बुधवार 13 रबीउलअव्वल 1440 - 21 नवंबर 2018
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ईमान को धर्मपरायणता के साथ मिलाने के परिणाम क्या हैंॽ

192610

प्रकाशन की तिथि : 15-09-2018

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प्रश्न

ईमान को धर्मपरायणता के साथ मिलाने के परिणाम क्या हैंॽ

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए है।

अल्लाह सर्वशक्तिमान ने फरमाया:

)مَنْ عَمِلَ صَالِحاً مِنْ ذَكَرٍ أَوْ أُنْثَى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَنُحْيِيَنَّهُ حَيَاةً طَيِّبَةً وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُمْ بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ) [سورة النحل:97]

"जो भी पुरुष या स्त्री सत्कर्म करे और वह मोमिन हो, तो निःसंदेह हम उसे उत्तम जीवन प्रदान करेंगे और उनके अच्छे कामों का सर्वश्रेष्ठ प्रतिफल भी उन्हें अवश्य देंगे।" (सूरतुन नह्ल: 97)

हाफ़िज़ इब्न कसीर रहिमहुल्लाह व तआला कहते हैं :

"यह अल्लाह तआला की ओर से आदम की संतान में से उस मनुष्य के लिए जो सत्य कार्य करे, अर्थात ऐसा कार्य जो अल्लाह की किताब और उसके पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत के अनुकूल हो, चाहे वह पुरुष हो या महिला और उसका दिल अल्लाह और उसके पैगंबर में विश्वास रखता हो, यह वादा है कि अल्लाह उसे दुनिया में अच्छा जीवन प्रदान करेगा और परलोक में उसे उसके कार्यों का सबसे अच्छा बदला देगा। अच्छा जीवन हर प्रकार के आराम को शामिल है। इब्न अब्बास और एक समूह से वर्णित है कि उन्हों ने अच्छे जीवन की व्याख्या “हलाल व पवित्र जीविका” से की है। अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि उन्हों ने इसकी व्याख्या “संतोष (क़नाअत)” से की है। इसी तरह इब्न अब्बास, इक्रिमा और वहब बिन मुनब्बिह की भी व्याख्या है, जबकि अली बिन अबी तल्हा ने इब्न अब्बास से उल्लेख किया है कि इससे अभिप्राय “सौभाग्य (खुशी)” है। ज़ह्हाक ने कहाः इससे अभिप्राय “दुनिया में हलाल आजीविका और उपासना” है, ज़ह्हाक ही का यह भी कहना है कि इससे अभिप्राय : “आज्ञाकारिता करना और उससे दिल का प्रफुल्ल होना” है, सही बात यह है कि अच्छा जीवन इन सब को शामिल है।" तफ्सीर इब्न कसीर (4/516) से समाप्त हुआ।

अल्लाह तआला ने फरमायाः

(وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِنْ ذَكَرٍ أَوْ أُنْثَى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ) [سورة غافر:40]

''तथा जो सुकर्म करे, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, किंतु वह ईमान वाला (एकेश्वरवादी) हो, तो वही लोग स्वर्ग में प्रवेश करेंगे। वे वहाँ असंख्य जीविका दिए जाएंगे।” (सूरत ग़ाफ़िरः 40)  

तथा अल्लाह तआला ने फरमायाः

( وَمَنْ أَرَادَ الْآخِرَةَ وَسَعَى لَهَا سَعْيَهَا وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَئِكَ كَانَ سَعْيُهُمْ مَشْكُورًا ) [الإسراء:19]

"और जो आखिरत को चाहे और उसके लिए जैसी कोशिश होनी चाहिए वह करता भी हो और वह ईमान के साथ भी हो, फिर तो यही लोग हैं जिनकी कोशिश का अल्लाह के यहाँ पूरा सम्मान किया जायेगा।" (सूरतुल इस्रा :19)

