70507: क्या तीव्र ठंड के दिनों में जनाबत से तयम्मुम करने की अनुमति है?


क्या मैं तीव्र ठंड के दिनों में जनाबत की हालत में तयम्मुम के द्वारा नमाज़ पढ़ सकता हूँॽ ज्ञात रहे कि मेरे पास तुरंत पवित्रता प्राप्त करने की संभावनाएं नहीं हैं। तथा मैं अपनी पीठ में ठंड की बीमारी से पीड़ित हूँ, जो मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित करती है।

Published Date: 2017-11-04

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

जिस व्यक्ति को जनाबत लग गई है और वह नमाज़ पढ़ने का इरादा रखता है तो उसके लिए अनिवार्य है कि वह पानी से स्नान करे। क्योंकि अल्लाह तआला का कथन हैः

(وَإِنْ كُنْتُمْ جُنُبًا فَاطَّهَّرُوا) [المائدة : 6]

''यदि तुम जनाबत की हालत में हो तो स्नान करो।'' (सूरतुल मायदाः 6)

यदि वह पानी का प्रयोग करने में असमर्थ है, क्योंकि वह उपलब्ध नहीं है, या पना उपलब्ध है परंतु उसके इस्तेमाल करने में उसे हानि पहुँचने का खतरा है; क्योंकि वह बीमार है, अथवा तीव्र ठंड है – और उसके पास उसे गरम करने के लिए कोई चीज़ नहीं है, तो ऐसी स्थिति में वह पानी से स्नान करने के बजाय मिट्टी से तयुम्म करेगा। क्योकि अल्लाह तआला का कथन हैः

( وَإِنْ كُنْتُمْ مَرْضَى أَوْ عَلَى سَفَرٍ أَوْ جَاءَ أَحَدٌ مِنْكُمْ مِنَ الْغَائِطِ أَوْ لامَسْتُمُ النِّسَاءَ فَلَمْ تَجِدُوا مَاءً فَتَيَمَّمُوا صَعِيدًا طَيِّبًا ) [المائدة : 6]

‘‘यदि तुम बीमार हो या सफ़र में हो या तुम में से कोई शौच करके आया हो, या तुम स्त्रियों से मिले हो (संभोग किया हो), फिर तुम्हें पानी न मिले तो पाक मिट्टी से तयम्मुम कर लो।’’ (सूरतुल मायदाः 6)

इस आयत में इस बात का प्रमाण है कि वह रोगी जिसे पानी के उपयोग से नुकसान पहुँचता है जैसे कि स्नान करना मौत का कारण बन सकता है, या उसके रोग को बढ़ाने या उसके ठीक होने में देरी का कारण बन सकता हो, तो वह तयम्मुम करेगा। अल्लाह तआला ने तयम्मुम का तरीक़ा भी वर्णन किया है। अल्लाह ने फरमायाः

( فَامْسَحُوا بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُمْ مِنْهُ ) [المائدة : 6]

''उसे अपने चेहरों पर और हाथों पर मल लो।'' (सूरतुल मायदाः 6)

अल्लाह सर्वशक्तिमान ने इस प्रावधान (नियम) की हिक्मत को स्पष्ट करते हुए फरमायाः

( مَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيَجْعَلَ عَلَيْكُمْ مِنْ حَرَجٍ وَلَكِنْ يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمْ وَلِيُتِمَّ نِعْمَتَهُ عَلَيْكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ) [المائدة : 6]

''अल्लाह तआला तुम पर किसी क़िस्म की तंगी नहीं डालना चाहता। अपितु वह चाहता हैं कि तुम्हें पवित्र करे और तुम्हें अपनी भरपूर नेमत प्रदान करे, ताकि तुम कृतज्ञ बनो।'' (सूरतुल मायदाः 6).

