979: तवस्सुल के प्रकार


प्रश्न : तवस्सुल के प्रकार क्या हैं?

हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति अल्लाह के लिए योग्य है।

'तवस्सुल' और 'वसीला' से निम्नलिखित चार चीज़ों में से कोई एक चीज़ मुराद होती है :

प्रथम : जिस के बिना ईमान सम्पूर्ण नहीं हो सकता, और वह अल्लाह तआला की तरफ उस पर और उसके रसूल पर ईमान रखने, तथा उस की और उसके रसूल की इताअत करने का वसीला लेना है, और यही अल्लाह तआला के इस कथन का अभिप्राय है : "हे मुसलमानो! अल्लाह तआला से डरते रहो और उसकी ओर नज़दीकी हासिल करने की कोशिश करो।" (सूरतुल माईदा : 35)

और इसी क़िस्म में अल्लाह की तरफ उस के नामों और गुणों का वसीला लेना, तथा उस की तरफ ऐसी नेकियों का वसीला लेना भी दाखिल है जिन्हें वसीला लेने वाले ने की हैं, वह इनके द्वारा अल्लाह तआला से दुआ करे।

दूसरी : अल्लाह की तरफ रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़िन्दगी में आप की दुआ का वसीला लेना, तथा मोमिनों का एक दूसरे से अपने लिये दुआ की मांग करना, यह पहली क़िस्म के अधीन है और इसकी अभिरूचि दिलाई गयी है।

तीसरी : मख्लूक़ की जाह (पद) और उनकी ज़ात का वसीला लेना, उदाहरण के तौर पर यह कहना : ऐ अल्लाह! मैं तेरी तरफ तेरे नबी की जाह के द्वारा मुतवज्जेह होता हूँ, तो इसे कुछ विद्वानों ने जाइज़ ठहराया है, किन्तु यह कमज़ोर बात है, ठीक बात यह है कि यह निश्चित रूप से हराम और निषिद्ध है; क्योंकि दुआ के अंदर अल्लाह की तरफ केवल उसके नामों और गुणों का वसीला लिया जा सकता है।

चौथी : बहुत से मुताख्खेरीन (बाद में आने वाले लोगों) के यहाँ प्रचलित तवस्सुल का मतलबः नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को पुकारना और आप से फर्याद करना, तथा मृतकों और औलिया से फर्याद करना है। अत: यह शिर्क अकबर (बड़ा शिर्क) है, क्योंकि ऐसी चीज़ के अन्दर दुआ और फर्याद करना जिस पर केवल अल्लाह तआला ही शक्ति रखता है, इबादत है। अत: उसे अल्लाह के अलावा किसी अन्य के लिए करना शिर्क अकबर है। और अल्लाह ही सर्वश्रेष्ठ जानता है।

शैख मुहम्मद सालेह अल-मुनज्जिद
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