सोमवार 9 शव्वाल 1441 - 1 जून 2020
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पवित्रता में वसवसा और उससे निपटने का तरीक़ा

प्रश्न

मैं वसवसों के साथ संघर्ष करती हूँ। मैं अक्सर बहुत उलझन में पड़ जाती हूँ कि मेरा वुज़ू टूट गया है या नहीं। और फिर मैं अपने आप से इसके बारे में बहस करती हूँ। मैं अपने पेट में होने वाली कुछ आवाज़ों के कारण बहुत उलझन में पड़ जाती हूँ, जो मैं जानती हूँ कि उनका कोई महत्व नहीं है। लेकिन उनमें से कुछ गुदा में होती हैं, और मैंने अभी तक उनसे छुटकारा नहीं पाया है, तो क्या इसमें कोई समस्या नहीं है या कि उससे वुज़ू टूट जाता हैॽ

लेकिन हमेशा मेरे लिए वुज़ू करना आसान नहीं है, विशेष रूप से यदि मैं विश्वविद्यालय में या घर के बाहर हूँ, क्योंकि इसमें एक लंबा समय लगता है, चुनांचे मुझे अपना हिजाब और मोज़ा उतारना पड़ता है और इसलिए कि यह मेरी उपासना के प्रवाह को बाधित कर देता है। निश्चित रूप से, मेरे लिए वुज़ू करने में कोई रुकावट नहीं है यदि वह वास्तव में टूट गया है। लेकिन मैं वसवसे (वहम) से तंग आ गई हूँ, मुझे लगता है कि अगर वह टूट गया तो मुझे इसे फिर से दोहराना होगा,  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन अगर मैं नमाज़ को जारी रखूँ, तो उस समय क्या होगा अगर मेरी उपासना स्वीकार नहीं की गई; क्योंकि मुझे लगता है कि मैं वुज़ू से हूँ, लेकिन वास्तव में मैं ऐसा नहीं होती। मैं इस बारे में बहुत अधिक चिंतित हूँ की अल्लाह मेरी तौबा (पश्चाताप) और मेरी उपासना स्वीकार करेगा है या नहीं, उदाहरण के तौर पर मुझे हाल ही में वुज़ू में होने वाली अपनी एक त्रुटि का पता चला कि मेरे ऊपर इंडेक्स उंगली (तर्जनी) से केवल अपने कान की सूराख को साफ करना ज़रूरी नहीं है, बल्कि मुझे अंदर से पूरे कान को साफ करना ज़रूरी है। फिर मैंने इसे ठीक कर लिया।

लेकिन मैं भयभीत और चिंतित हूँ कि इस गलती के कारण पूर्व में मेरा वुज़ू और मेरी नमाज़ कदापि स्वीकार नहीं की जाएगी। मुझे लगता है कि मैं एक प्रकार की मनोग्रसित-बाध्यता विकार से पीड़ित हूँ, और कभी-कभी नमाज़ के दौरान मेरे मन में विचित्र विचार और मेरे सामने अजीब छवियाँ आती हैं, जिन्हें मैं सोचना नहीं चाहती। मुझे लगता है कि ये मेरी नमाज़ को अमान्य कर देंगी। तो निश्चित तौर पर अशुद्धता क्या हैॽ धूलॽ बालॽ मल की गंधॽ

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है।

सर्व प्रथम :

आप के लिए सलाह यह है कि : आप नमाज़ में या उसके अलावा में संदेहों और शंकाओ की ओर ध्यान न दें, शक को काट दें और उसके बारे में संकोच न करें और न ही अफसोस करें, क्योंकि आप ठीक और सही कह रही हैं, बल्कि आप पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश का पालन कर रही हैं। क्योंकि जब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इस बात की शिकायत की गई कि आदमी के मन में यह कल्पना आती है कि वह नमाज़ में कोई चीज़ पाता (महसूस करता) है, तो आप ने फरमायाः “वह न पलटे (नमाज़ न छोड़े) यहाँ तक कि आवाज़ सुन ले या बदबू पाए।” बुखारी (हदीस संख्या : 137) और मुस्लिम (हदीस संख्या : 361)।

इससे अभिप्राय यह है कि : यहाँ तक कि वह सुनिश्चित हो जाए कि उसका वुज़ू टूट गया है।

अतः संदेहों और कल्पनाओं का कोई एतिबार नहीं है, इसलिए आप नमाज़ से न पलटें यहाँ तक कि आपको वुज़ू के टूटने का यक़ीन हो जाए। यह अल्लाह और उसके पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का आदेश है, और आपकी नमाज़ सही है, भले ही वास्तव में वुज़ू टूट गया हो।

लेकिन .. यदि मुसलमान को यक़ीन हो जाए कि उसने बिना वुज़ू के नमाज़ पढ़ी है, और उसका समय बाक़ी था, तो वह उस नमाज़ को दोहराएगा। लेकिन जो उसके बारे में निश्चितता तक न पहुंचे, तो उसकी नमाज़ सही है और उसके ऊपर कोई आपत्ति नहीं है। तथा प्रश्न संख्याः (131496), (148426) का उत्तर भी देखें।

दूसरा:

जहाँ तक दोनों कानों के मसह करने का संबंध है तो उसके अनिवार्य और मुस्तहब होने के बारे में विद्वानों के बीच मतभेद है। विद्वानों की बहुमत का मानना यह है कि वह मुस्तहब (वांछनीय) है अनिवार्य नहीं है, और हनाबिला का मत यह है कि वह वाजिब है। जबकि इमाम अहमद रहिमहुल्लाह से यह उल्लेख किया गया है कि जिसने दोनों कानों का मसह छोड़ दिया, उसका वुज़ू पर्याप्त है।

इब्ने क़ुदामा रहिमहुल्लाह “अल-मुग्नी” (1/97) में फरमाते हैं किः खल्लाल ने कहा : सभी ने अबू अब्दुल्लाह (अर्थात इमाम अहमद) से उस व्यक्ति के बारे में जिसने जान-बूझकर या भूलकर (दोनों कानों का) मसह छोड़ दिया, यह उल्लेख किया है कि यह (वुज़ू) उसके लिए पर्याप्त है।” अंत हुआ।

अतः जिसने दोनों कानों का मसह छोड़ दिया, या जिसने उनके कुछ हिस्सा का मसह किया तो जमहूर उलमा के निकट उसका वुज़ू सही है, और यही राजेह है, इसलिए आप पिछली नमाज़ों की चिंता न करें; क्योंकि वे इन शा अल्लाह सही हैं।

तथा प्रश्न संख्याः (115246) का उत्तर देखें।

तथा आप वसवसे (वहम) को दूर करने का प्रयास करें और उसकी ओर ध्यान न दें और न तो उनके अनुसार काम करें, साथ ही साथ अल्लाह सर्वशक्तिमान से मदद मांगें, उससे दुआ करें और शापित शैतान से उसकी शरण लें।

फिर भी यदि आपसे वसवसे दूर न हों और उनका मामला आपके लिए कठिन हो जाएः तो हम आपको किसी भरोसेमंद मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह दते हैं, क्योंकि मनोग्रसित-बाध्यता विकार प्रसिद्ध बीमारियों में से है जिसके लिए एक विश्वस्त विशेषज्ञ के पास चिकित्सा उपचार की ज़रूरत होती है, चाहे वह दवाओं के द्वारा हो या व्यवहार थेरेपी सत्र के द्वारा।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर

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