उसने रोज़ा रखा जबकि उसे मासिक धर्म से शुद्धता में संदेह था

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प्रश्न 106452

एक महिला ने रोज़ा रखा जबकि उसे मासिक धर्म से शुद्धता में संदेह था। जब उसने सुबह किया तो वह शुद्ध थी। क्या उसका रोज़ा स्थापित होगा जबकि वह अपनी पवित्रता के बारे में सुनिश्चित नहीं थी?  

उत्तर का पाठ

हर प्रकार की प्रशंसा एवं गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य है, तथा दुरूद व सलाम की वर्षा हो अल्लाह के रसूल पर। इसके बाद :

“उसका रोज़ा स्थापित नहीं होगा और उसके लिए उस दिन के रोज़े की क़ज़ा करना अनिवार्य है। क्योंकि मूल सिद्धांत यह है कि मासिक धर्म अभी भी चल रहा है और उसका शुद्धता का यक़ीन न होने के उपरांत भी रोज़े में प्रवेश करना, उसका इबादत में उसके सही होने की शर्त में संदेह के साथ प्रवेश करना है, और यह बात रोज़े के स्थापित होने को रोकती है।” उद्धरण का अंत हुआ।

आदरणीय शैख मुहम्मद बिन उसैमीन।

“मज्मूओ फतावा इब्न उसैमीन”, फतावा अस्सियाम (107. 108).

संदर्भ

रोज़े को अमान्य करने वाली चीज़ें

स्रोत

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