84089: वह एक व्यक्ति से प्यार करती है और उसने उस से अपने साथ बाहर निकलने को कहा है तो वह क्या करे ?


मैं आप से मदद के लिए अनुरोध कर रही हूँ, मैं एक नवजाना से प्यार करती हूँ और उसने मुझसे कहा है कि मैं उसके साथ बाहर निकलूँ किंतु मैं नहीं जानती कि उससे क्या कहूँ ? मैं उलझन में हूँ। कृपया मेरी मदद करें ।

हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम:

हमें बहुत खुशी हो रही है कि आप ने इस मामले के बारे में कोई क़दम उठाने से पहले हमसे मदद का अनुरोध किया। हम आप के लिए वही पसंद करते हैं जो अपनी बेटियों और बहनों के लिए पसंद करते हैं। आप अपनी सबसे महत्वपूर्ण बौर बहुमूल्य चीज़ (सतीत्व) की हिफाज़त करें, और इस बात से बचें कि शैतान आप को कभी प्यार के नाम से और कभी मनोरंजन के नाम से धोखा में डाल दे।

मेरी बेटी . . . हमें इस बात से खुशी होती है कि आप नमाज़ की पाबंदी करें, हिजाब (पर्दा) को अपनायें, शुद्धता, पवित्रता और शालीनता (हया) से सुसज्जित हों, और उस धर्म की शिक्षाओं का पालन करें जो इस लिए आया है कि मानव के पद (स्थिति) को ऊँचा करे और उसके मन को शुद्ध और पवित्र बनाये।

तथा हमें इस बात से बहुत दुःख होता है कि आपकी स्थिति इसके विपरीत हो, और हमारे लिए यह खेदजनक है कि शैतान आपको आपके विनाश की ओर खींच कर ले जाये, परिणाम स्वरूप आप बलि का बकरा बन जायें जिसे उसकी मृत्यु की ओर हाँक कर ले जाया जाता है और उसे इसका एहसास नहीं होता है !!

मेरी बेटी . . . यह एक सचमुच बात है कोई उपहास नहीं है, आपके अलावा बहुत सी महिलाएं इस रास्ते पर चल चुकी हैं, जिसका अंत दुर्भाग्यपूर्ण रहा है, और उन्हें पछतावा और अफससोस हुआ है। किंतु . . समय बीतने के बाद (जब बहुत देर हो चुकी थी), जिस समय पछतावा लाभ नहीं देता है, और शायद आपको इस साइट पर इस विषय में बहुत सारी कहानियाँ मिल जायें, जिन में आपके लिए सबक़ (सीख) है, और आप इस बात से बचें कि आप स्वयं दूसरों के लिए सीख और सबक़ बन जायें।

दूसरा:

औरत के लिए जाइज़ नहीं है कि वह किसी ऐसे आदमी के साथ संबंध स्थापित करे जो उसका महरम नहीं है (जो उसके लिए पराया है), भले ही उन दोनों का इरादा शादी करने का हो, क्योंकि अल्लाह तआला ने परायी (गैर महरम) औरत के साथ एकांत (तंहाई) में होना, उससे हाथ मिलाना और उसकी ओर देखना हराम (निषिद्ध) कर दिया है -सिवाय इसके कि कोई आवश्यता जैसे कि शादी का पैग़ाम और गवाही देना हो -, तथा उस पर इस बात को भी हराम कर दिया है कि वह श्रृंगार का प्रदर्शन करे, गैर महरम (पराये मर्दों) के सामने अपनी छुपाने (पर्दा करने) की चीज़ों को प्रकाशित करे, उनके बीच सुगंध लगाकर निकले, तथा उनसे कोमलता और मृदुलता के साथ बात चीत करे। ये हराम (निषिद्ध) बातें किताब व सुन्नत के प्रमाणों से सर्वज्ञात हैं, और उनमें उस व्यक्ति के लिए कोई अपवाद (अलग हुक्म) नहीं है जो शादी का दृढ़ संकल्प रखता है, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसने वास्तव में शादी का पैगाम दे दिया है, क्योंकि शादी का प्रस्ताव देने वाला व्यक्ति (मंगेतर) औरत के लिए पराया (अजनबी) ही रहता है यहाँ तक कि वह उससे विवाह (निकाह) आयोजित कर ले।

