पत्नी और उसके पति के घरवालों के बीच समस्याओं के कारण और उनके समाधान

प्रश्न: 120672

मुझे अपने निजी मामलों में अपने पति के घरवालों के हस्तक्षेप से कैसे निपटना चाहिए? क्या उन्हें जवाब देना बुरा व्यवहार माना जाएगा? क्योंकि वे ऐसे लोगों में से हैं जो चुप रहने पर और ज़्यादा बढ़ जाते हैं। अल्लाह ही जानता है कि मैंने उनके बहुत-से हस्तक्षेपों और उत्तेजक तरीकों को अनदेखा किया है, लेकिन ऐसा लगता है कि उन्हें अनदेखा करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उनके सवाल बहुत ज़्यादा हो गए हैं। अल्लाह की क़सम! – शैख - मेरे पति की एक बहन बहुविवाह के बारे में बात कर रही थी, और मेरे पति मेरे बगल में बैठे थे। उसने कहा : "उनके दूसरी शादी करने में क्या बुराई है?" में वहीं बैठी थी, परंतु उसने मेरी भावनाओं की परवाह नहीं की। उस समय, मैं अपनी शादी की शुरुआत में उनसे मिलने गई थी। अल्लाह की क़सम, उन्हें मेरे अच्छे-बुरे का पता नहीं था, फिर भी उन्होंने ऐसी बातें कहीं। जब कभी मेरे पति मेरे किसी काम की तारीफ करते हैं — जो उनके सामने बहुत कम होता है — तो वह कहती हैं : "यह तो उसका कर्तव्य है।" यह सब मेरे सामने होता है, और अल्लाह की कसम, मैंने एक शब्द भी नहीं कहा। क्योंकि मुझे और मेरी बहनों को यह संस्कार दिया गया है कि हम ऐसे लोगों को जवाब न दें, जो हमारे साथ गलत करते हैं। मैं शायद ही कभी शालीनता से जवाब दे पाती हूँ, और तब भी, मुझे आत्मग्लानि होती है। मेरे पति इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि मैंने उनकी उपेक्षा नहीं की है या किसी भी तरह से लापरवाही नहीं बरती है। उनके बच्चे भी वही सवाल पूछते हैं, इतना कि मुझे उनके घर जाने में डर लगता है। जब मैं उनसे मिलने जाती हूँ, तो मैं यह दिखाने की कोशिश नहीं करती कि मैं परेशान हूँ या वे मुझे चोट पहुँचाते हैं या शर्मिंदा करते हैं। मैं सामान्य व्यवहार करती हूँ, लेकिन अंदर ही अंदर उबल रही हूँ। खासकर जब से मेरे पति ने कहा है : "अगर तुम किसी को भी मेरे परिवार के व्यवहार के बारे में बताओगी, तो मैं तुमसे अल्लाह के सामने उनके बारे में सवाल करुँगा।" मेरे सवाल ये हैं : मैंने पहले ही अपनी बहन और अपने भाई की पत्नी को उनके कुछ बर्ताव और मेरे साथ उनके व्यवहार के बारे में बता दिया है। वे — अल्लाह जानता है — समझदार हैं, और वे मुझसे कहती हैं : "जिन चीज़ों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, उनका जवाब शालीनता से दो, और जिन चीज़ों को तुम नज़रअंदाज़ कर सकती हो, उन्हें नज़रअंदाज़ करो।" क्या मैं इसपर गुनाहगार हूँगी? क्या मेरे पति को यह हक़ है कि वे मुझे किसी से भी अपने व्यवहार के बारे में बात न करने की चेतावनी दें, जबकि हर किसी को अपनी समस्याओं और चिंताओं के बारे में किसी न किसी से खुलकर बात करनी ही पड़ती है? मैं इतनी दबी हुई महसूस करती हूँ कि अब मैं उनसे मिलना या उनकी आवाज़ सुनना नहीं चाहती। मैं बहुत ज़्यादा परेशान हूँ, यहाँ तक कि अपने पति के साथ भी, और मैं चिड़चिड़ी हो गई हूँ। मुझे उनके साथ रूखा व्यवहार करना पसंद नहीं है, और मैं समझती हूँ कि वे नहीं चाहते कि उनके परिवार की छवि किसी के सामने धूमिल हो। लेकिन मुझे उन लोगों से सलाह लेने का अधिकार है जो मुझसे उम्र में बड़े और ज़्यादा अनुभवी हैं। क्या मुझे किसी ऐसे व्यक्ति से सलाह लेने और अपनी चिंताएं बताने की इजाज़त है जिस पर मैं भरोसा करती हूँ, या मुझे इस दमन और भावनात्मक तनाव के चक्र में फँसा रहना चाहिए? मैं अपने पति और उनके परिवार के साथ इस तरह कैसे पेश आ सकती हूँ जिससे अल्लाह प्रसन्न हो, बिना अपने अधिकारों का हनन किए या हमारे रिश्ते की सीमाओं को लांघे?

