Thu 24 Jm2 1435 - 24 April 2014
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जनाज़ा (अंतिम संस्कार) की नमाज़ का तरीक़ा

आप से अनुरोध है कि कृपया नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रमाणित जनाज़ा (अंतिम संस्कार) की नमाज़ के तरीक़े को स्पष्ट करें, क्योंकि बहुत से लोग इस से अनभिग हैं।

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आप के सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने जनाज़ा की नमाज़ का तरीक़ा वर्णन किया है, और वह यह है कि :

आदमी सब से पहले तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहे, फिर शापित शैतान से अल्लाह की पनाह मांगे (यानी अऊज़ो बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम पढ़े) और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़े, और उस के बाद सूरतुल फातिहा और कोई छोटी सूरत या कुछ आयतें पढ़े।

फिर दूसरी तकबीर कहे और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उसी तरह दुरूद पढ़े जिस तरह कि नमाज़ के अंत में आप पर दुरूद पढ़ी जाती है।

फिर तीसरी तकबीर कहे और मैयित के लिए दुआ करे, और बेहतर है कि यह दुआ पढ़े :

"अल्लाहुम्मग़-फिर् लि-हैयिना, व मैयितिना, व शाहिदिना, व गाईबिना, व सग़ीरिना, व कबीरिना, व ज़-क-रिना, व उनसाना, अल्लाहुम्मा मन अह्यैतहु मिन्ना फ-अह्येहि अलल-इस्लाम, व मन तवफ्फैतहु मिन्ना  फतवफ्फहु अलल-ईमान, अल्लाहुम्मग़-फिर लहु वर्-हम्हु, व आफिहि वअ-फो अन्हु, व अकरिम नुज़ुलहु, व-वस्सिअ मुद्खलहु, वग्सिल्हु बिलमाये, वस्सल्जे वल-बरद, व नक्क़िहि मिनल खताया कमा युनक्क़-स्सौबलु अब्यज़ो मिनद्दनस, अल्लाहुम्मा अब्दिल्हु दारन खैरन मिन दारिहि, व अह्लन खैरन मिन अह्लहि, अल्लाहुम्मा अद्खिल्हुल जन्नह, व अ-इज़्हु मिन अज़ाबिल क़ब्रि व मिन अज़ाबिन्नार, वफ्सह लहु फी क़ब्रिहि व नव्विर लहु फीह, अल्लाहुम्मा ला तहरिम्ना अजरहु वला तुज़िल्लना बादहु"

ऐ अल्लाह ! तू हमारे जीवित लोगों, हमारे मरे हुए लोगों, हमारे उपस्थित लोगों, हमारे अनुपस्थित लोगों, हमारे छोटों को, हमारे बड़ों को, हमारे पुरूषों को और हमारी महिलाओं को क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह ! तू हम में से जिस को जीवित रख उसे इस्लाम पर जीवित रख, और हम में से जिसे तू मृत्यु दे उसे ईमान पर मृत्यु दे। ऐ अल्लाह! तू उसे क्षमा कर दे, उस पर दया कर, उसे सुरक्षित रख, उसे माफ कर दे, उस के उतरने की जगह को अच्छा कर दे, और उस के प्रवेश की जगह को विस्तृत कर दे, और उसे पानी, बरफ और ओले से धुल दे, और उसे पाप (गुनाहों) से ऐसे ही  पाक साफ कर दे जिस तरह कि सफेद कपड़ा मैल से साफ किया जाता है, ऐ अल्लाह! उसे उस के घर से अच्छा घर, और उस के परिवार से बेहतर परिवार प्रदान कर, ऐ अल्लाह! उसे जन्नत में प्रवेश करा दे, और उसे क़ब्र के अज़ाब से और नरक की यातना से बचा ले, और उस के लिए उस की क़ब्र को विस्तृत कर दे और उसे उस के लिए प्रकाश से भर दे, ऐ अल्लाह! तू हमें उस के बदले (पुण्य) से वंचित न कर, और उस के बाद हमें गुमराह न कर।

ये सारी दुआयें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से प्रमाणित हैं। और अगर उस के लिए इन के अलावा दूसरी दुआयें करे तो कोई हरज की बात नहीं है, उदाहरण के तौर पर यह दुआ करना :

"अल्लाहुम्मा इन काना मोहसिनन फज़िद फी एहसानिहि, व-इन काना मुसीअन फ-तजावज़् अ़न् सैयिआतिहि, अल्लाहुमग़-फिर लहु व सब्बित्हु बिल-क़ौलिस्साबित"

ऐ अल्लाह यदि वह अच्छाई करने वाला थो तो तू उस की अच्छाई में वृद्धि कर दे, और अगर वह बुराई करने वाला था तो तू उस की बुराई से अनदेखी कर, ऐ अल्लाह! तू उसे क्षमा कर दे और दृढ़ बात के द्वारा उसे सुदृढ़ रख।

फिर चौथी तकबीर कहे और थोड़ी देर ठहरा रहे, फिर "अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह" कहते हुए अपने दाहिने ओर एक बार सलाम फेर दे।

 

समाहतुश्शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़ रहिमहुल्लाह की किताब मजूमूअ़ फतावा व मक़ालात मुतनव्विआ 13/ 141
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