सोमवार 2 जुमादा-1 1443 - 6 दिसंबर 2021
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04-06-2021

वह रात ही से रोज़े की नीयत किए बिना रमज़ान की क़ज़ा के रोज़े रखती थी, वह सुबह के समय रोज़े की नीयत करती थी, तो अब उसे क्या करना चाहिएॽ

04-06-2021

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12-04-2021

उस आदमी का हुक्म जो रमज़ान की क़ज़ा भूल गया और दूसरा रमज़ान आ गया

12-04-2021

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17-03-2021

जो व्यक्ति बिना किसी उज़्र के रमज़ान का रोज़ा न रखे अथवा बीच रमज़ान में जानबूझ कर रोज़ा तोड़ दे तो क्या उस पर क़ज़ा करना अनिवार्य है?

17-03-2021

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01-06-2020

यदि शेष दिन पर्याप्त नहीं हैं तो क्या वह क़ज़ा करने से पहले शव्वाल के छ: रोज़े से शुरूआत करेगा ?

01-06-2020

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29-05-2020

शव्वाल के छ: रोज़ों के साथ रमज़ान की क़ज़ा को एक ही नीयत में एकत्रित करना शुद्ध नहीं है

29-05-2020

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23-05-2020

शव्वाल के महीने के दूसरे दिन रोज़ा रखना जायज़ है।

23-05-2020

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13-04-2020

रोज़े के फ़िद्या में खाना खिलाने के बदले पैसा निकालना जायज़ नहीं है

13-04-2020

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09-04-2020

जिस व्यक्ति पर रमज़ान के रोज़े हों, जिनकी संख्या उसे याद न हो

09-04-2020

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07-04-2020

उसने दो साल रोज़े नहीं रखे और अब वह क़ज़ा करने में असक्षम है, तो उसे क्या करना चाहिए?

07-04-2020

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12-04-2019

वह रोज़े की क़ज़ा शुरू करने से पहले गर्भवती होगई और वह रोज़ा रखने में सक्षम नहीं है

12-04-2019

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06-05-2018

रमज़ान के छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा करने की नीयत से शक के दिन रोज़ा रखना

06-05-2018

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24-04-2018

रोज़े की क़ज़ा में विलंब करना

24-04-2018

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21-04-2018

जो व्यक्ति बिना किसी उज़्र के रमज़ान का रोज़ा न रखे अथवा बीच रमज़ान में जानबूझ कर रोज़ा तोड़ दे तो क्या उस पर क़ज़ा करना अनिवार्य है?

21-04-2018

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31-08-2017

तश्रीक़ के दिनों में अनिवार्य रोज़े की क़ज़ा करना सही नहीं है

31-08-2017

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02-07-2017

क्या वह शव्वाल के छः रोज़े रखना शुरू कर सकता है जबकि उसके ऊपर रमज़ान की क़ज़ा बाक़ी है

02-07-2017