दुनिया और आख़िरत में हाफ़िज़े-क़ुरआन की विशेषताएँ

प्रश्न 14035

वे कौन-कौन से लाभ हैं जो एक हाफ़िज़े-क़ुरआन को इस जीवन में और आख़िरत (परलोक) में प्राप्त होते हैं? उसके रिश्तेदारों और उसकी संतान को क्या लाभ मिलेगा? तथा उसके पहले और बाद की पीढ़ियों का क्या होगा?

उत्तर का सारांश

हाफ़िज़े-क़ुरआन को दुनिया और आख़िरत में जो विशेषताएँ प्राप्त होती हैं, उनमें से कुछ ये हैं : • उसे नमाज़ पढ़ाने में दूसरों पर प्राथमिकता दी जाती है, अर्थात् वह लोगों का इमाम होता है। • मृत्यु के बाद जब उसे क़ब्र में रखा जाता है, तो क़िबला (मक्का में स्थित काबा) की दिशा में उसका स्थान दूसरों से आगे होता है। • यदि वह नेतृत्व और प्रशासन की क्षमता रखता हो, तो उसे नेतृत्व की ज़िम्मेदारी सौंपने में प्राथमिकता दी जाती है। • आख़िरत में उसका वास्तविक दर्जा उस अंतिम आयत के अनुसार होगा जिसे उसने याद रखा था। • वह जन्नत में फ़रिश्तों के साथ उनके स्थानों में उनका साथी बनकर रहेगा। • उसे सम्मान का मुकुट और सम्मान का वस्त्र पहनाया जाएगा।

उत्तर का पाठ

प्रथमः

क़ुरआन को कंठस्थ (हिफ़्ज़) करना एक इबादत है, जिसे करने वाला उसके द्वारा अल्लाह की प्रसन्नता और आख़िरत में पुण्य चाहता है। यदि उसकी नीयत यह न हो, तो उसे कोई सवाब नहीं मिलेगा; बल्कि उसे यह इबादत अल्लाह के अलावा किसी और के लिए करने पर अज़ाब दिया जाएगा।

हाफ़िज़े-क़ुरआन के लिए आवश्यक है कि वह क़ुरआन को याद करने का उद्देश्य सांसारिक लाभ प्राप्त करना न बनाए, क्योंकि क़ुरआन का हिफ़्ज़ करना कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है, जिससे दुनिया में लेन-देन किया जाए; बल्कि यह एक इबादत है, जिसे वह अपने धन्य और महान पालनहार के समक्ष पेश करता है।

दुनिया में हाफ़िज़े-क़ुरआन की विशेषताएँ

अल्लाह तआ़ला ने हाफ़िज़े-क़ुरआन को दुनिया और आख़िरत में अनेक विशेषताएं प्रदान की हैं। दुनिया में उसे निम्नलिखित सम्मान और वरीयताएँ प्राप्त होती हैं :

* नमाज़ का नेतृत्व करने (इमामत) में उसे दूसरों पर वरीयता दी जाती है।

अबू मसऊद अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “लोगों की इमामत वह व्यक्ति करे जो अल्लाह की किताब को सबसे ज़्यादा पढ़ने वाला हो। यदि वे पढ़ने में बराबर हों, तो वह (इमामत) करे जो सुन्नत का सबसे ज़्यादा जानकार हो। यदि वे सुन्नत के ज्ञान में बराबर हों, तो वह करे जो उनमें सबसे पहले हिजरत करने वाला हो। अगर वे हिजरत में बराबर हों, तो वह करे जो इस्लाम का सबसे ज़्यादा जानकार हो। (और याद रहे) किसी भी आदमी को किसी दूसरे आदमी के अधिकार क्षेत्र में इमामत नहीं करनी चाहिए, न ही उसकी इजाज़त के बिना उसके घर में, उसके ख़ास स्थान पर बैठना चाहिए।" इसे मुस्लिम (हदीस संख्या : 673) ने रिवायत की है।

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं कि: “जब प्रारंभिक मुहाजिर लोग, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हिजरत करने से पहले ही, क़ुबा क्षेत्र में क़ुस्बा नामी स्थान पर पहुँचे, तो उनकी नमाज़ की इमामत अबू हुज़ैफ़ा के ग़ुलाम सालिम रज़ियल्लाहु अन्हु किया करते थे। आप उनमें सब से अधिक क़ुरआन जानते थे।” (सहीह बुख़ारी : 660)