1- अजनबी (परायी) महिला के साथ एकांत (तंहाई), यद्यपि अपने मंगेतर के साथ ही क्यों न हो, के हराम (निषिद्ध) होने के बारे में वर्णित प्रमाणों में से एक वह हदीस है जिसे बुखारी (हदीस संख्या: 3006) और मुस्लिम (हदीस संख्या: 1341) ने इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत किया है कि उन्हों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फरमाते हुए सुना: "कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ एकांत (अकेले) में न रहे।"

तथा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "सावधान, कोई पुरूष किसी महिला के साथ एकांत में नहीं होता है मगर उन दोनों का तीसरा शैतान होता है।" इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या: 2165) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीह तिर्मिज़ी में इसे सहीह कहा है।

2- तथा पुरूष के महिला की ओर देखने के निषेद्ध के बारे में अल्लाह तआला का यह फरमान आया है:

 ]قُلْ لِلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا مِنْ أَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْ ذَلِكَ أَزْكَى لَهُمْ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ [ [سورة النور :30 ].

‘‘आप मोमिनों (ईमान वाले पुरूषों) से कह दीजिए कि अपनी दृष्टियों (निगाहों) को नीची रखें और अपने शरमगाहों (सतीत्व) की रक्षा करें, यह उनके लिए अधिक पवित्रता का पात्र है, निःसंदेह अल्लाह तआला उनके कार्यों से अच्छी तरह अवगत है।’’ (सूरतुन्नूर: 30)

तथा मुस्लिम (हदीस संख्या: 2159) ने जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्हों ने कहा: मैं ने अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अचानक (आकस्मिक) नज़र के बारे में प्रश्न किया तो आपने मुझे आदेश दिया कि मैं अपनी निगाह को फेर (हटा) लूँ।

और "अचानक नज़र" (आकस्मिक दृष्टि) का मतलब यह है कि बिना इरादा के उसकी नज़र किसी औरत पर पड़ जाये, जैसेकि यदि वह रास्ते आदि की ओर देख रहा हो।

रही बात औरत की, तो वह बिना शह्वत के पुरूष की ओर देख सकती है, यदि फित्ने में पड़ने का भया न हो। किन्तु, शह्वत के साथ या फित्ने के भय की स्थिति में ऐसा करना जाइज़ नहीं है।

3- अजनबी (परायी और गैर महरम) औरत से मुसाफह करने (हाथ मिलाने) के निषेद्ध के बारे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह फरमान वर्णित है: "तुम में से किसी व्यक्ति के सिर में लोहे का तार चुभाया जाना इस बात से श्रेष्ठ (बेहतर) है कि वह किसी ऐसी औरत को छुए जो उसके लिए हलाल नहीं है।’’ इसे तबरानी ने मा’क़िल बिन यसार की हदीस से रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीहुल जामि (हदीस संख्या: 5045) में इसे सहीह कहा है। और यहाँ पर पुरूष और स्त्री दोनों दोषी हैं।

4- औरत के बे-पर्दा निकलने और पराये मर्दों के सामने अपने श्रृंगार का प्रदर्शन करने के निषेद्ध के बारे में वर्णित प्रमाणों में से एक वह हदीस है जिसे मुस्लिम (हदीस संख्या: 2128) ने अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्हों ने कहा: अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: "नरकवासियों के दो वर्ग ऐसे हैं जिन्हें मैं ने नहीं देखा है: एक जाति ऐसी है जिनके साथ गायों की पूँछों के समान कोड़े होंगे जिनसे वे लोगों को मारें गे, और दूसरा वर्ग ऐसी औरतों का है जो वस्त्र पहने हुए भी नंगी होंगी लोगों को आकर्षित करने वाली और (उनकी ओर) आकर्षित होने वाली होंगी, उनके सिर बुख्ती ऊँट के झुके हुए कोहान के समान होंगे, वे स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगी, और न ही उसकी सुगंध पायेंगी, हालांकि उसकी सुगंध इतनी और इतनी दूरी से ही महसूस होगी।’’

