Sat 19 Jm2 1435 - 19 April 2014
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क्या पति पर अपनी पत्नी को खुश रखना ज़रूरी है

पति के अपनी पत्नी के प्रति क्या कर्तव्य हैं ? क्या उसे खुश रखना ज़रूरी है या नहीं ? मेरे पति मुझ से उस तरह व्यवहार नहीं करते जिस तरह अपने परिवार के बाक़ी सदस्यों के साथ व्यवहार करते हैं। वह अपने माता पिता, और अपने भाईयों का ध्यान रखते हैं और उनकी खुशी का मुझसे अधिक ख्याल रखते हैं। मैं उनसे चाहती हूँ कि वह मेरा और मेरी खुशी का उसी तरह ख्याल रखें जैसा उन लोगों का ख्याल रखते हैं। क्या आप मुझे कोई ऐसा कारण दे सकते हैं जो मैं उन्हें बता सकूँ ताकि वह मुझसे प्यार करें और मेरा अधिक ख्याल रखें।

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

पति पर अनिवार्य है कि वह अपनी पत्नी के साथ भलाई के साथ (परंपरागत) रहन सहन करे, और उसके खर्च यानी खाना, पानी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था करे, क्योंकि अल्लाह तआला का फरमान है।

﴿وَعَاشِرُوهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ ﴾ [النساء : 19]

''और उनके साथ भलाई के साथ (परंपरागत) रहन सहन करो।'' (सूरतुन्निसा : 19)

तथा अल्लाह तआला का फरमान है :

﴿وَلَهُنَّ مِثْلُ الَّذِي عَلَيْهِنَّ بِالْمَعْرُوفِ وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٌ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ ﴾ [البقرة : 228]

''और उन (महिलाओं) के लिए परंपरा के अनुसार उसी के समान अधिकार हैं जिस तरह कि उनके ऊपर (पुरूषों के अधिकार) हैं, और पुरूषों को उन (महिलाओं) के ऊपर दर्जा प्राप्त है, और अल्लाह तआला प्रभुत्ताशाली, बड़ा हिकमत वाला है।'' (सूरतुल बक़रा : 228)

तथा अहमद (हदीस संख्या : 20025) और अबू दाऊद (हदीस संख्या : 2142) ने मुआवियह बिन हैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्हों ने कहा :

''मैं ने कहा : ऐ अल्लाह के पैगंबर! हमारी बीवी का हमारे ऊपर क्या हक़ है? आप ने फरमाया : जब तुम खाओ तो उसे खिलाओ, जब तुम पहनो या कमाई करो तो उसे पहनाओ, और चेहरे पर न मारो, और उसे बदसूरत (कुरूप) न कहो, और घर के अलावा कहीं न छोड़ों।'' अबू दाऊद कहते हैं : (ला तुक़ब्बिह) ''कुरूप न कहो''  का अर्थ यह है कि ''क़ब्बहकिल्लाह'' (अल्लाह तआला तुझे विरूपित करे) न कहो।

इस हदीस के बार में अल्बानी ने सहीह अबू दाऊद में कहा है कि : हसन सहीह है।

तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कई हदीसों में औरतों के साथ भलाई करने की वसीयत की है। अतः पति को चाहिए कि अपनी पत्नी के बारे में अल्लाह तआला से डरे, और हर हक़ वाले को उसका हक़ दे। माता पिता के साथ सद्व्यवहार और रिश्तेदारों के साथ रिश्तेदारी निभाने का, पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार करने, उसका सम्मान करने और उसका ख्याल रखने के साथ आपस में कोई टकराव नहीं है। सबसे अच्छी चीज़ जिसके द्वारा आप उसे नसीहत कर सकती हैं वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह फरमान है :

''तुम में सबसे अच्छा वह व्यक्ति है जो अपने परिवार (पत्नी) के लिए सबसे अच्छा हो और मैं अपने परिवार के लिए सबसे अच्छा हूँ।'' इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 3895) और इब्ने माजा (हदीस संख्या : 1977) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीह तिर्मिज़ी में इसे सहीह कहा है।

उक्त हदीस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अच्छा होने का मापदण्ड परिवार का आदर सम्मान करने को बताया है। अतः जो व्यक्ति अच्छे मुसलमानों में से बनना चाहता है वह अपने परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करे। और यह पत्नी, बाल बच्चों और रिश्तेदारों के साथ सद्व्यवहार करने को सम्मिलित है।

तथा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कथन (उसे याद दिललाएं) : ''तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जो कुछ भी खर्च करोगे उस पर तुम्हें अज्र व सवाब मिलेगा, यहाँ तक कि जो (लुक़्मा) तुम अपनी पत्नी के मुँह में डालते हो।'' (सहीह बुखारी, हदीस संख्या : 56).

आपको चाहिए कि उन कारणों का पता लगाएं जिनकी वजह से वह आपके साथ व्यवहार में कमी व कोताही से काम लेता है। हो सकता ऐसा इसलिए हो कि आप उसके हक़ में कमी व कोताही से काम लेती हों, जैसे कि उसका ख्याल रखने, उसके लिए बनाव सिंघार करने और उसकी ज़रूरतों की पूर्ति में जल्दी करने आदि में (लापरवाही करती हों)।

आप अधिक धैर्य और सब्र से काम लें, क्योंकि इसे में अधिक भलाई आर अच्छा परिणाम है, जैसा कि अल्लाह का फरमान है :

﴿ وَاصْبِرُوا إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ ﴾ [ا لأنفال :46]

''तथा धैर्य से काम लो, निःसन्देह अल्लाह तआला धैर्य करने वालों के साथ है।'' (सूरतुल अनफाल : 46)

तथा अल्लाह का कथन है :

﴿إِنَّهُ مَنْ يَتَّقِ وَيَصْبِرْ فَإِنَّ اللَّهَ لا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ ﴾ [يوسف : 90]

''निःसन्देह जो भी तक़्वा (परहेज़गारी और आत्म संयम) से काम ले और सब्र (धैर्य) करे, तो अल्लाह तआला किसी सत्यकर्म करने वाले के अज्र (बदला) को नष्ट नहीं करता है।'' (सूरत यूसुफ : 90)

तथा अल्लाह का फरमान है :

﴿ فَاصْبِرْ إِنَّ الْعَاقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ ﴾ [هود : 49]

''अतः आप सब्र से काम लें, निःसन्देह अंतिम परिणम परहेज़गारों के लिए है।'' (सूरत हूद : 49).

हम अल्लाह तआला से प्रश्न करते हैं कि हमारे हालात और सभी मुसलमानों के हालात को सुधार दे।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।
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