* मृत्यु के बाद, यदि एक ही क़ब्र में कई लोगों को दफ़न करना पड़े, तो हाफ़िज़े-क़ुरआन को क़ब्र में क़िबला की ओर दूसरों से पहले रखा जाएगा।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : “अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उहुद युद्ध के शहीदों में से दो लोगों को एक ही वस्त्र में इकट्ठा करते और फिर पूछते : "इनमें से किसने क़ुरआन ज़्यादा कंठस्थ किया है?" जब उनमें से किसी एक की ओर इशारा किया जाता, तो आप उसे क़ब्र (लहद) में पहले रखते और फ़रमाते : “मैं क़ियामत के दिन इन लोगों पर गवाह बनूँगा।” आपने उन्हें उनके खून में ही दफ़न करने का हुक्म दिया; न उन्हें नहलाया गया और न उनके जनाज़ा की नमाज़ पढ़ी गई।” इसे बुख़ारी (हदीस संख्या : 1278) ने रिवायत किया है।

* यदि वह प्रशासन या नेतृत्व की ज़िम्मेदारी संभालने में सक्षम है, तो उसे उसमें प्राथमिकता दी जाएगी।

आमिर बिन वासिला से वर्णित है कि : “नाफ़े़ बिन अब्दुल हारिस की मुलाक़ात उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से ‘उसफ़ान’ नामक स्थान पर हुई, और उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने उन्हें मक्का का गवर्नर नियुक्त किया था। उन्होंने पूछा : आपने घाटी के लोगों पर किसे नियुक्त किया है?  नाफ़े़ ने कहा : इब्ने अबज़ा को। उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने पूछा : इब्ने अबज़ा कौन है? नाफ़े़ ने कहा : हमारे एक आज़ाद किए हुए ग़ुलाम हैं। उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : तो आपने एक मुक्त ग़ुलाम को लोगों पर नियुक्त कर दिया? नाफ़े़ ने उत्तर दिया : वह अल्लाह की किताब का क़ारी (पाठक) है, और विरासत के नियमों का ज्ञाता है। इसपर उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया : निःसंदेह तुम्हारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “अल्लाह इस किताब (क़ुरआन) के द्वारा कुछ लोगों को ऊँचा करता है और कुछ को इसके द्वारा नीचा करता है।” इसे मुस्लिम (हदीस संख्या : 817) ने रिवायत किया है।

आख़िरत में हाफ़िज़े-क़ुरआन की विशेषताएँ

आख़िरत में:

  • हाफ़िज़े-क़ुरआन का दर्जा उस आख़िरी आयत तक होगा जो वह याद रखता था।

अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़ुरआन याद करने वाले से कहा जाएगा कि पढ़ते जाओ और चढ़ते जाओ। साथ ही तुम उसी तरह ठहर-ठहर कर पढ़ो, जिस तरह तुम दुनिया में ठहर-ठहर कर पढ़ा करते थे। तुम्हारा गंतव्य वहीं होगा जहाँ तुम्हारी अंतिम आयत का पाठ समाप्त होगा।” इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 2914) ने रिवायत किया और कहा : यह एक हसन, सहीह हदीस है। तथा अलबानी ने सहीह अत-तिरमिज़ी (हदीस संख्या : 2329) में हसन सहीह कहा है; अबू दाऊद (हदीस संख्या : 1464)

यहाँ "पढ़ना" से अभिप्राय याद करना है।

  • वह फ़रिश्तों के संग, उनके स्थानों में उनका साथी होगा।

आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा कहती हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है और उसे याद रखता है, वह सम्मानित और नेक फ़रिश्तों के साथ होगा, तथा जो व्यक्ति क़ुरआन पढ़ता है और उस पर मेहनत करता है और उसे क़ुरआन पढ़ने में कठिनाई होती है, उसके लिए दोहरा सवाब है।” इसे बुख़ारी (हदीस संख्या : 4653) और मुस्लिम (हदीस संख्या : 798) ने रिवायत किया है।

* उसे सम्मान का ताज और सम्मान का वस्त्र पहनाया जाएगा।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “क़ियामत के दिन क़ुरआन आएगा और कहेगा : ऐ मेरे रब! इसे सुसज्जित कर, तो उसे सम्मान का ताज पहनाया जाएगा। फिर कहेगा : ऐ मेरे रब! इसे और दे, तो उसे इज़्ज़त की पोशाक पहनाई जाएगी। फिर वह कहेगा : ऐ मेरे रब! इससे प्रसन्न हो जा, तो अल्लाह उससे राज़ी हो जाएगा। फिर उससे कहा जाएगा : पढ़ो और ऊँचाई पर चढ़ते जाओ, और हर आयत के बदले तुम्हें एक नेकी दी जाएगी।”  इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 2915) ने रिवायत किया है और कहा है कि यह हदीस हसन सहीह है, और शैख़ अल्बानी ने सहीह अत-तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 2328) में इसे हसन कहा है।

