शनिवार 14 मुहर्रम 1446 - 20 जुलाई 2024
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छींकने के शिष्टाचार

प्रश्न

बहुत से मुसलमान छींकने के बाद और किसी व्यक्ति के उनकी छींक का जवाब देने के बाद कहते हैं : "यरहमुना व यरहमुकुमुल्लाह'' (अल्लाह हमपर दया करे और तुमपर दया करे) या ''हदाना व हदाकुमुल्लाह'' (अल्लाह हमारा मार्गदर्शन करे और तुम्हारा मार्गदर्शन करे)।

इन शब्दों की प्रामाणिकता क्या हैॽ क्या ये नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वर्णित हैंॽ सही वर्णित शब्द क्या हैंॽ

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

छींकने वाले के अल्लाह की प्रशंसा करने और उसके अपनी छींक पर ''यरहमुकल्लाह'' कहने वाले को जवाब देने का वर्णन विभिन्न शब्दों में हुआ है।

बुखारी (हदीस संख्या : 6224) ने अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत किया है कि आपने फरमाया : "जब तुम में से कोई व्यक्ति छींके, तो वह "अल्हम्दुलिल्लाह" (हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है) कहे। और उसका भाई या उसका साथी उसे ''यरहमुकल्लाह'' (अल्लाह तुमपर दया करे) कहे। जब वह (साथी) उसे "यरहमुकल्लाह" कहे, तो वह (छींकने वाला व्यक्ति) जवाब में "यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहो बालकुम" (अल्लाह तुम्हारा मार्गदर्शन करे और तुम्हारी स्थिति को सुधार दे) कहे।

इमाम बुखारी ने ''अल-अदब अल-मुफ़रद'' (पृष्ठ : 249) में कहा : "यह हदीस इस अध्याय में वर्णित सबसे अधिक प्रमाणित हदीस है।"

अबू दाऊद (हदीस संख्या : 5033) ने अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत किया कि आपने फरमाया : जब तुम में से किसी व्यक्ति को छींक आए, तो उसे ''अल-हम्दु-लिल्लाहि अला कुल्लि हाल'' (सभी स्थितियों में हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है) कहना चाहिए। तथा उसके भाई या उसके साथी को ''यरहमुकल्लाह (अल्लाह तुम पर दया करे) कहना चाहिए। तथा वह (छींकने वाला) जवाब में कहे : ''यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहो बालकुम'' (अल्लाह तुम्हारा मार्गदर्शन करे और तुम्हारी हालत सुधारे)।''  अल्बानी ने 'सहीह अबी दाऊद' में इसे सहीह कहा है।

तथा अबू दाऊद (हदीस संख्या : 5031) और तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 2740) ने सालिम बिन उबैद रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णन किया है कि उन्होंने कहा : नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "जब तुम में से कोई व्यक्ति छींके, तो उसे ''अल-हम्दु-लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन'' (हर प्रकार की प्रशंसा सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए है), तथा उसका जवाब देने वाला उससे कहे : ''यरहमुकल्लाह'' (अल्लाह तुमपर दया करे) तथा उसे कहना चाहिए : ''यग़फिरुल्लाहु लना व लकुम'' (अल्लाह हमें और तुम्हें क्षमा कर दे)।'' इस हदीस को अल्बानी ने ''ज़ईफ़ अबी दाऊद'' में ज़ईफ़ कहा है।

लेकिन उन्होंने इसे ''सहीह अल-अदब अल-मुफ़रद'' (715) में अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु पर मौक़ूफ़ इस्नाद के साथ सहीह कहा है।

अबू जमरह से वर्णित है कि उन्होंने कहा : मैंने इब्ने अब्बास को यह कहते हुए सुना जब किसी ने उनसे ''यरहमुकल्लाह'' (अल्लाह आप पर दया करे) कहा : "आफानल्लाहु व इय्याकुम मिनन-नार, यरहमुकुमुल्लाह'' (अल्लाह हमें और आपको नरक की आग से बचाए, अल्लाह तुमपर दया करे।)” अल्बानी ने ''सहीह अल-अदब अल-मुफ़्रद'' (955) में इसे सहीह कहा है।)