बुख़्ती: एक प्रकार के ऊँट होते हैं जिनकी गर्दनें लंबी होती हैं।

5- औरत के सुगंध लगाकर इस प्रकार बाहर निकलने कि पराये मर्द उसकी सुगंध को सूँघें, इसके निषेद्ध में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह फरमान वर्णित है: "जो भी महिला सुगंध लगाकर किसी क़ौम के पास से गुज़री ताकि वे उसकी खुश्बू को सूँघें, तो वह औरत व्यभिचारणी है।’’ इसे नसाई (हदीस संख्या: 5126), अबू दाऊद (हदीस संख्या: 4173) और तिर्मिज़ी (हदीस संख्या: 2786) ने रिवायत किया है और अल्बानी ने सहीह सुनन नसाई में इसे हसन कहा है।

6- तथा कोमलता और मृदुलता से बात करने के निषेद्ध में अल्लाह तआला का यह फरमान आया है:

] يَا نِسَاءَ النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَأَحَدٍ مِنَ النِّسَاءِ إِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّذِي فِي قَلْبِهِ مَرَضٌ وَقُلْنَ قَوْلاً مَعْرُوفاً[  [سورة الأحزاب : 32 ]

‘‘ऐ नबी की औरतो, तुम आम औरतों की तरह नहीं हो, यदि तुम ईश्भय (परहेज़गारी और संयम) अपनाओ तो (मर्दों से बात करते समय) कोमलता के साथ बात न करो कि जिसके दिल में रोग हो वह कोई बुरा ख्याल करे, और भली बात कहो।’’ (सूरतुल अहज़ाब: 32)

जब यह बात विश्वासियों (मोमिनों) की पवित्र माताओं (अर्थात् पैगंबर की पत्नियों) के विषय में है तो उनके अलावा अन्य महिलाएं तो इसका और अधिक पात्र हैं।

तीसरा:

आजकल जिसे पुरूष और परायी महिला के बीच प्रेम का नाम दिया जाता है वह, यदि उसमें ये सभी निषिद्ध (हराम) बातें और इनसे भी बढ़कर चीज़ें न पाई गयीं, इन में से किसी हराम बात से खाली नहीं होता है। अल्लाह हमें और आप को हर बुराई से सुरक्षित रखे।

अतः, आप के ऊपर अनिवार्य है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान से तौबा करें, उसके क्रोध और इंतिक़ाम से बचें, और उस नवजवान के साथ यह संबंध तुरंत विच्छेद कर दें। अतएव उससे मिलने के बारे में न सोचें और अपने साथ बाहर निकलने के लिए उसकी मांग को अस्वीकार कर दें, बल्कि उचित यह है कि उसके साथ पूर्ण रूप से संपर्क को काट दें, क्योंकि बुराई का आरम्भ आपके दिल का उसके साथ लगाव है, और यह शैतान का धीरे-धीरे आपको बहकाना है कि आप ने उससे नज़र मिलाई या उसके साथ बात-चीत की यहाँ तक कि आपके दिल में उसका प्रेम प्रवेश कर गया। अतः, अब बात-चीत के द्वारा या उसके साथ बाहर निकलकर मामले को अधिक बुरा और गंभीर न बनायें।

आप इस बात को अच्छी तरह जान लें कि अक्सर संकटें साधारण कदमों से आरंभ होती हैं, फिर ऐसी चीज़ घटती है जो कल्पना में भी नहीं होती है। कितनी औरतें ऐसी हैं जिन्हें अपने ऊपर अतिरिक्त विश्वास था और यह कि वह नवजवान उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता, फिर परिणाम यह सामने आया कि वह हर चीज़ गवाँ बैठी ! फिर वह भेड़िया जो उससे वादा करता था और उसे शादी का हरा बाग दिखाता था, उससे अलग थलग हो जाता है, क्योंकि अब वह औरत उसके योग्य नहीं रह गयी, और यह बात बहुत दूर है कि वह उस औरत पर विश्वास करे जबकि उसने अपने लिए इस बात को स्वीकार कर लिया कि वह एक पराये आदमी से संबंध स्थापित करे।

और हम आपसे यह बात मात्र आपकी शुभचिंता और आपके लिए भलाई चाहने के अध्याय से कह रहे हैं। हम अल्लाह से प्रार्थतना करते हैं कि आप को हर बुराई और घृणास्पद चीज़ से सुरक्षित रखे। और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।

और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।
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