कॉस्मेटिक सर्जरी (सौंदर्य शल्य-चिकित्सा) दो प्रकार की होती है :
- आवश्यक कॉस्मेटिक सर्जरी :
यह वह सर्जरी है जिसका उद्देश्य किसी दोष (ऐब) को दूर करना होता है, जैसे कि बीमारी, सड़क दुर्घटना, जलने या अन्य कारणों से उत्पन्न दोष को ठीक करना, या जन्मजात विकृतियों (दोष) को दूर करना, जैसे अतिरिक्त उंगली को काटना, या दो जुड़ी हुई उंगलियों को अलग करना, आदि।
इस प्रकार की सर्जरी जायज़ (अनुमेय) है। सुन्नत में इसके प्रमाण मिलते हैं :
- अरफ़जा बिन असअद से रिवायत है कि जाहिलियत के दौर में ‘यौमुल-कुलाब’ नामी एक लड़ाई में उनकी नाक कट गई। उन्होंने चाँदी की नाक बनवाई, लेकिन उसमें बदबू आने लगी। तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें सोने की नाक बनवाने का आदेश दिया। इसे तिर्मिज़ी (हदीस संख्या : 1770), अबू दाऊद (हदीस संख्या : 4232) और नसाई (हदीस संख्या : 5161) ने रिवायत किया है। शैख अलबानी ने इस हदीस को ‘’इरवाउल-ग़लील’’ (824) में हसन कहा है।
- अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने कहा :
“मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को उन महिलाओं पर लानत करते हुए सुना जो भौंहों के बाल उखाड़ती हैं, सौंदर्य के लिए दाँतों के बीच कृत्रिम दूरी बनाती हैं, और इस प्रकार अल्लाह की बनाई हुई सृष्टि को बदलती हैं।” इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।
- नामिसा (النَّامِصَة): वह स्त्री जो अपनी भौंहों के बाल उखाड़ती है।
- मुतनम्मिसा (المتنمصة): वह स्त्री जो किसी से अपने चेहरे के बाल उखाड़ने के लिए कहती है।
- मुतफ़ल्लिजात (المتفلجات): वे महिलाएँ जो केवल सुंदरता के लिए दाँतों के बीच कृत्रिम दूरी बनवाती हैं ताकि दाँत छोटे और अधिक आकर्षक प्रतीत हों।
इमाम नववी रहिमहुल्लाह कहते हैं :
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के फ़रमान : الْمُتَفَلِّجَات لِلْحُسْنِ "सुंदरता के लिए दाँतों के बीच विस्तार पैदा करने वालियाँ" का अर्थ यह है कि वे यह कार्य केवल सुंदरता प्राप्त करने के लिए करती हैं। इसमें इस बात की ओर संकेत है कि हराम वही है जो केवल सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जाए। लेकिन यदि किसी उपचार (इलाज) या दाँत के किसी दोष आदि को दूर करने की आवश्यकता हो, तो इसमें कोई हर्ज नहीं। और अल्लाह ही सबसे अधिक जानने वाला है।” उद्धरण समाप्त हुआ।
- केवल सौंदर्य बढ़ाने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी
यह वह सर्जरी है जिसका उद्देश्य केवल व्यक्ति की नज़र में रूप-रंग को अधिक सुंदर बनाना होता है, जैसे नाक को छोटा करना, स्तनों को छोटा या बड़ा करना, चेहरे की त्वचा को कसने (Face Lift) की सर्जरी, और इसी प्रकार की अन्य प्रक्रियाएँ।
इस प्रकार की सर्जरी जायज़ नहीं है। क्योंकि इसमें न कोई वास्तविक आवश्यकता होती है और न कोई ऐसी ज़रूरत जो शरई दृष्टि से स्वीकार्य हो। इसका उद्देश्य केवल अल्लाह की बनाई हुई रचना में परिवर्तन करना और लोगों की इच्छाओं एवं मनमानी के अनुसार उससे छेड़छाड़ करना होता है। इसलिए यह हराम है। इसका करना जायज़ नहीं है क्योंकि यह अल्लाह की सृष्टि को बदलना है।
