3593: सब्जियों और फलों पर ज़कात


एक आदमी के पास सब्जि़यों और फलों का एक बगीचा है जो उस के व्यक्तिगत उपयोग के लिए है, तो क्या उन में दसवाँ हिस्सा ज़कात (उश्र) अनिवार्य है ?

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

सब्जि़यों या फलों में ज़कात अनिवार्य नहीं है, क्योंकि उन्हें न तो मापा जाता है और न ही संग्रहित (संचित) किया जाता है, किन्तु उस फल में ज़कात अनिवार्य है जिसे मापा जाता और कोष (संचित) करके रखा जाता है जैसे कि खजूर, किशमिश, बादाम और पिस्ता . . . लेकिन जिसे मापा और संग्रहित (संचित) नहीं किया जाता है जैसे कि अनार, अंजीर, आड़ू, खरबूज़े और अन्य फल, और जैसे टमाटर, खीरे और अन्य सब्जि़याँ तो इन में ज़कात नहीं है, क्योंकि यदि इन्हें संग्रहित (जमा) कर के रखा जायेगे तो ये खराब हो जायेंगे।

अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "अनाज और खजूर में ज़कात नहीं है यहाँ तक कि वह पाँच वसक़ (300 साअ़) को पहुँच जाये . . ." (इसे बुखारी और मुस्लिम वगैरा न रिवायत किया है), यह उस स्थिति में है जब उसे मापा जाता हो, तो फिर जिसे सिरे से मापा ही नहीं जाता है उस में सर्वोचित रूप से ज़कात अनिवार्य नहीं होगी।

तथा अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु से मरफूअन -और कुछ ने कहा है कि : मौक़ूफन- वर्णित है कि : "सब्जि़यों में ज़कात नहीं है।"

इसी तरह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के उत्तराधिकारियों (खुलफा-ए-राशिदीन) ने इन की ज़कात नहीं ली है, जबकि उन के आस पास इन की खेती होती थी और उन की ज़कात नहीं दी जाती थी, यह इस बात का प्रमाण है कि उन में ज़कात अनिवार्य नहीं है।

इसी तरह आप के बगीचे का व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए होना, व्यापार के लिए न होना, इस बात की पुष्टि करता है कि इस बगीचे में ज़कात अनिवार्य नहीं है। किन्तु अगर वह व्यापार के लिए है और उस के लाभ पर एक साल बीत जाये, तो उस समय उस माल पर ज़कात अनिवार्य होगी जिस पर एक साल बीत गया है। और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।

इस्लाम प्रश्न और उत्तर

शैख मुहम्मद सालेह अल-मुनज्जिद
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