तथा अल्लाह सर्वशक्तिमान ने फरमायाः

(وَمَنْ يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا )  [طه: 112]

''तथा जो अच्छे कर्म करे और वह ईमान वाला भी हो, तो उसे न तो किसी ज़ुल्म का भय होगा और न हक़ मारे जाने का।'' (सूरत ताहाः 112)

इन आयतों से पता चलता है कि अगर बंदा अल्लाह पर ईमान लाता है और अपने पालनहार के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करता है, चुनाँचे वह अल्लाह की उपासना में किसी को साझीदार नहीं ठहराता है, और अल्लाह की शरीअत पर सुदृढ़ रहता है और उससे बाहर नहीं निकलता हैः तो उसे दोनों स्थानों (दुनिया व आख़िरत) में सौभाग्य, और इस लोक और परलोक में सफलता प्राप्त होगी। उसे इस दुनिया की सबसे बड़ी अनुकंपा यह प्राप्त होगी किः अल्लाह उसे मन की शांति, दिल की खुशी और हृदय की पवित्रता प्रदान करेगा और दृढ़ विश्वास और निश्चितता के साथ अल्लाह की आज्ञाकारिता पर उसके ध्यान को केंद्रित कर देगा। बल्कि उस पर यह भी उपकार करेगा कि उसके दिल को पवित्र, उसके कथन को शुद्ध और उसके कार्य को शुद्ध कर देगा और उसे खुले और छिपे हुए फित्नों (उपद्रवों, प्रलोभनों) से बचा लेगा।

यदि इसी स्थिति पर उसकी मृत्यु हो गई : तो उसे कब्र के परीक्षण से मुक्ति प्रदान करेगा, फिर जब उसे मरने के बाद उठाएगा तो उसके हिसाब व किताब को आसान कर देगा, और उसके अज्र व सवाब (प्रतिफल) को कई गुना कर देगा, और उसके बुरे कामों को अच्छे कर्मों में बदल देगा, फिर वह उसे अपनी दया से स्वर्ग में प्रवेश प्रदान करेगा। वहाँ वह ऐसी खुशी और सौभाग्य का अनुभव करेगा कि वह कभी दुष्ट नहीं होगा, वह उसमें जीवित रहेगा और कभी नहीं मरेगा, और वह उसमें ऐसी चीज़ें पाएगा जिन्हें न किसी आंख ने देखा, न किसी कान ने सुना और न ही किसी मनुष्य के हृदय में उसका ख्याल आया होगा।

अल्लाह सर्वशक्तिमान ने फरमाया :

(إِنَّ الَّذِينَ قَالُوا رَبُّنَا اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلَائِكَةُ أَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّتِي كُنْتُمْ تُوعَدُونَ * نَحْنُ أَوْلِيَاؤُكُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِي أَنْفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ * نُزُلًا مِنْ غَفُورٍ رَحِيمٍ) [فصلت:30-32]

"वास्तव में, जिन लोगों ने कहा हमारा पालनहार अल्लाह है फिर उस पर दृढ़तापूर्वक जमें रहे, उनके पास फरिश्ते (यह कहते हुए) आते हैं कि तुम कुछ भी भय न करो और न शोक ग्रस्त हो, और उस स्वर्ग की शुभ सूचना सुन लो जिसका तुम से वादा किया जाता था। हम दुनिया के जीवन में भी तुम्हारे साथी थे और परलोक में भी रहेंगे। तुम्हारे लिए उस (स्वर्ग) में हर वह चीज़ है, जो तुम्हारा मन चाहे तथा उसमें तुम्हारे लिए वह सब है, जिसकी तुम माँग करोगे। ये आतिथ्य के रूप में है क्षमाशील, दयावान (अल्लाह) की ओर से।" (सूरत-फ़ुस्सिलत : 30-32)

और अल्लाह ही सबसे अच्छा ज्ञान रखता है।

स्रोत: साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर

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