96816: क़ुर्बानी की क़ीमत के बराबर सदक़ा करने की तुलना में क़ुर्बानी करना अफ़ज़ल है।


मैं और मेरा भाई दो अलग-अलग घरों में रहते हैं, ईद के अवसर पर हमारा इरादा है कि हम ऐक मेंढा ज़बह करें, और दूसरे को ज़बह किए बिना सदक़ा कर दें। तो क्या हमारे लिए दोनों मेंढों को ज़बह करना अनिर्वाय है या नहीं?

Published Date: 2017-08-25

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

आप दोनों के लिए शरई आदेश यह है कि आप दोनों दो जानवर की क़ुर्बानी करें। आप दोनों एक क़ुर्बानी में साझीदार नहीं हो सकते। क्योंकि आप ने उल्लेख किया है कि आप अपने भाई के साथ नहीं रहते, बल्कि दोनों भाई अलग-अलग रहते हैं। और हम प्रश्न संख्याः (96741) के उत्तर में क़ुर्बानी के जानवर में साझीदार होने की शर्तों का उल्लेख कर चुके हैं, और हमने वहाँ पर कुर्बानी के हुक्म के बारे में विद्वानों के मतभेद का उल्लेख किया है, और यह कि विद्वानों की बहुमत के निकट कुर्बानी सुन्नते मुअक्कदा है, और कुछ धर्मशास्त्रियों के अनुसार कुर्बानी करना वाजिब है।

तथा विद्वानों ने उल्लेख किया है कि क़ुर्बानी की क़ीमत दान करने के बजाय क़ुर्बानी का जानवर ज़बह करना बेहतर है। इस आधार पर, आप यह कर सकते हैं कि क़ुर्बानी का जानवर ज़बह कर उसका गोश्त दान कर दें। या आप किसी दूसरे व्यक्ति को वकील नियुक्त कर दें जो किसी ऐसे देश या क्षेत्र में आपकी ओर से उसे ज़बह करे जहाँ लोगों को इसकी अधिक ज़रूरत होती है।

‘‘मतालिब ऊलिन्नुहा’’ (2/473) में उल्लेख हैः

‘‘(और उसे ज़बह करना) अर्थात क़ुर्बानी के जानवर को ज़बह करना, (और इसी तरह अक़ीक़ा करना : उसकी क़ीमत दान करने से बेहतर है), इमाम अहमद ने स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया है। इसी तरह हदी (हज्ज में ज़बह किया जाने वाला क़ुर्बानी) का जानवर भी है ... नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके बाद खुल्फा-ए-राशेदीन ने (ईद के दिन) क़ुर्बानी की है और इसी तरह हदी के जानवर को (हज्ज के मौसम में मक्का) भेजा है; अगर (हदी और ईद की क़ुर्बानी के जानवर की) क़ीमत दान करना बेहतर होता तो वे उससे उपेक्षा न करते।’’ समाप्त हुआ।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर
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