मालिक ने ''मुवत्ता'' (हदीस संख्या : 1800) में नाफे' से वर्णन किया है कि जब अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा को छींक आती और उनसे ''यरहमुकल्लाह'' (अल्लाह तुम पर दया करे)  कहा जाता, तो वह कहते : "यरहमुनल्लाहु व इय्याकुम, व यग़फिरो लना व लकुम'' (अल्लाह हम पर और तुम पर दया करे, तथा वह हमें और तुम्हें क्षमा कर दे)।"

नववी ने ''शर्ह मुस्लिम'' में कहा :

"काज़ी ने कहा : विद्वानों ने अल्लाह की प्रशंसा करने और उसका जवाब देने के तरीक़े के बारे में मतभेद किया है। इसके संबंध में अलग-अलग विचार (कथन) वर्णित हैं। कुछ का कहना है कि : वह "अल-हम्दु लिल्लाह'' (हर प्रकार प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए योग्य है) कहेगा। एक कथन यह है कि : "अल-हम्दु-लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन'' (हर प्रकार की प्रशंसा सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए है) कहेगा। कुछ का कहना है कि : "अल-हम्दु-लिल्लाहि अला कुल्लि हाल'' (सभी स्थितियों में हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है) कहेगा। इब्ने जरीर ने कहा : उसके पास इन सबके बीच किसी को भी कहने का विकल्प है। और यही सही दृष्टिकोण है। जबकि वे सर्वसम्मति से इस बात पर सहमत हैं कि उसे अल्लाह की स्तुति करने का आदेश दिया गया है।

उन्होंने कहा : विद्वानों ने इस बात पर मतभेद किया है कि छींकने वाले को "यरहमुकल्लाह" कहने वाले को क्या जवाब देना चाहिए। कुछ का कहना है कि : वह "यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहो बालकुम (अल्लाह आपका मार्गदर्शन करे और आपकी स्थिति को सुधारे)" कहेगा। एक कथन यह है कि वह ''यग़फिरुल्लाहु लना व लकुम'' (अल्लाह हमें और तुम्हें क्षमा कर दे) कहेगा।" इमाम मालिक और अश-शाफेई ने कहा : उसके पास इन दोनों में से किसी को भी कहने का विकल्प है। और यही सही दृष्टिकोण है। और इन दोनों के बारे में हदीसें प्रामाणिक हैं।'' संक्षेप के साथ उद्धरण समाप्त हुआ।

सारांश यह है कि अल्लाह की "प्रशंसा" के शब्द विभिन्न तरीकों से वर्णित हैं :

- "अल्हम्दुलिल्लाह" (हर प्रकार की प्रशंसा केवल अल्लाह के लिए है)।

- ''अल-हम्दु-लिल्लाहि अला कुल्लि हाल'' (सभी स्थितियों में हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है)।

- ''अल-हम्दु-लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन'' (हर प्रकार की प्रशंसा सारे संसारों के पालनहार अल्लाह के लिए है)

तथा छींकने वाले को जवाब देने के शब्द – भी- विभिन्न रूपों में वर्णित हैं :

- "यहदीकुमुल्लाह व युस्लिहो बालकुम" (अल्लाह तुम्हारा मार्गदर्शन करे और तुम्हारी स्थिति को सुधार दे)

- ''यग़फिरुल्लाहु लना व लकुम'' (अल्लाह हमें और तुम्हें क्षमा कर दे)

- "आफानल्लाह व इय्याकुम मिनन-नार, यरहमुकुमुल्लाह'' (अल्लाह हमें और आपको नरक की आग से बचाए, अल्लाह तुमपर दया करे।)

- "यरहमुनल्लाहु व इय्याकुम, व यग़फिरो लना व लकुम'' (अल्लाह हमपर और तुमपर दया करे, तथा वह हमें और तुम्हें क्षमा कर दे)।"

ये सभी सही और प्रमाणित हैं और मुसलमान इनमें से जो चाहे चुन सकता है।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर