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आभूषण के ज़कात, उसके निकालने के तरीक़े और उसे निकालने वाले से संबंधित प्रश्न

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प्रकाशन की तिथि : 22-07-2011

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प्रश्न

दिसंबर 2005 ई. में मेरी शादी हुई थी, मुझे मेरे माता पिता और मेरे पति के घर वालों ने एक बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण दिए थे जिन पर ज़कात वाजिब होती है। जब मैं कनाडा आई तो अपने साथ कुछ आभूषण लेकर आई थी और उसका अधिकांश भाग स्वदेश में अपने घर पर ही छोड़ दिया था। मेरे पिता मेरे शेष आभूषण का उसके खरीदने के समय से ही ज़कात देते हैं। अब मेरा प्रश्न यह है कि: क्या मेरे पिता के लिए मेरे ज़कात का भुगतान करना जाइज़ है या मेरे पति पर अनिवार्य है कि मेरे ज़कात का भुगतान करें ; क्योंकि मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है ॽ
दिसंबर 2005 ई. में मेरी शादी हुई थी, मुझे मेरे माता पिता और मेरे पति के घर वालों ने एक बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण दिए थे जिन पर ज़कात वाजिब होती है। जब मैं कनाडा आई तो अपने साथ कुछ आभूषण लेकर आई थी और उसका अधिकांश भाग स्वदेश में अपने घर पर ही छोड़ दिया था। मेरे पिता मेरे शेष आभूषण का उसके खरीदने के समय से ही ज़कात देते हैं। अब मेरा प्रश्न यह है कि: क्या मेरे पिता के लिए मेरे ज़कात का भुगतान करना जाइज़ है या मेरे पति पर अनिवार्य है कि मेरे ज़कात का भुगतान करें ; क्योंकि मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है ॽ
मैं ने अपने कुछ आभूषण जिन्हें मैं कभी-कभार पहना करती थी बेच दिया था, किंतु मैं ने उसका ज़कात भुगतान नहीं किया था, तो अब मैं उस की ज़कात के प्रति क्या करूँ ॽ जबकि ज्ञात रहे कि मैं ने उसे 200 डॉलर में बेचा था।
चूँकि मेरे पति एक छात्र हैं इसलिए उनके पास भी कोई आय का साधन नहीं है, तो क्या मेरे लिए जाइज़ है कि मैं अपने सभी ज़कात का भुगतान उनके कोई नोकरी पाने के बाद करूँ, अथवा मेरे ऊपर अनिवार्य यह है कि मैं अपने ज़कात का भुगतान अपनी आय से करूँ (जबकि मेरे पास कोई आय का साधन नहीं है क्योंकि मैं गृहस्थी महिला हूँ )ॽ
इस समय रमज़ान का महीना बीत चुका है और मैं ने ज़कात का भुगतान नहीं किया है, तो क्या मेरे ऊपर अनिवार्य था कि मैं उसका भुगतान रमज़ान ही में कर देती ॽ
और चूँकि मैं ने उसका भुगतान नहीं किया है तो क्या मेरे लिए अब उसका भुगतान करना जाइज़ है ॽ
कृपया विस्तार पूर्वक ज़कात का हिसाब करने की विधि स्पष्ट करें।

उत्तर का पाठ

जैसाकि हम उल्लेख कर चुके हैं कि संपत्ति के मालिक पर उसकी ज़कात निकालना अनिवार्य है,और उसके अलावा किसी दूसरे के लिए अनुदान करते हुए उस का भुगतान करना जाइज़ है। अगर आप के पास सोना है परंतु आप के पास पैसा (केश) नहीं है,और आप के पति या आप के पिता ने अनुदान करते हुए आप की तरफ से ज़कात नहीं निकाली है तो आप उसी सोने से ज़कात निकालेंगी,या ज़कात के लिए उस का कुछ हिस्सा बेच देंगी।

चौथा :

रमज़ान के महीने में ज़कात निकालना अनिवार्य नहीं है,बल्कि ज़कात साल पूरा होने पर अनिवार्य होती है।यदि आप रमज़ान के महीने में सोने का मालिक बनी हैं तो ज़कात का साल रमज़ान के महीने में पूरा होगा,और यदि आप मुहर्रम के महीने में उस का मालिक बनी हैं तो ज़कात मुहर्रम के महीने में अनिवार्य होगी।

और यदि मान लिया जाए कि आप की ज़कात का साल रमज़ान के महीने में पूरा होता है,किंतु आप ने उस के निकालने में विलंब कर दिया,तो आप पर उसे इस समय निकालना अनिवार्य है,क्योंकि ज़कात तुरंत अनिवार्य है और उसे उस के समय से विलंब करना जाइज़ नहीं है।

ज़कात निकालने का तरीक़ा:

यह है कि आप साल पूरा होने पर सोने का मूल्य आंकन करेंऔर उस मूल्य से अढ़ाई प्रतिशत (2.5%)ज़कात निकाल दें,और वह इस प्रकार कि आप देखें कि आप का सोना बाज़ार में यदि आप उसे बेचना चाहें तो कितने में बिकेगा,और इस में सोने की मात्रा,केराटऔर उसका प्रयोग किया हुआ सोना होने को देखा जायेगा।यदि आप के पास जो सोना है उस का मूल्य उदाहरण के तौर पर 100 हज़ार (एक लाख) के बराबर है,तो आप उस में से अढ़ाई प्रतिशत (2.5%)अर्थात् 2,500 (पचीस सौ)ज़कात निकालेंगी।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर

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