* क़ुरआन उसके हक़ में उसके रब के पास सिफ़ारिश करेगा।

अबू उमामा बाहिली रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना : “क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़ियामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा। दो चमकती हुई सूरतें:  सूरतुल-बक़रह तथा सूरत आल-इमरान पढ़ो; क्योंकि दोनों सूरतें क़ियामत के दिन इस प्रकार आएँगी, जैसे दो बादल हों, या दो सायबान हों, या पंक्तिबद्ध चिड़ियों के दो झुंड हों। दोनों सूरतें अपने पढ़ने वालों की ओर से बहस करेंगी। सूरत बक़रा पढ़ो; क्योंकि इसे लेना बरकत है, इसे छोड़ना पछतावे का कारण है और जादूगर इसका मुक़ाबला नहीं कर सकते।” मुआविया कहते हैं कि मुझे अवगत कराया गया है कि हदीस के शब्द “अल-बतलह” का अर्थ जादूगर है। (सहीह मुस्लिम : 804; सहीह बुख़ारी में भी मुअल्लक़ तौर पर वर्णित है)

हाफ़िज़े-क़ुरआन की प्रतिष्ठा और अपने परिवार व प्रियजनों के लिए उसकी सिफ़ारिश

जहाँ तक हाफ़िज़े-क़ुरआन के रिश्तेदारों और संतानों का संबंध है, तो उसके माता-पिता के बारे में प्रमाण वर्णित है कि क़ियामत के दिन उन्हें ऐसे दो वस्त्र पहनाए जाएँगे जिनकी क़ीमत के बराबर पूरी दुनिया और उसकी तमाम चीज़ें भी नहीं होंगी। उन्हें यह सम्मान इस कारण से मिलेगा कि उन्होंने अपने बच्चे की देखभाल की और उसे क़ुरआन सिखाया। यहाँ तक कि अगर वे स्वयं अज्ञानी   हों, तब भी अल्लाह उन्हें उनके बेटे की वजह से सम्मानित करेगा। लेकिन जिन लोगों ने अपने बच्चों को क़ुरआन से रोका, उन्हें उसकी तालीम से वंचित रखा या इस मार्ग में रुकावट बने, तो वे इस महान नेमत और सम्मान से वंचित रहेंगे।

* अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि उन्होने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “क़ुरआन क़ियामत के दिन एक थके हुए व्यक्ति (जिसका रंग बीमारी और यात्रा के कारण बदल गया हो) के रूप में आएगा और अपने साथी (हाफ़िज़े-क़ुरआन) से कहेगा : क्या तुम मुझे पहचानते हो? मैं वही हूँ जो तुम्हारी रातों की नींदें उड़ाया करता था और तुम्हें गर्म दोपहरों में प्यासा रखता था। हर व्यापारी अपने व्यापार के पीछे है, लेकिन आज मैं तुम्हारे लिए हर व्यापारी के पीछे हूँ। फिर उसे बादशाही (मुल्क) उसके दाहिने हाथ में दी जाएगी, और अमर जीवन उसके बाएँ हाथ में। उसके सिर पर 'वक़ार' (सम्मान) का ताज रखा जाएगा, और उसके माता-पिता को ऐसे दो वस्त्र पहनाए जाएँगे जिनकी क़ीमत के बराबर पूरी दुनिया और जो कुछ उसमें है, वह भी नहीं हो सकती। फिर वे दोनों कहेंगे: ऐ हमारे रब! हमें यह सब कैसे मिला? तो कहा जाएगा: तुम्हारा अपने बेटे को क़ुरआन सिखाने की वजह से।” (इसे तबरानी ने अपनी क़िताब "अल-मो’जम अल-अवसत" (6/51) में रिवायत किया है।)

* बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: “जिस व्यक्ति ने क़ुरआन पढ़ा, उसे सीखा और उस पर अमल किया, क़ियामत के दिन उसके माता-पिता को नूर (रौशनी) का ताज पहनाया जाएगा, जिसका प्रकाश सूरज के प्रकाश के समान होगा, और उसके माता-पिता ऐसे दो वस्त्र पहनाए जाएँगे जिनकी क़ीमत दुनिया से भी बढ़कर होगी। वे दोनों कहेंगे : हमें यह क्यों पहनाया गया? तो कहा जाएगा : ‘क्योंकि तुम्हारे बच्चे ने कुरआन सीखा है।”

इसे हाकिम ने अपनी किताब "अल-मुस्तदरक" (1/756) में रिवायत किया है।

ये दोनों रिवायतें मिलकर एक-दूसरे को मज़बूत करती हैं। देखिए : सि‍लसिला सहीहा (हदीस नंबर : 2829)

और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

संदर्भ

कर्मों के गुण (विशेषतायें)

स्रोत

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