लेख किया है कि यह सामान्य रूप से जायज़ है, तथा इमाम अहमद से वर्णित दो रिवायतों में से एक रिवायत यह उल्लेख किया है कि ऐसा करना उस आदमी के लिए अनुमेय है जो भूल गया हो।”

“फतावा अश-शैख इब्ने बाज़ (17/339)” से उद्धरण समाप्त हुआ।

तथा शैख इब्ने बाज़ रहिमहुल्लाह से पूछा गया : “क्या तवाफ से पहले सई करना जायज़ है, चाहे वह हज्ज में हो या उम्रा मेंॽ

तो उन्होंने जवाब दिया:

सुन्नत का तरीक़ा यह है कि पहले तवाफ किया जाए, फिर उसके बाद सई की जाए। अगर कोई व्यक्ति तवाफ़ से पहले अज्ञानता के कारण सई कर ले, तो असमें कोई आपत्ति का बात नहीं है। जबकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह साबित है किः “एक व्यक्ति ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि : मैंने तवाफ़ करने से पहले सई कर ली। तो आप ने कहा: "इसमें कोई बात नहीं है।" इससे पता चला कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले सई कर ली, तो यह उसके लिए पर्याप्त है, लेकिन सुन्नत का तरीक़ा यह है कि वह तवाफ़ करे और फिर उसके बाद सई करे। यही हज्ज और उम्रा दोनों में सुन्नत है।”

फतावा इब्ने बाज़ (17/337) से उद्धरण समाप्त हुआ।

इस आधार परः जिस व्यक्ति ने अज्ञानता के कारण उम्रा में तवाफ करने से पहले सई कर ली, तो उसे क्षम्य समझा जाएगा।

जहाँ तक आपका तवाफ़ करने से पहले अपने बालों को काटने का संबंध है, तो यह निषिद्ध है, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, लेकिन आप पर कोई फ़िद्या (प्रतिपूरक बलिदान) अनिवार्य नहीं है, क्योंकि आप हुक्म से अनजान थीं, लेकिन अब आपके लिए अपने बालों को काटना अनिवार्य है।

यदि आपके लिए संभव है कि मक्का वापस जाएं और तवाफ़ करें, फिर उसके बाद सई करें, फिर उसके बाद आप एहराम से हलाल हो जाएं और अपने बालों को काटें : तो यह बेहतर और अधिक सावधानी का पक्ष है। ताकि आप अपने एहराम से निश्चितता के साथ बाहर निकल जाएं और अपने उम्रा को बेहतरीन तरीक़े से कर सकें।

अगर आप के लिए ऐसा करना संभव नहीं है, और आप अपने बालों को अभी काट लें, तो इन शा अल्लाह आपका उम्रा सही है।

और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

हज्ज और उम्रा का तरीक़ा
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