शनिवार 8 सफ़र 1442 - 26 सितंबर 2020
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ब्राउज़रों की कुकीज़ का ऑनलाइन मार्केटिंग (ई-मार्केटिंग) में उपयोग करना

प्रश्न

मेरे ब्लॉग पर आने वाले उपभोक्ता की आकांक्षाओं के अनुसार मेरी साइट पर उत्पादों के विज्ञापन रखने का क्या हुक्म हैॽ दूसरे शब्दों में, यदि कोई आगंतुक, उदाहरण के लिए, फिल्मों की खोज कर हा है, तो इससे पहले कि वह ब्राउज़र मेरे ब्लॉग में प्रवेश करे, उसकी कुकीज़ रिकॉर्ड की जाएंगी, फिर जब वह मेरी निजी वेबसाइट पर जाएगा, तो उसकी ज़रूरतों के हिसाब से विज्ञापन भेजने के लिए उन कुकीज़ का उपयोग किया जाएगा। तो इस धन का क्या हुक्म हैॽ

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

सर्व प्रथम :

इस बात का पहले उल्लेख किया जा चुका है कि विज्ञापन सॉफ्टवेयर का उपयोग करना जायज़ है यदि वह विज्ञापन उन चीजों से मुक्त है जो इस्लामी शरीयत के अनुसार निषिद्ध हैं। उसके जायज़ होने के नियमों का उल्लेख प्रश्न संख्या : (249126) के उत्तर में किया गया है।

फिल्मों के लिए विज्ञापन देना जैसाकि आपने संकेत किया है; बिना किसी संदेह के निषिद्ध और वर्जित है; क्योंकि फिल्में कई हराम चीजें पर आधारित होती हैं, जैसे कि इख़्तिलात (पुरूष एवं स्त्री का मिश्रण), संगीत, श्रंगार प्रदर्शन, साथ ही अपराध तथा धार्मिक और नैतिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना।

अतः ऐसी फिल्मों का प्रचार और विज्ञापन करने वाला मुसलमान गंभीर खतरे में है; उसे खुद को और अपनी धार्मिक प्रतिबद्धता को बचाना चाहिए।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : “जो कोई भी दूसरों को मार्गदर्शन (नेकी) की तरफ बुलाए, उसके लिए उसका पालन करने वालों के समान अज्र (सवाब) होगा, जबकि इससे उनके अज्र में कोई कमी नहीं होगी। तथा जो कोई दूसरों को गुमराही (बुराई) की ओर बुलाए, उसके ऊपर उसका पालन करने वालों के समान पाप होगा, जबकि इससे उनके पाप में कोई कमी नहीं होगी।” इसे मुस्लिम (हदीस संख्याः 2674) ने रिवायत किया है।

मुसलमान को हराम विज्ञापनों के मुद्दे को हल्का नहीं समझना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि जिस चीज़ को वह तुच्छ और मामूली समझ रहा है, उसी में उसका विनाश हो और उसका धर्म भ्रष्ट हो जाए। हम अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि हमें इससे सुरक्षित रखे।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "मनुष्य अल्लाह की प्रसन्नता की एक बात कहता है, जिसे वह कोई महत्व नहीं देता, परंतु उसके कारण अल्लाह उसके पद को कई गुना बढ़ा देता है। तथा आदमी अल्लाह के क्रोध का कोई शब्द बोलता है, जिसे वह कोई महत्व नहीं देता, पर उसके कारण वह नरक में जा गिरता है।" इसे बुखारी (हदीस संख्या : 6478) ने रिवायत किया है।

दूसरी बात :

इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच यह बात सर्व परिचित है कि कुकी फाइलें उपयोगकर्ता की प्रावेसियों में से हैं; और यह सर्व ज्ञात है कि लोग इस बात को पसंद नहीं करते हैं कि वेबसाइट उनकी यात्राओं पर ध्यान दें और उनकी पिछली सर्फिंग के बारे में जानकारी रखें। इसलिए वेबसाइटों का इन फ़ाइलों का उपयोग करना उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता का उल्लंघन है और उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना उन फ़ाइलों तक पहुँच बनाना जायज़ नहीं है।

इसके आधार पर, इन फ़ाइलों का उपयोग करने के लिए इच्छुक पेजों और वेबसाइटों के लिए आवश्यक है कि ब्राउज़िंग करने वालों को इस बात की जानकारी दें; इस प्रकार कि इससे संबंधित स्पष्ट तरीके से एक चेतावनी प्रकट की जाए जिसे उपयोगकर्ता आसानी से देख सके; और वह इस बात से अवगत रहे।

निष्कर्ष यह कि :

आपके अपनी निजी वेबसाइट पर विज्ञापन लगाने के बारे में कोई आपत्ति की बात नहीं है, इस शर्त पर कि वे हराम चीज़ों से तथा हराम चीज़ों को बढ़ावा देने से मुक्त हों।

तथा इस शर्त पर कि आप आगंतुक (ब्राउज़र) को यह बताएं कि वेबसाइट अपने सिस्टम पर मौजद कुकीज़ के आधार पर, प्रत्येक आगंतुक को उसके उपयुक्त विज्ञापन दिखाएगी।

और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर