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क़ुर्बानी करनेवाले के परिवार के लिए ज़ुल-हिज्जा के पहले दस दिनों में अपने बालों और नाखूनों को काटना जायज़ है

22-08-2017

प्रश्न 33743

यदि पुरूष ही को क़ुर्बानी करना है तो क्या उसकी पत्नी और उसके बच्चों के लिए ज़ुल-हिज्जा के महीने के प्रवेष करने पर अपने बालों और नाखूनों को काटना जायज़ है?

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह तआला के लिए योग्य है।.

हां, ऐसा करना जायज़ है। तथा प्रश्न संख्या (36567) के उत्तर में यह वर्णन हो चुका है कि क़ुर्बानी करने वाले के लिए अपने बाल या नाखून, या त्वचा से कुछ भी काटना हराम (निषिद्ध) है। यह हुक्म केवल क़ुर्बानी करनेवाले आदमी के साथ विशिष्ट है जो क़ुर्बानी के जानवर का मालिक है।

शैख इब्ने बाज़ रहिमहुल्लाह ने फरमायाः

‘‘रही बात क़ुर्बानी करनेवाले के परिवार की, तो उनके ऊपर कुछ भी प्रतिबंध नहीं है, और वे लोग विद्वानों के दो कथनों में से सबसे सही कथन के अनुसार बाल और नाखून काटने से रोके नहीं जाएंगे, बल्कि यह हुक्म विशेष रूप से केवल क़ुर्बानी करनेवाले के साथ विशिष्ट है जिसने अपने धन से क़ुर्बानी का जानवर खरीदा है।’’ समाप्त हुआ।

‘‘फतावा इस्लामिया’’ (2/316).

तथा स्थायी समिति के फतावा (11/397) में आया हैः

‘‘जो व्यक्ति क़ुर्बानी करना चाहता है उसके लिए धर्मसंगत यह है कि जब ज़ुल-हिज्जा का नया चाँद निकल आए तो वह अपने बाल, या अपने नाखून या अपनी त्वाचा से कुछ भी न काटे यहाँ तक कि वह क़ुर्बानी कर ले। क्योंकि बुखारी रहिमहुल्ला के अलावा जमाअत (समूह) ने उम्मे सलिमा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत किया है कि अल्लाह के पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः ‘‘जब तुम ज़ुलहिज्जा का चाँद देख लो और तुम में से कोई क़ुर्बानी करना चाहे तो वह अपने बाल और नाखूनों (को काटने) से रुक जाए।’’ तथा अबू दाऊद (हदीस संख्याः 2719) और मुस्लिम (हदीस संख्याः 1977) के शब्द यह हैं किः ‘‘जिस आदमी के पास क़ुर्बानी करने के लिए जानवर हो तो जब ज़ुल-हिज्जा का नया चाँद प्रकट हो जाए तो वह अपने बाल और अपने नाखून में से कुछ भी न काटे यहाँ तक कि वह क़ुर्बानी कर ले।’’ चाहे वह क़ुर्बीनी के जानवर को स्वयं ज़बह करे या उसको ज़बह करने के लिए किसी दूसरे को नियुक्त कर दे। परंतु जिसकी ओर से क़ुर्बानी की जा रही है तो उसके हक़ में ऐसा करना (बाल और नाखून निकालने से बचना) धर्मसंगत नहीं है; क्योंकि इस बारे में कोई चीज़ वर्णित नहीं है।’’ समाप्त हुआ।

तथा शैख इब्ने उसैमीन रहिमहुल्लाह ने ‘’ अश्शर्हुल मुम्ते’’ (7/530) में फरमायाः

जिसकी ओर से क़ुर्बानी की जा रही है उसके लिए इसके काटने में कोई आपत्ति की बात नहीं है, इसका सबूत निम्नानुसार है:

1- हदीस का स्पष्ट अर्थ यही है, और वह यह कि निषेध केवल उस व्यक्ति के साथ विशिष्ट है जो क़ुर्बानी कर रहा है। इस आधार पर, निषेध केवल घर के मुखिया के लिए विशिष्ट है। रही बात घर के अन्य सदस्यों (परिवार) की, तो उन पर यह हराम (निषिद्ध) नहीं है, क्योंकि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस हुक्म को उस व्यक्ति से संबंधित किया है जो क़ुर्बानी कर रहा है। तो इससे यह समझा जाता है कि यह हुक्म उन लोगों पर लागू नहीं होता है जिनकी ओर से क़ुर्बानी की जा रही है।

2 - पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने घर वालों की ओर से क़ुर्बानी किया करते थे और आपके बारे में यह कहीं भी वर्णित नहीं है कि आप ने उनसे कहा होः अपने बाल, नाखून या त्वचा से कुछ भी नहीं काटो। यदि यह उन पर हराम (निषिद्ध) होता, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन्हें ऐसा करने से अवश्य मना करते। यही राजेह कथन (सबसे सही राय) है।

बलिदान (क़ुर्बानी)
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