क्योंकि बहुत-से घर तबाह हो जाते हैं जब एक साथी दूसरे के साथ अपने संबंधों में सीमाएँ लांघ जाता है और कोई सीमाएँ तय नहीं होतीं। क्या समस्याओं से बचने के लिए उनके घरवालों के पास रहने से इनकार करना मेरे लिए जायज़ है? अल्लाह आपको जन्नत प्रदान करे।

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा एवं गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है, तथा दुरूद व सलाम की वर्षा हो अल्लाह के रसूल पर। इसके बाद :

सबसे पहले :

एक पत्नी और उसके पति के परिवार के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याएँ बहुत हैं। लेकिन किसी भी समस्या को हल करने के लिए, सबसे पहले उसके कारणों की जाँच करनी चाहिए :

  1. ये कारण पति के घरवालों के स्वभाव और उनकी प्रकृति से उत्पन्न हो सकते हैं। कुछ लोगों ने बुराई को अपनी आदत बना लिया है; वे छोटी-मोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और तुच्छ व महत्वहीन बातों को महत्वपूर्ण बनाकर पेश करते हैं। इन लोगों की समस्याएँ केवल उनके बेटे की पत्नी के साथ उनके रिश्ते तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यापक हैं और सभी लोगों को प्रभावित करती हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए कठोर प्रयासों की आवश्यकता होती है, उन्हें सही-गलत, अच्छाई-बुराई की पहचान सिखाना तथा उन्हें विश्वास और आज्ञाकारिता पर प्रशिक्षण देना होता है। ऐसे में, पति, जो जानता है कि उसके घरवालों का यही स्वभाव है, उसे अपनी पत्नी के बारे में उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और न ही उन्हें कोई महत्व देना चाहिए। उसे अपने घरवालों की स्थिति सुधारने में योगदान देना चाहिए, उन्हें अच्छाई की ओर प्रेरित करना चाहिए और अगर उनकी वजह से उसकी पत्नी के साथ अन्याय होता है तो उसका साथ देना चाहिए।
  2. दोनों पक्षों के बीच समस्याओं का कारण पति के घरवालों के दिलों में उत्पन्न होने वाली ईर्ष्या और जलन हो सकती है, जब वे अपने बेटे को अपनी पत्नी के प्रति स्नेह और उसके लाड़-प्यार को देखते हैं। इस समस्या का समाधान उन्हें ज़्यादा लाड़-प्यार, विशेष देखभाल और ढेर सारे उपहार देने में निहित है, जबकि पति उनके सामने अपनी पत्नी के प्रति अपने स्नेह को प्रदर्शित करने से बचे। पति को भी उन पर ध्यान देना चाहिए और बार-बार प्रार्थना करनी चाहिए कि अल्लाह तआला उनके दिलों से ईर्ष्या और जलन को दूर कर दे।
  3. इन समस्याओं का कारण यह भी हो सकता है कि पति के घरवाले पत्नी की अपने बेटे, या उसके बच्चों या घर के प्रति कमियों, या उनके प्रति उसके असम्मानजनक व्यवहार, जैसे कि अपनी माँ के प्रति अनादर, इत्यादि को देखते हैं, जो वास्तव में कई पत्नियों में मौजूद होती हैं — मनगढ़ंत नहीं हैं। यही इन समस्याओं का सकारात्मक पहलू है! क्योंकि इससे पत्नी को अपनी कमियों और लापरवाहियों को पहचानने का मौका मिलता है, जिससे वह अपनी गलतियों को सुधार पाती है, खामियों को दूर कर पाती है और कमियों को पूरा कर पाती है। कोई भी पत्नी अपने कार्यों और चरित्र में पूर्णता का दावा नहीं कर सकती, और यही इन समस्याओं का सबसे आसान कारण है। क्योंकि पत्नी के लिए समाधान आसान और सीधा है : उसे खुद को सुधारना होगा और अपने पति के घरवालों के साथ अपने रिश्ते को समझदारी से पेश आकर और सभी को उचित सम्मान देकर सुधारना होगा। ऐसा करके, वह समस्याओं को सुधार सकती है और अपने पति का दिल जीत सकती है।

