जिस व्यक्ति को अल्लाह तआला हिदायत प्रदान करे और वह इस्लाम धर्म में दाख़िल हो जाए, उसके लिए इतना ही पर्याप्त है कि वह अपने लिए कोई इस्लामी नाम चुन ले और अपने पिता तथा परिवार की ओर अपनी वंशावली (नसब) का संबंध पहले की तरह ही बरकरार रखे।
क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन सहाबा को, जिन्होंने इस्लाम स्वीकार किया था, अपने पिता और दादा के नाम बदलने का आदेश नहीं दिया था। बल्कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने केवल उन लोगों के नाम बदले थे जिनके नाम हराम या नापसंदीदा अर्थ वाले थे।
चूँकि आपके नाम की जड़ें मूर्तिपूजक मान्यताओं से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उसे बदलकर कोई दूसरा नाम, जैसे बिलाल या कोई अन्य नाम रखना, बिल्कुल सही और उचित कार्य है। आपको अपनी वंशावली के शेष हिस्से को पहले की तरह ही बरक़रार रखना चाहिए। इसमें आपके माता-पिता को प्रसन्न करने का एक पहलू भी है।
हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह आपके माता-पिता को हिदायत दे और हमें तथा आपको सही मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ प्रदान करे।
तथा अल्लाह हमारे नबी मुहम्मद पर दुरूद व सलाम अवतरित करे।