अल्लाह तआला ने फ़रमाया :
إِنْ يَدْعُونَ مِنْ دُونِهِ إِلا إِنَاثاً وَإِنْ يَدْعُونَ إِلا شَيْطَاناً مَرِيداً * لَعَنَهُ اللَّهُ وَقَالَ لأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيباً مَفْرُوضاً * وَلأُضِلَّنَّهُمْ وَلأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلآمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ آذَانَ الأَنْعَامِ وَلآمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ
"वे अल्लाह को छोड़कर केवल स्त्री देवियों को पुकारते हैं, और वास्तव में वे केवल एक सरकश शैतान को पुकारते हैं। अल्लाह ने उस पर लानत की है। उसने कहा : मैं तेरे बंदों में से एक निश्चित हिस्सा लेकर रहूँगा, उन्हें गुमराह करूँगा, झूठी आशाएँ दिलाऊँगा, उन्हें आदेश दूँगा कि वे पशुओं के कान चीरें, और उन्हें आदेश दूँगा कि वे अल्लाह की बनाई हुई बनावट को बदल दें।" (सूरत अन-निसा :117–119)
अर्थात शैतान ही लोगों को अल्लाह की बनाई हुई रचना में परिवर्तन करने का आदेश देता है।
इस विषय पर शैख मुहम्मद अल-मुख़्तार अश-शन्कीती की पुस्तक "अहकाम अल-जिराहा अत-तिब्बिया" भी देखी जा सकती है।
मुहम्मद बिन सालेह अल-उसैमीन रहिमहुल्लाह से पूछा गया:
कॉस्मेटिक सर्जरी कराने का क्या हुक्म है? और कॉस्मेटिक सर्जरी का विज्ञान (Plastic Surgery) सीखने का क्या हुक्म है?
तो उन्होंने उत्तर दिया :
कॉस्मेटिक सर्जरी दो प्रकार की है :
पहला प्रकार : वह सर्जरी जो किसी दुर्घटना या अन्य कारण से उत्पन्न दोष को दूर करने के लिए हो। इसमें कोई हर्ज नहीं है। क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक व्यक्ति को, जिसकी नाक युद्ध में कट गई थी, सोने की नाक बनवाने की अनुमति दी थी।
दूसरा प्रकार : वह सर्जरी जो किसी दोष को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि केवल सुंदरता बढ़ाने के लिए हो। यह हराम है, जायज़ नहीं है। क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भौंहों के बाल उखाड़ने वाली और उखड़वाने वाली, बाल जोड़ने वाली और जुड़वाने वाली, गोदना गोदने वाली और गोदवाने वाली (टैटू बनाने और बनवाने वाली) पर लानत फ़रमाई है, क्योंकि यह केवल अतिरिक्त सौंदर्य प्राप्त करने के लिए किया जाता है, न कि किसी दोष को दूर करने के लिए।
जहाँ तक उस छात्र का संबंध है जिसके पाठ्यक्रम में कॉस्मेटिक सर्जरी शामिल हो, तो उसके लिए इसे सीखने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन उसे हराम मामलों में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। बल्कि जो व्यक्ति ऐसे हराम ऑपरेशन की माँग करे, उसे इससे बचने की सलाह देनी चाहिए। संभव है कि जब यह सलाह किसी डॉक्टर की ओर से दी जाए, तो लोगों पर उसका अधिक प्रभाव पड़े।” (फ़तावा इस्लामिय्यह, 4/412)
निष्कर्ष :
- यदि नाक में कोई वास्तविक दोष या विकृति हो, और ऑपरेशन का उद्देश्य उसी दोष को दूर करना हो, तो ऐसी सर्जरी जायज़ है।
- लेकिन यदि उद्देश्य सिर्फ़ सुंदरता बढ़ाना या रूप-रंग को और आकर्षक बनाना हो, तो ऐसी कॉस्मेटिक सर्जरी जायज़ नहीं है।
और अल्लाह ही सबसे अधिक जानने वाला है।