दूसरा :

हमारा मानना ​​है कि अगर पति उसे निर्देश देता है कि वह उसके और उसके घरवालों के बीच जो कुछ भी होता है, उसके बारे में किसी को न बताए, तो पत्नी को उसकी बात माननी चाहिए। पति का यह निर्णय पत्नी की अपनी भड़ास निकालने की इच्छा से कहीं ज़्यादा हितकारी है। क्योंकि अगर ऐसे मामले सार्वजनिक हो जाएँ और फैल जाएँ, तो हर कोई अपनी राय देगा, योजनाएँ बनाएगा, या गलत समाधान सुझाएगा। इससे स्थिति और बिगड़ेगी, समस्याएँ और उनके कारण बढ़ेंगे, और उनका समाधान कष्टपूर्ण या बहुत कठिन हो जाएगा।

पत्नी का किसी समझदार व्यक्ति से शिकायत करना जायज़ है और यह निषिद्ध गीबत (पीठ पीछे बुराई करने) के अंतर्गत नहीं आता है – तथा प्रश्न संख्या (7660) का उत्तर देखें। साथ ही, पति को यह अधिकार है कि अगर उसे ऐसा करने का कोई जायज़ धार्मिक कारण नज़र आए, तो वह पत्नी को इस जायज़ कार्य से रोक सकता है।

हम समझते हैं कि आपने अपने पति की बात न मानकर और अपनी बहन और अपने भाई की पत्नी को अपने और अपने पति के घरवालों के बीच हुई बातचीत के बारे में बताकर गलती की है। इसे सुधारने के लिए, आपको तौबा करनी चाहिए और अल्लाह से क्षमा माँगनी चाहिए, उनसे इस बारे में बात करने से बचना चाहिए, और उन्हें सलाह देनी चाहिए कि वे आपके द्वारा कही गई किसी भी बात का ज़िक्र किसी और से न करें। आपने जो किया है, उसे अपने पति के सामने स्वीकारने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इससे कोई फ़ायदा नहीं होगा; बल्कि, इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि वह आपसे और आपके कार्यों से नफ़रत करने लगे, और आपको अपनी बहन और भाई की पत्नी से बात करने से पूरी तरह मना कर दे। यह सब होना स्वाभाविक है, क्योंकि ऐसे समय में शैतान की उपस्थिति प्रबल होती है, जो मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है और इसके कारण दुश्मनी और नफ़रत फैलाता है।

तीसरा :

