यदि शादी करने से किसी प्रकार की आज्ञाकारिता और नेकी का इरादा हो, जैसे कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अनुसरण करने, या नेक और सदाचारी संतान प्राप्त करने, या स्वयं को हराम से बचाने तथा अपनी शर्मगाह, निगाह और दिल की हिफ़ाज़त करने का इरादा हो और इसी प्रकार के अन्य नेक उद्देश्य हों - तो ऐसी शादी आख़िरत के कामों में से है और इस पर सवाब मिलेगा। लेकिन यदि शादी करते समय इनमें से किसी भी नेक उद्देश्य की नीयत न हो, तो वह दुनिया के कामों और नफ़्स की इच्छाओं को पूरा करने के साधनों में से एक अनुमेय (जायज़) काम है। ऐसी स्थिति में न तो उसपर सवाब मिलेगा और न ही गुनाह होगा।
और अल्लाह ही सबसे अधिक ज्ञान रखने वाला है।