वर्गीकरण वृक्ष
शपथ व प्रतिज्ञा और मन्नत
नज़्र (मन्नत) के प्रकार और उनके अहकाम का सारांश
नज़्र (मन्नत) यह है कि कोई मुकल्लफ़ (शरई नियमों की बाध्यता के योग्य व्यक्ति) अपने ऊपर किसी ऐसे काम को अनिवार्य कर ले जो पहले उस पर अनिवार्य नहीं था, चाहे वह तुरंत लागू हो या किसी शर्त के साथ जुड़ा हो। शरीअत-सम्मत नज़्र को पूरा करना वाजिब (अनिवार्य) है, जिसका प्रमाण अल्लाह तआला का यह कथन है : ثم ليقضوا تفثهم وليوفوا نذورهم “फिर वे अपना मैल-कुचैल दूर करें तथा अपनी मन्नतें पूरी करें।” (सूरतुल्-ह़ज्ज : 29)। नज़्र के कई प्रकार हैं : 1- वह नज़्र जिसे पूरा करना वाजिब है और वह आज्ञाकारिता की नज़्र है। 2- वह नज़्र जिसे पूरा करना जायज़ नहीं है, बल्कि उसमें क़सम का कफ़्फ़ारा देना होता है और वह अवज्ञा की नज़्र है। हर वह नज़्र जो किसी नस (शरीअत के स्पष्ट प्रमाण) से टकराती हो। तथा वह नज़्र जिसका क़सम के कफ़्फ़ारा के अलावा कोई हुक्म नहीं। वह नज़्र जिसमें नज़्र मानने वाले को नज़्र पूरी करने या क़सम का कफ़्फ़ारा देने का विकल्प होता है।सहेजेंक्या तलाक़ की क़सम अल्लाह के अलावा की क़सम है?
सहेजेंउस व्यक्ति पर क्या अनिवार्य है जिसने एक निश्चित समय पर कुछ करने की क़सम खाई, परंतु उसने ऐसा नहीं कियाॽ
सहेजेंअल्लाह की आयतों की क़सम खाने का हुक्म
सहेजेंक़सम का कफ़्फ़ारा विस्तार से क्या हैॽ
सहेजेंझूठी क़सम का प्रायश्चित केवल सच्ची तौबा ही कर सकती है
सहेजेंउसने क़सम खाई कि वह किराया चुकाएगा, फिर उसके साथी ने चुका दिया
सहेजेंउसे सच्ची या झूठी कसम खाने की आदत है, तो वह इन कसमों का प्रायश्चित कैसे करे?
यह है कि जो क़सम आपने भविष्य में किसी चीज़ के करने या न करने पर खाई है, और उसे तोड़ दिया है, तो उसमें आप पर कफ्फारा अनिवार्य है। और जो क़सम आपने अतीत में किसी चीज़ पर खाई है कि आपने उसे किया था या नहीं किया था और आप उसमें झूठे हैं, तो उसपर कोई कफ्फारा नहीं है, और आपको अल्लाह के सामने तौबा करना चाहिए और अल्लाह तआला तौबा करने वाले की तौबा को स्वीकार करता है और क्षमा कर देता है। अल्लाह आपको सामर्थ्य प्रदान करे और आपके पापों को क्षमा करे।सहेजेंउसने रमज़ान में रोज़ा तोड़ने की क़सम खाई
सहेजेंकुछ न करने की क़सम खाने तथा अपनी क़सम न तोड़ने या उसका प्रायश्चित न करने की क़सम खाने का क्या हुक्म हैॽ
सहेजें