Wed 23 Jm2 1435 - 23 April 2014
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वित्र की नमाज़ मग्रिब की नमाज़ के तरीक़े पर पढ़ने का हुक्म

कुछ इमाम तरावीह की नमाज़ में तीन रक्अत वित्र एक साथ दो तशह्हुद और एक सलाम के साथ (बिल्कुल मग्रिब की नमाज़ के समान) पढ़ते हैं। तो क्या यह सही है ॽ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रमाणित है कि आप ने वित्र की नमाज़ विभिन्न रूपों से पढ़ी है, आप ने उसे एक रक्अत, तीन रक्अतें, पाँच रकअतें, सात रक्अतें और नौ रकअतें पढ़ी हैं। तथा आप ने तीन रक्अत वित्र को दो तरीक़े से पढ़ी है : या तो आप उसे एक साथ एक ही तशह्हुद से पढ़ते थ, या आप दो रक्अत से सलाम फेर देते, फिर एक रक्अत पढ़ते और उस से सलाम फेर देते, और आप उसे मग़्रिब की नमाज़ के समान - दो तशह्हुद और एक सलाम के साथ - नहीं पढ़ते थे, बल्कि आप ने इस से मना किया है, चुनांचे आप ने फरमाया: “तीन रक्अत वित्र (इस तरह) न पढ़ो कि मग्रिब के समान हो जाए।” इसे हाकिम (1/304), बैहक़ी (3/31), दारक़ुत्नी (पृष्ठ: 172) ने रिवायत किया है, तथा हाफिज़ इब्ने हजर ने “फत्हुल बारी” (4/310) में फरमाया : उसकी इसनाद शैखैन (बुखारी व मुस्लिम) के शर्त पर है।

शैख मुहम्मद सालेह अल-उसैमीन ने फरमाया :

अतः वित्र की नमाज़ तीन रक्अत जाइज़ है, पाँच रक्अत जाइज़ है, सात रक्अत जाइज़ है और नौ रकअत जाइज़ है, और यदि वह तीन रक्अत वित्र की नमाज़ पढ़ता है तो उसके दो तरीक़े हैं जो दोनों वैध (धर्म संगत) हैं :

पहला तरीक़ा : तीन रकअतें एक साथ एक तशह्हुद से पढ़े।

दूसरा तरीक़ा : दो रक्अत से सलाम फेर दे, फिर एक रक्अत वित्र पढ़े।

ये सभी सुन्नत से प्रमाणित हैं, यदि वह कभी इस तरह पढ़ता है और कभी उस तरह पढ़ता है तो यह बेहतर है। . . . तथा उसके लिए जाइज़ है कि वह उसे एक सलाम से पढ़े, किंतु एक तशह्हुद से पढ़ेगा दो तशह्हुद से नहीं ; इसलिए कि यदि वह उसे दो तशह्हुद से पढ़ेगा तो वह मग्रिब की नमाज़ के समान हो जायेगी, जबकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे मग्रिब की नमाज़ के समान पढ़ने से मना फरमाया है।

“अश्शरहुल मुम्ते“ (4/14-16).

तथा - अधिक जांनकारी के लिए - प्रश्न संख्या (26844), तथा (3452) का उत्तर देखें, उसके अंदर  क़ियामुल्लैल औ वित्र की नमाज़ के बारे में अच्छा और दीर्घ विस्तार मौजूद है।

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।
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