अम्र बिन अल-आस रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि उन्हों ने फरमायाः मुझे "ज़ातुस्सलासिल" के युद्ध के अवसर पर एक ठंडी रात में स्वपनदोष हो गया। मुझे यह डर लगा कि यदि मैंने स्नान कर लिया तो मैं मर जाऊँगा। अतः मैंने तयम्मुम कर लिया और अपने साथियों को सुबह की नमाज़ पढ़ाई। लोगों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इसका चर्चा किया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः हे अम्र, तू ने अपने साथियों को जनाबत की हालत में नमाज़ पढ़ाई है? चुनाँचे मैंने आप को उस चीज़ के बारे में बता दिया जिसने मुझे स्नान करने से रोक दिया था और मैंने कहा : मैंने अल्लाह तआला के इस कथन को सुना है :

( وَلا تَقْتُلُوا أَنْفُسَكُمْ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيماً ) [النساء: 29]  

''और अपने आपकी हत्या न करो। निःसंदेह अल्लाह तुमपर बहुत दयावान है।’’ (सूरतुन निसाः 29)

तो इसपर अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हँस पड़े और कुछ नहीं कहा।

इसे अबू दाऊद (हदीस समख्याः 334) ने रिवायत किया है और शैख अल्बानी ने ''सहीह अबू दाऊद'' में इसे सहीह कहा है।

हाफ़िज़ इब्न हजर रहिमहुल्लाह ने फरमायाः

इस हदीस से, उस व्यक्ति के लिए तयम्मु के जायज़ होने का पता चलता है जिसके पानी उपयोग करने से हलाक होने की आशा की जा सकती है, चाहे वह ठंड की वजह से हो या कुछ और कारण से हो। इसी तरह तयम्मुम करने वाले का वुज़ू करने वालों को नमाज़ पढ़ाना जायज़ है।

 "फ़त्हुल-बारी" (1/454)

शैख अब्दुल अज़ीज़ इब्न बाज़ (अल्लाह तआला उनपर दया करे) फरमाते हैं :

यदि आप को गर्म पानी मिल सकता है या आप ठंडे पानी को गर्म कर सकते हैं, या अपने पड़ोसियों से या अपने पड़ोसियों के अलावा से खरीद सकते हैं : तो आपके लिए ऐसा करना अनिवार्य है; क्योंकि अल्लाह तआला फरमाता हैः ( فاتَّقوا الله ما استَطَعْتُم ) (तुम अपनी शक्ति भर अल्लाह से डरते रहो।) अतः आप को चाहिए कि पानी खरीदने या गर्म करने या इनके अलावा अन्य तरीक़े जो आपको पानी द्वारा शरई वुज़ू करने में सक्षम कर सकें, इनमें से आप जो भी कर सकते हैं, उसे करें। यदि आप इसमें विफल हो जाएं और ठंड गंभीर हो, और इसमें आपके लिए खतरा हो, तथा आपके पास उसे गर्म करने का, या अपने आसपास के लोगों से कुछ गर्म पानी खरीदने का कोई उपाय न होः तो आप क्षम्य हैं और आपके लिए तयम्मुम करना पर्याप्त है। क्योंकि अल्लाह तआला का कथन हैः

( فاتَّقوا الله ما استَطَعْتُم )

(तुम अपनी शक्ति भर अल्लाह से डरते रहो।)

और अल्लाह तआला ने फरमायाः

( فَلَمْ تَجِدُوا مَاءً فَتَيَمَّمُوا صَعِيدًا طَيِّبًا فَامْسَحُوا بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُمْ مِنْهُ ) [المائدة : 6]

''फिर तुम्हें पानी न मिले तो पाक मिट्टी से तयम्मुम कर लो। उसे अपने चेहरों पर और हाथों पर मल लो।'' (सूरतुल मायदाः 6)

जो आदमी पानी का उपयोग करने में असमर्थ है उसका हुक्म उस व्यक्ति का हुक्म है जो पानी न पाए।

"मजमूअ फतावा इब्न बाज़" (10/199).

आपको चाहिए कि अपने शरीर का जितना भाग धो सकते हैं उसे धोएं, जैसे कि आप दोनों हाथों, दोनों पैरों और ऐसे ही अन्य अंगों को धोएं, यदि उसमें आप के लिए कोई नुकसान न हो, फिर तयम्मुम करें।

हम आपके त्वरित आरोग्य के लिए अल्लाह से प्रश्न करते हैं, और यह कि आपको जो कष्ट पहुँची है उसे आपके लिए कफ्फारा (परायश्चित) बना दे और आपके पद को बढ़ा दे।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर
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