अपने पति और उनके घरवालों के साथ व्यवहार करने के लिए आपको बहुत समझदारी की ज़रूरत है, और आप — अल्लाह की इच्छा से — इसे संभालने में सक्षम हैं। यह बात हमें आपके इस कथन से स्पष्ट हो गई : "क्योंकि मुझे और मेरी बहनों को यह संस्कार दिया गया है कि हम ऐसे लोगों को जवाब न दें, जो हमारे साथ गलत करते हैं। मैं शायद ही कभी शालीनता से जवाब दे पाती हूँ, और तब भी, मुझे आत्मग्लानि होती है।" तथा यह बात आपके दूसरे कथन से भी स्पष्ट है :  "जब मैं उनके घर जाती हूँ, तो मैं यह नहीं दिखाती कि मैं परेशान, आहत या शर्मिंदा हूँ। मैं सामान्य व्यवहार करती हूँ, लेकिन अंदर ही अंदर उबल रही होती हूँ।" यह ऐसा काम है जो केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसके पास आत्म-संयम (सेल्फ़-कंट्रोल) हो, तथा केवल बुद्धिमान लोग ही ऐसा कर सकते हैं।

आपसे जो अपेक्षित है वह निम्नलिखित है :

  1. आप अपने पति के घरवालों से सुनी गई उन बातों को नज़रअंदाज़ करें जिनके बारे में आपको पता है कि वे आपको भड़काने के लिए हैं और पूरी तरह मनगढ़ंत हैं।
  2. अपने मामलों, अपने घर और अपने बच्चों पर ध्यान दें। उनसे जो कुछ भी आप सुनती हैं, जो वास्तव में आपके अंदर पाई जाती है : उसे ठीक किया जाना चाहिए और उससे उचित तरीके से निपटा जाना चाहिए।
  3. अच्छे तरीके, कोमल शब्दों और सुखद कार्यों के साथ उनके घरवालों से दोस्ती करने का प्रयास करें। समय-समय पर उन्हें कोई ऐसा तोहफ़ा दें जो उन्हें पसंद हो, या उनके लिए कोई खाना तैयार करें, या कोई खास मिठाई बनाकर दें। यह तो सब जानते हैं कि उपहार दिलों को करीब लाने और संबंधित पक्षों के बीच प्रेम और स्नेह को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
  4. अपने पति के साथ अच्छा व्यवहार करें और उनके घरवालों की ओर से जो कुछ भी हो रहा है, उसका ज़िक्र किसी से न करें। उनका अपने आप पर भरोसा बनाए रखें और उन्हें ऐसी कोई बात सुनने या देखने न दें जो उन्हें पसंद न हो।
  5. हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अपने प्रति किए गए अपमान और बदनामी के बारे में पूरी तरह चुप रहना चाहिए। हमारी सलाह है कि आप इन मामलों को अपने पति के साथ साझा करें, उन्हें स्थिति को सुधारने और यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सौंपें कि सभी को उनका हक़ मिले। आप उन्हें दिखाएँ कि आपके घरवालों ने आपको कितनी अच्छी परवरिश दी है।
  6. अंत में : अपने पति को यह सुझाव देना बिल्कुल ठीक है कि वह अपने घरवालों के घर से दूर चले जाएँ। लेकिन ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य नहीं है, क्योंकि आपका अधिकार है कि आप स्वतंत्र रूप से (अकेले) रहें, और आपको यह प्राप्त है। हालाँकि, अगर आपके पति को पता है कि उनके और उनकी पत्नी के बीच सामंजस्य नहीं है, तो उनके लिए अपने घरवालों के घर से दूर चले जाना बुद्धिमानी और आपके हित में है। शायद यह दूरी सभी पक्षों के बीच के बंधनों को मज़बूत करेगी और उनके दिलों से किसी भी तरह की नाराज़गी या दुर्भावना को दूर करेगी।

आप अपने रब, अल्लाह से दुआ के माध्यम से मदद माँगें, साथ ही अपनी अनिवार्य इबादत भी पूरी करें। हम सर्वशक्तिमान अल्लाह से प्रार्थना करते हैं कि वह आपको उस चीज़ का सामर्थ्य प्रदान करे जो उसे पसंद हो और आप सभी को भलाई में एकजुट करे।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

संदर्भ

स्रोत

साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर